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गुरु पूर्णिमाः सचिन ने रमाकांत आचरेकर के घर जाकर लिया आशीर्वाद, ट्विटर पर साझा किए उनके साथ बिताए पल

रमाकांत आचरेकर को 1990 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है

Dainik Bhaskar

Jul 27, 2018, 06:40 PM IST
बचपन में रमाकांत आचरेकर ने सचिन से कहा था कि दूसरों के लिए ताली बजाने की बजाए अपने क्रिकेट पर ध्यान दो। - फाइल बचपन में रमाकांत आचरेकर ने सचिन से कहा था कि दूसरों के लिए ताली बजाने की बजाए अपने क्रिकेट पर ध्यान दो। - फाइल

  • रमाकांत आचरेकर को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने 7 अप्रैल, 2010 को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया
  • टीम इंडिया के तत्कालीन कोच गैरी कर्स्टन ने 2010 में उन्हें 'लाइफटाइम अचीवमेंट' पुरस्कार से सम्मानित किया


मुंबई. सचिन तेंडुलकर ने शुक्रवार को गुरु पूर्णिमा के दिन अपने पहले क्रिकेट गुरु रमाकांत आचरेकर से मिलकर आशीर्वाद लिया। वे रमाकांत आचरेकर के घर गए और उनके पैर छुए। उनके साथ उनके मित्र और क्रिकेटर अतुल रानाडे भी थे। सचिन ने रमाकांत आचरेकर के साथ बिताए पलों को ट्विटर पर भी साझा किया। उन्होंने लिखा, 'आज गुरु पूर्णिमा है। इस दिन हम उन्हें याद करते हैं, जिन्होंने हमें खुद को बेहतर बनाने का पाठ सिखाया है। आचरेकर सर, मैं आपके बिना यह सब नहीं कर सकता था। कृपया आप भी अपने गुरुओं को भूले नहीं और उनका आशीर्वाद लें। मैंने और अतुल रानाडे ने बिल्कुल अभी ऐसा किया है।'
ट्विटर पर साझा की गई एक तस्वीर में रमाकांत आचरेकर के पैर छूकर सचिन उनका आशीर्वाद ले रहे हैं। दूसरी तस्वीर में रमाकांत आचरेकर के बाएं ओर सचिन तेंडुलकर और दाईं ओर अतुल रानाडे बैठे हैं। हालांकि दोनों तस्वीरें देखने से लग रहा है कि रमाकांत आचरेकर स्वस्थ नहीं है।


गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु पूजा की परंपराः हिंदू कैलेंडर के मुताबिक आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष के आखिरी दिन गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाते हैं। यह पर्व गुरु के प्रति आदर और कृतज्ञता जाहिर करने कि लिए मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान के बराबर का दर्जा दिया गया है। गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान पूज्य माना गया है। इसी दिन महाभारत के रचयिता और चार वेदों के व्‍याख्‍याता महर्षि वेदव्यास का भी जन्म हुआ था। उन्हें पूरी मानव जाति का गुरु माना जाता है, इसलिए इस दिन को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन बहुत से लोग वेदव्यास की भी पूजा करते हैं।

सचिन के मुताबिक, कोच आचरेकर के वे वाक्य मेरे लिए बहुत बड़ा सबक था। उसके बाद उन्होंने अपना कोई भी मैच नहीं छोड़ा। - फाइल सचिन के मुताबिक, कोच आचरेकर के वे वाक्य मेरे लिए बहुत बड़ा सबक था। उसके बाद उन्होंने अपना कोई भी मैच नहीं छोड़ा। - फाइल
इस घटना के बाद ही 1988 में तेंडुलकर और विनोद कांबली ने हैरिस शील्ड सेमीफाइनल में अपने स्कूल शारदाश्रम विद्या मंदिर की ओर से खेलते हुए 664 रनों की साझेदारी की थी। - फाइल इस घटना के बाद ही 1988 में तेंडुलकर और विनोद कांबली ने हैरिस शील्ड सेमीफाइनल में अपने स्कूल शारदाश्रम विद्या मंदिर की ओर से खेलते हुए 664 रनों की साझेदारी की थी। - फाइल
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बचपन में रमाकांत आचरेकर ने सचिन से कहा था कि दूसरों के लिए ताली बजाने की बजाए अपने क्रिकेट पर ध्यान दो। - फाइलबचपन में रमाकांत आचरेकर ने सचिन से कहा था कि दूसरों के लिए ताली बजाने की बजाए अपने क्रिकेट पर ध्यान दो। - फाइल
सचिन के मुताबिक, कोच आचरेकर के वे वाक्य मेरे लिए बहुत बड़ा सबक था। उसके बाद उन्होंने अपना कोई भी मैच नहीं छोड़ा। - फाइलसचिन के मुताबिक, कोच आचरेकर के वे वाक्य मेरे लिए बहुत बड़ा सबक था। उसके बाद उन्होंने अपना कोई भी मैच नहीं छोड़ा। - फाइल
इस घटना के बाद ही 1988 में तेंडुलकर और विनोद कांबली ने हैरिस शील्ड सेमीफाइनल में अपने स्कूल शारदाश्रम विद्या मंदिर की ओर से खेलते हुए 664 रनों की साझेदारी की थी। - फाइलइस घटना के बाद ही 1988 में तेंडुलकर और विनोद कांबली ने हैरिस शील्ड सेमीफाइनल में अपने स्कूल शारदाश्रम विद्या मंदिर की ओर से खेलते हुए 664 रनों की साझेदारी की थी। - फाइल
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