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14 जुलाई से शुरू होंगे गुप्त नवरात्र, इन 9 दिनों में होती है महाकाल और महाकाली की पूजा

Dainik Bhaskar

Jul 10, 2018, 11:53 AM IST

एक साल में चार नवरात्र होती है, लेकिन आम लोग केवल दो नवरात्र (चैत्र व शारदीय नवरात्र) के बारे में ही जानते हैं।

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रिलिजन डेस्क. हिंदू धर्म के अनुसार, एक साल में चार नवरात्र होती है, लेकिन आम लोग केवल दो नवरात्र (चैत्र व शारदीय नवरात्र) के बारे में ही जानते हैं। इनके अलावा आषाढ़ तथा माघ मास में भी नवरात्र का पर्व आता है, जिसे गुप्त नवरात्र कहते हैं। इस बार आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्र का प्रारंभ आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा (14 जुलाई, शनिवार) से होगा, जो आषाढ़ शुक्ल नवमी (21 जुलाई, शनिवार) को समाप्त होगी। इसमें महाकाल और महाकाली की पूजा की पूजा की जाती है क्योंकि इस नवरात्र में इनकी पूजा करने का विशेष महत्व माना गया है।

क्यों विशेष है ये नवरात्र?
- आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्र में वामाचार पद्धति से उपासना की जाती है।
- यह समय शाक्त (महाकाली की पूजा करने वाले) एवं शैव ( भगवान शिव की पूजा करने वाले) धर्मावलंबियों के लिए पैशाचिक, वामाचारी क्रियाओं के लिए उपयुक्त होता है।
- इसमें प्रलय एवं संहार के देवता महाकाल एवं महाकाली की पूजा की जाती है।
- इस गुप्त नवरात्र में संहारकर्ता देवी-देवताओं के गणों एवं गणिकाओं अर्थात भूत-प्रेत, पिशाच, बैताल, डाकिनी, शाकिनी, खण्डगी, शूलनी, शववाहनी, शवरूढ़ा आदि की साधना की जाती है।
- ऐसी साधनाएं शाक्त मतानुसार शीघ्र ही सफल होती हैं। दक्षिणी साधना, योगिनी साधना, भैरवी साधना के साथ पंच मकार (मद्य (शराब), मछली, मुद्रा, मैथुन, मांस) की साधना भी इसी नवरात्र में की जाती है।
साल में कब-कब आती है नवरात्र, जानिए
- हिंदू धर्म के अनुसार, एक वर्ष में चार नवरात्र होती है। साल के पहले मास अर्थात चैत्र में पहली नवरात्र होती है। चौथे माह आषाढ़ में दूसरी नवरात्र होती है।
- इसके बाद अश्विन मास में प्रमुख नवरात्र होती है। इसी प्रकार साल के ग्यारहवें महीने अर्थात माघ में भी गुप्त नवरात्र मनाने का उल्लेख एवं विधान देवी भागवत तथा अन्य धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।
- अश्विन मास की नवरात्र सबसे प्रमुख मानी जाती है। इस दौरान गरबों के माध्यम से माता की आराधना की जाती है। दूसरी प्रमुख नवरात्र चैत्र मास की होती है।
- इन दोनों नवरात्रियों को क्रमश: शारदीय व वासंती नवरात्र के नाम से भी जाना जाता है।
- आषाढ़ तथा माघ मास की नवरात्र गुप्त रहती है। इसके बारे में अधिक लोगों को जानकारी नहीं होती। इसलिए इन्हें गुप्त नवरात्र कहते हैं।
- गुप्त नवरात्र विशेष तौर पर गुप्त सिद्धियां पाने का समय है। साधक इन दोनों गुप्त नवरात्र में विशेष साधना करते हैं और चमत्कारी शक्तियां प्राप्त करते हैं।

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