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लॉकडाउन का गन्ना उद्योग पर भी पड़ा असर किसानों का गन्ना खेतों में हो जाएगा बर्बाद

Yamunanagar News - सरकार गन्ना मिल मालिकों को तो दिन रात गन्ना खरीदने व मिल चलाने की अनुमति दे रही है, लेकिन जिन किसानों के यमुनानगर...

Mar 27, 2020, 07:21 AM IST

सरकार गन्ना मिल मालिकों को तो दिन रात गन्ना खरीदने व मिल चलाने की अनुमति दे रही है, लेकिन जिन किसानों के यमुनानगर सरस्वती शुगर मिल में बांड नहीं है उनका गन्ना बर्बाद होने की आशंका है। पुलिस प्रशासन जबरन किसानों का गन्ना वापस करा रहा है। वहीं क्षेत्र के सैकड़ों केन क्रेशर (गुड़ बनाने की चरखी) को बंद करा दिया गया है, जिससे किसानों की गन्ने की फसल के बर्बाद होने की आशंका पैदा हो गई है।

भारतीय किसान यूनियन के ब्लॉक प्रधान कांशी राम, जसबीर सिंह चौराही, राजबीर सिंह, रणधीर, ललित कुमार व जरनैल का कहना है कि सरकार ने किसान उत्पाद उद्योग, फूड यूनिट व मेडिकल यूनिट को लॉकडाउन में रियायत दे रखी है। यहां तक कि किसान को अपनी फसल व सब्जी मंडी तक ले जाने की भी छूट है, लेकिन स्थानीय पुलिस प्रशासन की ज्यादतियों के चलते क्षेत्र का गन्ना किसान बेबस है। उनका कहना है कि जिन किसानों का सरस्वती शुगर मिल में बांड है उन्हें गन्ना क्रय केंद्र व शुगर मिल में ले जाने की अनुमति है। लेकिन जिन किसानों का मिल में बांड नहीं है वे अपना गन्ना कहां लेकर जाएं? उनका कहना है कि यह किसान के साथ दोहरा व्यवहार है।

40 प्रतिशत से अधिक फसल खड़ी है:

किसानों का कहना है कि मार्च महीने में किसान के गन्ने का अच्छी कीमत मिलती है। इस समय गन्ना पूरी तरह से पक जाता है। किसान राम कुमार, अशोक कुमार, अमरीक सिंह, अरविंद बाली, संजीव कुमार व अन्य का कहना है कि अभी खेतों में 40 प्रतिशत से भी अधिक गन्ना खड़ा है। यदि उसे अब रोका गया तो उसके खराब होने की पूरी आशंका है। उनका कहना है कि गर्मी बढ़ने के साथ गन्ने से बनने वाला गुड़ व शक्कर भी जल्दी खराब हो जाता है। इससे उपभोक्ताओं को भी नुकसान होगा।

रात में क्रशर चलाने की दी जाए अनुमति:

बिलासपुर, साढौरा, छछरौली व रणजीतपुर क्षेत्र में करीब दो सौ लाइसेंस शुदा केन क्रशर व चर्खियां है। इनमें दिन रात गुड़ व शक्कर बनाने का काम चलता है। लॉकडाउन के बाद पूरी गन्ना मंडी में सन्नाटा छाया हुआ है। इससे प्रवासी मजदूरों के सामने भी रोजी रोटी की समस्या आन खड़ी हुई है। चरखी संचालक इकबाल, जिम्मू व अन्य ने मांग की है कि अधिकतर गन्ना क्रशर व चर्खियों में एक सप्ताह से अधिक का गन्ना स्टॉक रहता है। चर्खियां बंद करने के आदेश से किसानों व उनका लाखों का नुकसान होगा। उन्होंने मांग की है कि अन्य फूड यूनिट की तरह केन क्रशर यूनिट को रात के समय चलाने की अनुमति दी जाए। इस संबंध में केन क्रशर संचालक डीसी यमुनानगर से मिलकर समस्या के समाधान की मांग करेंगे।

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