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हमीरपुर के कुरारा ब्लॉक में खरौंजा गाँव है. इस गाँव के दलित टोले के परिवार गरीब हैं और 2010 से पहले खाने के लिए दूसरों के मोहताज रहते थे.
यहां की रहने वाली रानी अपनी बस्ती के लोगों का दर्द बयान करते हुए कहती हैं, \"पहले बड़े लोगों के यहां अनाज मांगने जाते थे मगर वो किसी न किसी बहाने से लौटा देते थे. बड़ी मुश्किल से थोड़ा अनाज मिलता था जिससे गुज़ारा नहीं हो पाता था.\"
भुखमरी की इस समस्या से लड़ने के लिए 2010 में खरौंजा समेत कुछ अन्य गाँवों में महिला स्वयं सेवी समूह बनाकर अनाज बैंक की शुरुआत की गई. फिलहाल, गेहूँ ही इस बैंक की जमा-पूंजी है.
पढ़ें पूरी रिपोर्टरानी खरौंजागाँव की दलित महिला समूह की प्रमुख हैं. शुरू में हर गाँव की 10 महिलाओं ने 20-20 किलो गेहूँ इकठ्ठा किया.
क्योंकि ये गरीब दलित और मुस्लिम परिवारों से थीं और इनके पास खेती भी नहीं थी इसलिए इन महिलाओं ने अपने हिस्से का ये गेहूँ बाज़ार से खरीद कर दिया.
इस तरह इकठ्ठा हुए दो क्विंटल गेहूँ में एक स्वयंसेवी संस्था ने सरकार से पांच क्विंटल गेहूँ दिलवा कर इस अनाज बैंक को मजबूती दी.
ख़ास बात ये है कि उस स्वयंसेवी संस्था की प्रारम्भिक सहायता के बाद अब ये महिलाएं बिना किसी हस्तक्षेप के इस बैंक को चला रही हैं.
ब्याज पर गेहूंपिछले चार साल से चल रहे अनाज बैंक की सफलता से रानी को इस बात का इत्मीनान है कि \"गरीबों के बच्चे अब भूखे नहीं रहते हैं.\"
अनाज बैंक अक्टूबर माह तक ज़रूरतमंदों को छह महीने के लिए गेहूँ \'ब्याज\' पर देता है.
रानी बताती हैं, \"इस साल 16.60 क्विंटल गेहूँ दिया जा चुका है और सिर्फ एक क्विंटल गेहूँ किसी की आपातकाल में मदद के लिए रखा हुआ है.\"
मई तक बैंक से लिया गया अनाज लौटाना होता है. जिसने एक क्विंटल गेहूँ लिया है उसे 25 किलो अतिरिक्त गेहूँ ब्याज के रूप में देना होगा.
इस तरह बैंक में रखे हुए अनाज में बराबर वृद्धि होती रहती है.
बैंक का रजिस्टरखरौंजा के अनाज बैंक की ये महिला सदस्य पहले तो सिर्फ अंगूठा लगाती थीं लेकिन गाँव की ही एक पढ़ी लिखी युवती नीरज ने इनको साक्षर बना दिया है.
अब अनाज के लेन-देन संबंधी रजिस्टर अब ये महिलाएं खुद ही भरती हैं. किसने कितना अनाज लिया और कितना लौटाया, सारी जानकारी एक रजिस्टर में दी हुई है.
इस अनाज बैंक की शुरुआत कुरारा के 14 गाँवों में हुई थी लेकिन छह गाँवों में उधार लिया गया अनाज लोगों ने नहीं लौटाया, इसलिए वे बंद हैं.
कुछ विशेष परिस्थितियों में उधार लिए गए अनाज को वापस करने के लिए एक साल तक का समय दिया जाता है.
महिला समूहनीरज के मुताबिक़, \"खरौंजा के अलावा ये बैंक अब जल्ला, भैंसापाली, संकरपुर, कुतुबपुर, रिठारी, बेरी और पारा गाँवों में भी चल रहे हैं. इनके खाते में कुल मिलाकर 100 क्विंटल गेहूँ है.\"
खरौंजा स्वयंसेवी महिला समूह की सभी सदस्य दलित हैं जबकि गाँव में 200 मुस्लिम और 150 दलित परिवार रहते हैं.
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