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डाउनलोड करेंबिलासपुर. जिले में फसल बीमा करने वाली कंपनी इफको टोकियो प्राइवेट लिमिटेड ने केवल 10,799 किसानों को ही क्लेम दिया है, जबकि 62 हजार 525 किसनों ने बीमा कराया था। इसके एवज में कंपनी ने 6.60 करोड़ रुपए वसूले थे। पड़ताल में ये भी पता चला है कि दो हजार ऐसे किसान हैं जिन्हें हजार रुपए से कम क्लेम मिला। यानी एक क्विंटल धान के बराबर की रकम भी हाथ नहीं लगी। 523 किसानों को तो सौ रुपए से भी कम मिला। एक से तीन लाख रुपए के बीच क्लेम पाने वाले किसानों की संख्या महज 40 है।
62, 525 किसानों ने कराया था फसल बीमा
पिछले साल की तुलना में कम बारिश होने की वजह से जिले के सभी तहसील सूखा ग्रस्त रहे। नुकसान होने पर भरपाई होने के मकसद से ही 62,525 किसानों ने 92 हजार हेक्टेयर में फसल बीमा कराया। सिंचित खेत में 750 रुपए तो असिंचित में 650 रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से बीमा कंपनी को प्रीमियम की रकम चुकाई गई। राज्य सरकार ने सूखे की घोषणा की और आनावारी रिपोर्ट आने पर किसानों को 47 करोड़ रुपए मुआवजा दिया। लेकिन बीमा कंपनी ने किसानों को बेहद निराश किया है। सबसे पहले तो क्लेम की रकम तय करने में ही देर कर दी। छह माह पहले प्रीमियम लेने, फसल कटाई प्रयोग पूरा होने के बावजूद मई में क्लेम की रकम तय की।
क्लेम की राशि का पता चलने पर मायूस हुए किसान
किसानों के साथ ही कृषि विभाग को किसानों को अच्छा क्लेम मिलने का भरोसा था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हाल ही में क्लेम की रकम घोषित कर उसे बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। क्लेम राशि का पता चलने पर किसान मायूस हो गए हैं। भास्कर ने पूरे जिले के किसानों को दी गई क्लेम रकम की पड़ताल की तो पता चला कि 523 किसानों को सौ रुपए तक क्लेम नहीं मिला है। दो सौ रुपए सै ज्यादा और तीन सौ से कम पाने वाले किसानों की संख्या 272 है।
कंपनी जानबूझकर ऐसा नहीं करती
इफको टोकियो कंपनी के स्टेट मैनेजर वैभव शुक्ला ने बताया कि कंपनी जानबूझकर ऐसा नहीं करती। औसत उत्पादन के आधार पर जो रकम निकलती है, उसी का भुगतान बीमा कंपनी के द्वारा किया जाता है। हम भी इसमें बदलाव चाहते है, तभी तो व राज्य व केंद्र सरकार को पत्र लिखा गया है।
सूखे वाले गांवों में क्लेम नहीं, भड़के किसानों ने किया समिति का घेराव
जिन गांवों में इस बार इतना अकाल पड़ा कि किसान खरीदी केंद्रों में धान नहीं बेच पाए, वहां के किसानों पर भी बीमा कंपनी को तरस नहीं आया। उन्हें कंपनी ने क्लेम नहीं दिया। फसल बीमा कराने वाले किसान अब पछता रहे हैं। ऐसे ही किसानों ने सहकारी समिति चिल्हाटी में जाकर प्रदर्शन भी किया। वैसे तो इस बार पूरे जिले के ही किसानों ने सूखे की मार झेली लेकिन कुछ इलाकों में बारिश अच्छी होने की वजह से किसान खरीदी केंद्रों में धान बेचने पहुंचे। लेकिन पिछले साल की तुलना में इस बार कम धान खरीदा गया। 93 सहकारी समितियों में चिल्हाटी समिति में धान खरीदी की बोहनी नहीं हुई। यानी एक भी किसान वहां धान बेचने नहीं पहुंचा।
इस समिति में दो केंद्र चिल्हाटी व जैतपुरी है। वहां आठ गांव चिल्हाटी, हरदी, कुकुर्दीकेरा, जैतपुरी, सेमराडीह,पतईडीह, मनवा व ज्यादा किसान रजिस्टर्ड है लेकिन एक भी किसान दोनों केंद्रों में नहीं आया। समिति प्रबंधक सोमदत्त शर्मा ने बताया कि 766 ऋणी किसानों का बीमा हुआ था इसके अलावा अऋणी ने भी बीमा कराया। इन गांवों में सूखे का असर रहा। सैकड़ों हेक्टेयर खेत में फसल सूख गई। बीमा का क्लेम नहीं मिलने से किसान निराश व आक्रोशित है। वे समिति में इस बारे में पता करने आए थे। बता दें कि 51 हजार 726 किसानों को एक रुपए भी बीमा नहीं मिला।
| किसान | क्लेम की रकम |
| 523 | 99 रुपए |
| 272 | 101 से 199 रु. |
| 199 | 201 से 296 रु. |
| 376 | 300 से 499 रु. |
| 820 | 500 से 999 रु. |
| 3955 | 1000 से 4,999 रु. |
| 4019 | 5,000 से 29,982 रु. |
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