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छत्तीसगढ़ : भ्रष्टाचार उजागर करने वाले युवक को ग्राम पंचायत ने डिफाल्टर घोषित किया

3 वर्ष पहले
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कवर्धा.    सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार उजागर करने वाले युवक को पंचायन ने डिफाल्टर घोषित कर दिया। इसके लिए बकायदा एक प्रस्ताव भी पारित किया गया है। पंचायत का कहना है कि लगातार शिकायत से उनकी छवि खराब हो रही है। यह मामला बोड़ला जनपद के ग्राम पंचायत कांपा का है। ग्राम पंचायत ने कांपा गांव के ही 28 साल के युवक राजाराम साहू को डिफाल्टर घोषित कर दिया। इसके लिए पंचायत के सरपंच, सचिव व 7 पंचों ने मिलकर बाकायदा प्रस्ताव पारित किए।

 

युवक राजाराम की गलती सिर्फ यह थी कि वह गांव में हो रहे सरकारी कामकाज में गड़बड़ी की शिकायत जिला प्रशासन से करता था। युवक ने शौचालय निर्माण में गड़बड़ी की शिकायत की, जो जांच में सही पाई गई। उसने मूलभूत की राशि के खर्च में गड़बड़़ी व पशु शेड निर्माण की भी शिकायत की। पंचायत के प्रतिनिधियों को इन शिकायतों से लगा कि इससे उनकी छवि को नुकसान हो रहा है, इसलिए युवक के खिलाफ ही नियम विरूद्ध प्रस्ताव पारित कर दिया गया। इसी तरह कबीरधाम जिले के लोहारा जनपद के अंतर्गत गांगीबहरा पंचायत में भी अजीब मामला सामने आया था। तब पंचायत की महिला सरपंच ने स्टाम्प पेपर के जरिए अपने सरपंच होने के सारे अधिकार नियम विरूद्ध अपने भतीजे को सौंप दिए थे। इस मामले में सरपंच को कुछ दिनों तक निलंबित रखा गया था, जिसके बाद बहाल किया गया।

 

जानिए, कैसे घोषित होते हैं डिफाल्टर

जिसने किसी लोन देने वाली वित्तीय संस्था से कर्ज लिया हो और बार-बार नोटिस के बाद भी कर्ज न पटा पा रहा हो या कर्ज पटाने में सक्षम ही न हो, उसे संबंधित वित्तीय संस्था डिफाल्टर घोषित करती है। इस प्रक्रिया के बाद किसी भी वित्तीय संस्थान से उसे कर्ज नहीं मिलता।   

 

जांच के बाद कार्रवाई होगी, सिर्फ विकास प्रस्ताव का अधिकार

 

बोड़ला के एसडीएम जीएल यादव ने बताया कि मुझे ऐसी जानकारी मिली है, लेकिन लिखित शिकायत नहीं पहुंची है। वैसे ग्राम विकास को लेकर ही पंचायत के प्रस्ताव किए जाते हैं। यदि इसके विपरीत कुछ किया गया है, तो वह गलत है। शिकायत मिलने के बाद धारा 91 के तहत उसका परीक्षण कराएंगे और आगे की कार्रवाई की जाएगी।

 

कांपा के सरपंच दुरपति साहू ने बताया कि राजाराम साहू बार-बार गांव के काम को लेकर शिकायत करता था। गांव वालों ने मिलकर यह प्रस्ताव पारित किया है। इस दौरान सभी पंच भी मौजूद थे। फर्जी बातें लिखकर भी वह शिकायत करता है।

 

कांपा के सचिव भूखन लाल साहू ने बताया कि ग्रामीणों की मौजूदगी में पंचायत प्रतिनिधियों ने यह प्रस्ताव पारित किया है। मैंने उन्हें नियमों की जानकारी भी दी थी, लेकिन इसके बाद भी इस तरह के प्रस्ताव पारित किए गए।

 

 

एक्सपर्ट व्यू: पंचायत की कार्रवाई अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ

 

सीनियर वकील शेखर बख्शी का कहना है कि यह प्रस्ताव अवैध है। पंचायती राज अधिनियम के तहत ग्राम पंचायत को सिर्फ ग्राम विकास और सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर प्रस्ताव पास करने के अधिकार हैं, न कि किसी व्यक्ति की आलोचना और निंदा का अधिकार। एक तरह से यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की भी अवहेलना है। क्योंकि लोकतंत्र में किसी को भी शिकायत करने का अधिकार प्राप्त है और धारा-40 की भी अवहेलना है। ऐसे में पंचायत के प्रतिनिधि बर्खास्त भी किए जा सकते हैं। अधिनियम की धारा 91 के तहत इस मामले को तत्काल निरस्त करना चाहिए और सचिव पर विभागीय कार्रवाई भी होनी चाहिए।

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