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गुड्स एंड सर्विस टैक्स: 1.12 करोड़ में से सिर्फ एक लाख कारोबारियों ने टैक्स भरा, जीएसटी की जांच शाखा का दावा

बहुत से कारोबारी फर्जी बिल देकर रिफंड क्लेम कर रहे हैं।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jul 01, 2018, 10:41 AM IST

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    वित्त सचिव का कहना है कि जीएसटी के दूसरे साल सरकार का फोकस सिंगल पेज रिटर्न लागू करने पर है।- सिंबॉलिक

    • दुनियाभर में भारत सबसे ज्यादा टैक्स स्लैब वाला देश: वर्ल्ड बैंक
    • जीएसटी, रेरा से रिएल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट मिला: कैपगेमी की वर्ल्ड वेल्थ रिपोर्ट

    नई दिल्ली. जीएसटी की जांच शाखा ने दो महीने में 2,000 करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी है। जांच में पता चला है कि जीएसटी कलेक्शन का 80% सिर्फ 1 फीसदी (एक लाख) कारोबारियों ने चुकाया है जबकि इसके तहत 1.12 करोड़ बिजनेस रजिस्टर्ड हैं। जीएसटीआई के डीजी जॉन जोसेफ के मुताबिक ये सतर्क करने वाली स्थिति है। उनका कहना है कि छोटे कारोबारी ही नहीं बल्कि मल्टीनेशनल कंपनियां और बड़े कॉरपोरेट भी जीएसटी रिटर्न में गलतियां कर रहे हैं। समझ नहीं आ रहा कि सिस्टम में क्या हो रहा है, ये महत्वपूर्ण मुद्दा है जिस पर अध्ययन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि फर्जीवाड़ा जारी है, गलत बिलों के आधार पर रिफंड क्लेम किए जा रहे हैं।

    वर्ल्ड बैंक के मुताबिक भारत का जीएसटी दुनिया में सबसे जटिल:अपनी छमाही इंडिया डवलपमेंट रिपोर्ट में वर्ल्ड बैंक ने ये बात कही है। उसका कहना है कि भारत में जीएसटी के छह स्लैब 0% 5%, 12%, 18%, 28% और सोने पर 3% हैं, इसकी वजह से यहां का गुड्स एंड सर्विस टैक्स सबसे पेचीदा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनियाभर में भारत में सबसे ज्यादा टैक्स स्लैब हैं। अधिकतम 28% स्लैब एशिया के किसी और देश में नहीं है। चिली के बाद भारत सबसे महंगे टैक्स स्लैब वाला दुनिया का दूसरा देश है।

    रिटर्न फाइलिंग को आसान बनाना दूसरे साल का प्रमुख मुद्दा: वित्त सचिव हसमुख अढिया का कहना है कि सिंगल पेज रिटर्न पर काम किया जा रहा है जो काफी आसान होगा। इसके नए डिजाइन को जीएसटी काउंसिल 4 मई की बैठक में मंजूरी दे चुकी है। इसके दूसरे चरण में नया रिटर्न फाइलिंग सॉफ्टवेयर लाया जाएगा। जीएसटी लागू होने के बाद कारोबारियों को सबसे ज्यादा दिक्कत रिटर्न फाइलिंग में हो रही है। हर महीने उन्हें तीन रिटर्न दाखिल करने पड़ रहे हैं। सिंगल रिटर्न को मंजूरी मिल चुकी है लेकिन लागू होने में 5-6 महीने लग सकते हैं।

    77% सीएफओ मानते हैं कि जीएसटी का कारोबारी माहौल पर सकारात्मक असर पड़ा: ज्यादातर कंपनियों के सीएफओ (चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर) का मानना है कि जीएसटी का देश के कुल कारोबारी माहौल पर सकारात्मक असर हुआ है। ऑडिटिंग फर्म डेलॉय इंडिया के सालाना सीएफओ सर्वे में ये सामने आया है। इसमें 77% सीएफओ ने यह राय जताई है। वहीं, 57% ने कहा कि हाल के रिफॉर्म के कदमों का अगले कुछ साल में फायदा देखने को मिलेगा। इसलिए वो अब ज्यादा कारोबारी जोखिम उठाने को तैयार हैं। सर्वे के मुताबिक 83% सीएफओ ने उम्मीद जताई है कि रेवेन्यू में बढ़ोतरी होगी। 66 फीसदी ने कहा कि इंडस्ट्री में वर्किंग कैपिटल पर नकारात्मक असर हुआ है। देश की सरकारी और प्राइवेट कंपनियों के 250 सीएफओ से सवाल-जवाब के आधार पर ये सर्वे तैयार किया गया।

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    जीएसटी की जांच शाखा के मुताबिक बड़े कारोबारी भी टैक्स रिटर्न में गलतियां कर रहे हैं।- सिंबॉलिक
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    देश के ज्यादातर सीएफओ मानते हैं कि जीएसटी के बाद कारोबारी माहौल में सुधार हुआ है।- सिंबॉलिक
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