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वैष्णो माता के बालस्वरूप को बाला सुंदरी के नाम से जाना जाता है सिरमौर रियासत के तत्कालीन राजा प्रदीप प्रकाश ने बनवाया था मंदिर

Yamunanagar News - नवरात्र में श्रद्धालुओं की लगती थी ज्यादा भीड़, लाइनों में लगकर करते थे पूजा, अब घर बैठे मां के दर्शन कोरोना...

Mar 27, 2020, 08:27 AM IST
{ नवरात्र में श्रद्धालुओं की लगती थी ज्यादा भीड़, लाइनों में लगकर करते थे पूजा, अब घर बैठे मां के दर्शन

कोरोना वायरस संक्रमण फैलने से बचाने के लिए हिमाचल के त्रिलोकपुर स्थित प्राचीन बाला सुंदरी मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए आगामी आदेशों तक बंद कर दिए गए हैं। इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुअा कि मदिर को दर्शन के लिए बंद किया गया हो। पहली बार नवरात्र में मंदिर में केवल पुजारी ही पूजा कर रहे हैं।

ललिता देवी व त्रिभावनी रूपों के भी दर्शन | वैष्णोंं मां के बालस्वरूप को बाला सुंदरी के नाम से जाना जाता है। उसी मां बालासुंदरी का भव्य मंदिर जिला मुख्यालय से 53 किलोमीटर दूर हिमाचल की शिवालिक पर्वत श्रृंखला में 430 मीटर की ऊंचाई पर त्रिलोकपुर नामक गांंव में स्थित है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर त्रिलोकपुर में भगवती जगदंबा के बालासुंदरी के अलावा ललिता देवी व त्रिभावनी रूपों के भी दर्शन होते हैं।

430 वर्ष पहले नमक कारोबारी को आया था सपना | त्रिलोकपुर गांव में त्रिपुर बाला सुंदरी देवी के विशाल मंदिर के पास ही ध्यानु भगत का मंदिर है। देवीताल, पीपल व मौलसरी के पौराणिक वृक्षों के भी दर्शन होते हैं। मां बाला सुंदरी मंदिर की स्थापना के विषय में मान्यता है कि आज से 430 वर्ष पूर्व इस गांव में रामदास नामक अत्यंत धार्मिक प्रवृति का वैश्य रहता था, जिसने उस समय इस क्षेत्र में नमक की कमी को देखते हुए उत्तर प्रदेश से नमक लाकर यहां बेचने का कारोबार शुरू किया। रामदास को एक बार महसूस हुआ कि वह जितना नमक लाया था, उससे कहीं अधिक बेचने के बाद भी नमक का गोदाम खाली नहीं हो रहा है। उसी रात मां बाला सुंदरी ने उसे सपने में दर्शन देकर बताया कि वे पिंडी रूप में उसके नमक में विराजमान हैं। तुम मंदिर बनाकर पिंडी को स्थापित करो। उसी रात को सिरमौर रियासत के तत्कालीन राजा प्रदीप प्रकाश को भी ऐसा ही सपना आया। मां के आदेश पर राजा ने इसी स्थान पर माता का भव्य मंदिर बनवाकर मां की पिंडी की स्थापना की।

लाला रामदास के वंशज करते हैं आरती | इस मंदिर की स्थापना से लेकर अब तक लाला रामदास के वंशज ही माता की पूजा, आरती एवं रात्री शयनादि का नित्यकर्म करते आ रहे हैं। वर्तमान में यह सेवा लाला ओमप्रकाश व उनके बेटे राजेश कुमार नि:स्वार्थ भाव से यह नित्यकर्म कर रहे हैं।

मेला किया गया स्थगित | मंदिर प्रबंधक गोपाल शर्मा ने बताया कि चैत्र नवरात्रों के अवसर पर आमतौर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु माता बाला सुंदरी के दर्शनों के लिए पहुंचते रहे हैं। इस दौरान यहां मेला भी लगता रहा है। लेकिन इस बार चैत्र नवरात्रों के अवसर पर समस्त देशवासी कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए जूझ रहे हैं। इसलिए श्रद्धालुओं को संक्रमण से बचाने के लिए 16 मार्च से ही मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए हैं। मंदिर के गर्भ गृह में पुजारी द्वारा पूजा व अन्य नित्यकर्म किए जा रहे हैं। मेला भी स्थगित कर दिया गया है।

इसलिए जाना जाता है त्रिलोकपुर के नाम से

शिवालिक की शांंत व प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पहाडि़यों के मध्य स्थित मां बालासुंदरी के इस अनुपम दिव्य स्थल के दर्शन करके प्रत्येक श्रद्धालु के सभी प्रकार के विकार लुप्त हो जाने के अलावा उसका मन शांत एवं आनन्दमय हो जाता है। त्रिलोकपुर के पूर्व में दो मील की दूरी पर ललिता नामक पहाड़ी पर आद्य शक्ति ललिता देवी का हजारों साल पुराना मंदिर है। इस मंदिर के पास ही बाणगंगा नामक प्राकृतिक झरना भी है। त्रिलोकपुर के पश्चिमोतर में लगभग आठ मील की दूरी पर त्रिपुर भैरवी का मंदिर है। ललिता देवी व त्रिपुर भैरवी के मंदिरों में स्थानीय लोग दूध, मक्खन व अनाज आदि का प्रसाद चढ़ाकर अपने अन्न-धन, पशु तथा परिवार को सभी प्रकार की संकट-बाधाओं से रक्षा करने की मन्नत मांगते हैं। इस प्रकार तीन आद्यशक्ति देवियों के इस स्थान पर वास होने के कारण इस जगह को त्रिलोकपुर के सार्थक नाम से जाना जाता है।

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