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खरीदार की ईएमआई कम नहीं हुई तो प्रधानमंत्री आवास योजना बेमानी होगी- हर्ष रूंगटा का कॉलम

जिस तरीके से सब्सिडी मिल रही है वह खरीदार के लिए कम फायदेमंद रह जाती है

Bhaskar News | Last Modified - Jul 31, 2018, 07:23 AM IST

खरीदार की ईएमआई कम नहीं हुई तो प्रधानमंत्री आवास योजना बेमानी होगी- हर्ष रूंगटा का कॉलम
बिजनेस डेस्क. हाल ही मेरे एक क्लाइंट के बेटे ने मुंबई के वसई इलाके में 1 बीएचके फ्लैट 25 लाख रुपए में बेचा। खरीदने वाला छोटा बिजनेसमैन था। वह अपनी जेब से 4 लाख दे रहा था, बाकी 21 लाख रुपए वह बैंक से कर्ज ले रहा था। 20 साल का कर्ज 9.25% ब्याज पर था और इसकी ईएमआई करीब 19,000 रुपए बन रही थी। एग्रीमेंट के वक्त उसने बताया कि डाउनपेमेंट की रकम उसकी अब तक की जमा पूंजी थी। अगले कुछ वर्षों तक 19,000 रुपए ईएमआई देने के बाद उसके पास सिर्फ जरूरी चीजों पर ही खर्च करने लायक पैसे बचते। मुझसे परिचय होने के बाद उसने पूछा कि ईएमआई कम करने का कोई तरीका है या नहीं। मैंने उससे पूछा कि क्या वह प्रधानमंत्री आवास योजना के बारे में जानता है, जिसमें 2.35 लाख रुपए तक की सब्सिडी मिलती है। उसने बताया कि वह इस सब्सिडी से परिचित था। बैंक ने उससे कहा था कि सब्सिडी मिलने में करीब एक महीने का वक्त लगेगा। इसके बाद लोन की अवधि करीब 60 महीने कम हो जाएगी। यानी उसका 20 साल का लोन 15 साल का रह जाएगा। उसने बैंक से ईएमआई कम करने का आग्रह किया लेकिन बैंक ने मना कर दिया था। अगर बैंक लोन की अवधि घटाने के बजाय ईएमआई कम करता तो उसे हर महीने 2,000 रुपए कम देने पड़ते। खरीदार ने मुझसे आग्रह किया कि मैं अपने कॉन्टैक्ट का इस्तेमाल करके उसकी ईएमआई घटवा दूं। मैं उस बैंक में कुछ सीनियर अधिकारियों को जानता था इसलिए मैंने कोशिश करने का आश्वासन दिया।
मैंने पहले प्रधानमंत्री आवास योजना की गाइडलाइंस पढ़ीं। इसमें जो लिखा था उसके मुताबिक लोन की अवधि के बजाय ईएमआई कम होनी चाहिए। लेकिन गाइडलाइंस की भाषा ऐसी है कि इसका दूसरा मतलब भी निकाला जा सकता है। यानी ईएमआई के बजाय लोन की अवधि कम होगी। तब मैंने बैंक में अपने परिचित को फोन किया। उन्होंने वही बात कही जो घर खरीदने वाले ने बताई थी। बैंकर ने कहा कि सामान्य तौर पर ईएमआई की जगह लोन की अवधि कम की जाती है। उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर कर्ज लेने वाला आग्रह करता है तब भी बैंक ईएमआई नहीं घटाता है।
इसमें नैतिक रुप से कुछ भी गलत नहीं है। बैंक सरकार से मिल रही सब्सिडी का पूरा फायदा कर्ज लेने वाले को दे रहा है। लेकिन जिस तरीके से सब्सिडी मिल रही है वह खरीदार के लिए कम फायदेमंद रह जाती है। उसे सब्सिडी का लाभ 15 साल बाद मिलेगा, जो उचित नहीं है। सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि इस स्कीम के तहत फायदा ईएमआई में मिले ना कि लोन की अवधि में। ईएमआई घटने से घर खरीदार का मासिक बजट भी कम होगा। इसलिए सरकार को बैंकों को उचित निर्देश देना चाहिए। इस स्कीम के तहत जो कर्ज दिए जा चुके हैं उन्हें भी बदला जाना चाहिए। सरकार के निर्देश के बाद ही बैंक इस पर अमल करेंगे। मध्य वर्ग के लिए यह काफी फायदेमंद होगा। सबसे बड़ी बात यह कि इससे सरकार पर एक रुपए का भी बोझ नहीं बढ़ेगा।

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