10 रुपए के मास्क में डिफेक्ट, कान तक डोरी लाते ही टूट रहे

Jhajjar News - करोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए मास्क पहनना उतना ही जरूरी है, जितना की दूरी मेंटेन करना। जो लोग घरों में...

Mar 27, 2020, 07:45 AM IST
Jhajjar News - haryana news defect in 10 rupees mask breaking the lanyard till the ear

करोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए मास्क पहनना उतना ही जरूरी है, जितना की दूरी मेंटेन करना। जो लोग घरों में हैं उनके लिए तो मास्क की इतनी अधिक आवश्यकता नहीं है। लेकिन जो लोग आवश्यक जरूरी काम से घर से बाहर निकल रहे हैं। उन्हें मास्क पहनना बहुत जरूरी है। शहर में जो यूज एंड थ्रो मास्क उपलब्ध है उन में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट है। लिहाजा 10 रुपए खर्च करने के बाद लोग इनका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे। लोगों में आम शिकायत है कि इनकी इलास्टिक मास्क से अलग हो रही है। जिला प्रशासन लगातार लोगों को मास्क पहनने की हिदायत दे रहे हैं। इतना ही नहीं डीसी जितेंद्र कुमार ने सभी सरकारी विभागों के लिए एक सेंट्रलाइज मास्क की खरीद की व्यवस्था बनाई है और इस मुहिम के तहत जिले में काफी संख्या में मास्क भी मंगवाए गए हैं। डीसी की ओर से बनाई गई यह व्यवस्था केवल सरकारी विभागों के लिए है लेकिन आम लोगों को बाहर केमिस्ट की दुकानों से ही मास्क खरीदने पड़ रहे हैं। इन मास्को में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट है और जैसे ही लोग इनको पहनने का प्रयास करते हैं तब इनकी इलास्टिक टूट जाती है। ऐसे में लोगों की लगातार शिकायत है कि 10 रुपए और इससे अधिक खर्च करने के बाद उन्हें मास्क की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इस मामले में केमिस्ट एसोसिएशन के महासचिव गुलशन का कहना है कि उनके पास फिलहाल मास्क का स्टॉक नहीं है यदि उनके यहां से गए किसी मास्क में इलास्टिक अलग होने की शिकायत है तब वे इसके बारे में संबंधित मैन्यूफैक्चर को अवगत करवा देंगे। लेकिन बाजार में केमिस्ट संचालक मास्क कहां से मंगा रहा है। आम लोग भी मास्क लेकर आ रहे हैं। इसके बारे मैं कुछ नहीं कहा जा सकता। व्यापारी नेता चरण सिंह दलाल ने कहा कि उन्होंने बाजार से थ्री लेयर का मास्क मंगवाया था, लेकिन उसकी गोल इलास्टिक इतनी कमजोर थी कि वह कान की तरफ बढ़ाते ही टूट गई। उन्होंने बताया कि मास्क के कपड़े और इलास्टिक की प्रॉपर तरीके से सिलाई नहीं हुई है। इसी प्रकार से सफाई कर्मचारियों ने भी शिकायत की कि उन्हें जो मास्क उपलब्ध कराए गए हैं उनकी इलास्टिक बार-बार अलग हो रही है।

मास्क कपड़े के तैयार होते हैं और यह सेफ्टी मास्क कहलाता है। हालांकि अब मांग बढ़ने पर इसे आवश्यक वस्तु अधिनियम में शामिल किया गया है। फिलहाल ये ड्रग्स विभाग के कंट्रोल के तहत नहीं है। ड्रग्स विभाग के तहत रॉमसन मास्क थे जो सर्जिकल काम में इस्तेमाल होते थे। इसके बाद यदि मास्क में कोई मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट सामने आ रहा है तब वे इस मामले में ध्यान करेंगे और संभव हुआ तो इसके बारे में संबंधित लोगों को बताया जाएगा।
संदीप हुड्डा, ड्रग्स अधिकारी झज्जर

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