पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंअंबिकापुर. स्वच्छता अभियान में अंबिकापुर ने एक बार फिर बाजी मार ली है। पिछले साल देश में दो लाख की आबादी वाले शहरों मंे अंबिकापुर नंबर वन था जबकि इस बार स्वच्छता में इनोवेशन का देश भर में पहला पुरस्कार मिला है। स्वच्छता में नए प्रयोग यानि बेस्ट प्रैक्टिस लिए अंबिकापुर को यह उपलब्धि हासिल हुई है।
स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए देश के 4200 शहरों को शामिल किया गया था। एक से तीन लाख की आबादी वाले शहरों में अंबिकापुर को देश में पहला स्थान दिया गया है। दो साल पहले अंबिकापुर में यह अभियान शुरू हुआ था और अब देश को इस अभियान में नई राह दिखाई है। देश भर में 4 हजार से अधिक शहरों में अंबिकापुर ने अपना दबदबा कायम रखा है। इस बार अभियान में कुछ नए प्रयोग और बेस्ट प्रैक्टिस के कारण अंबिकापुर को यह इनाम मिला है। अंबिकापुर की तर्ज पर देश के कई शहरों में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन शुरू हो गया था। अंबिकापुर ने इससे आगे बढ़कर कचरे का निबटारा और इससे आय का जरिया तैयार किया।
घरों से निकलने वाले सूखे और गीले कचरे निगम के लिए आय का जरिया बन गए हैं और दो साल में अंबिकापुर को इस अभियान में एक करोड़ रुपए से अधिक की आमदनी हुई है। सूखे कचरे को अलग कर कबाड़ में बेचा जाता है जबकि गीले कचरे से खाद बनाई जा रही है। पूरे अभियान की जीपीएस सिस्टम से ऑनलाइन निगरानी की जा रही है। खास बात यह है कि पूरा अभियान चार सौ से अधिक महिलाओं के दम पर संचालित हो रहा है। पिछले साल देश में नंबर वन आने के बाद अंबिकापुर में देश के कई बड़े शहरों की यह कार्यशाला हुई थी। अभियान में एक और खास बात यह है शहर पूरे प्रदेश में सबसे पहले ओडीएफ हो गया था। शहर में 2 दर्जन से अधिक सार्वजनिक टॉयलेट की लोकेशन ऑनलाइन किए गए हैं। बुर्जुगों के साथ महिलाएं और बच्चों के लिए इसमें अलग-अलग व्यवस्था की गई है।
पिछले साल स्वच्छता के लिए इन पर था फोकस
- पिछले साल दो लाख की आबादी वाले शहरों में देश में नंबर वन था अंबिकापुर
- शहर के सभी 48 वार्डों में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन कर किया जाता है निपटारा
- 17 एसएलआरएम सेंटर बनाए गए हैं वार्डों में जहां किया जाता है कचरे का निपटारा
- पूरा अभियान महिलाओं के माध्यम से हो रहा संचालित, 447 महिलाएं जुड़ी हैं अभियान से
चुनौती थी फिर भी सब पर पड़े भारी
पिछले साल स्वच्छता सर्वेक्षण में अंबिकापुर 2 लाख की आबादी वाले शहरों में देश में नंबर वन आने के बाद मैसूर, हरियाण, सूरत, मुंबई जैसे साधन सुविधाओं वाले बड़े शहरों को चौका दिया था। इस साल चुनौती बढ़ गई थी क्योंकि अंबिकापुर के वेस्ट मैनजमंेट मॉडल की तर्ज पर कई शहरों में अभियान शुरू हुआ था पर अंबिकापुर इसके बाद भी बड़े-बड़े शहरों पर भारी पड़ा।
अंबिकापुर स्वच्छता में नंबर वन आ गया है पर अभी भी कई चुनौतियां हैं
- डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के बावजूद 25 से 30 फीसदी ऐसे भी लोग हैं, जो कचरा नहीं दे रहे हैं बल्कि वे सड़कों पर फेंक रहे हैं।
- नगर निगम द्वारा सड़कों पर आ रहे कचरों को राेकने के लिए जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
- पहली बार पकड़े जाने पर 200 रुपए, उसके बाद 5 सौ रुपए जुर्माना लगाया जाता है। हालांकि स्वच्छता सर्वेक्षण के बाद जुर्माना लगाना बंद कर दिया गया है। {निगम में स्वच्छता अभियान के नोडल अधिकारी रितेश सैनी का कहना है कि अब इस पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.