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मंदिरों में विद्वान सुबह-शाम सप्तशती पाठ, जाप से समाज के कल्याण की कर रहे है कामना

Sonipat News - चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन भी लोगों ने घरों में ही श्रद्घा नुसार माता के दूसरे रूप ब्रह्मचारिणी का पूजन किया।...

Mar 27, 2020, 08:36 AM IST
Sonipat News - haryana news the scholars in temples are reciting saptashati morning and evening praying for the welfare of the society by chanting

चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन भी लोगों ने घरों में ही श्रद्घा नुसार माता के दूसरे रूप ब्रह्मचारिणी का पूजन किया। परिवार के सभी सदस्यों ने एकजुट होकर माता का विधि विधान से पूजन कर समाज और राष्ट्र में शांति और सदभाव की कामना की। वहीं मंदिरों में पुजारियों ने माता की प्रतिमा के समक्ष दुर्गा सप्तशती का पाठ और गायत्री मंत्र सहित माता के विभिन्न मंत्रों से मंदिर परिसर में पूजन किया। विद्वानों द्वारा समाज में फैले डर को लेकर लगातार हवन में आहुति डाली जा रही है। हवन और यज्ञ से मान्यता है कि वातावरण में व्याप्त कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। वायुमंडल शुद्ध और साफ हो जाता है। वहीं घरों में लगातार गूगल और धूप व कपूर जलाने से भी वायुमंडल में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा है। इससे देश में सकारात्मक परिणाम आने की पूरी संभावना है। इन दिनों किया जाने वाला पूजा पाठ पूरी श्रद्घा के अनुसार किया जा रहा है। विद्वानों का मानना कि इसके सकारात्मक परिणाम देश में अतिशीघ्र आने शुरू होंगे। जिसका फायदा देश के अमीर व गरीब को बराबर रूप से मिलेगा।

कोरोना संकट के बीच चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन गुरुवार को भक्तों ने मां दुर्गा के दूसरे स्‍वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की। वहीं पुजारियों ने मंदिरों में पूजन किया और कोरोना को खत्म करने के लिए यज्ञ किया। ब्रह्मचारिणी नाम ब्रह्म से बना है। ‘’’’’’’’ब्रह्म’’’’’’’’ शब्द का अर्थ तपस्या और ‘चारिणी’ का मतलब होता आचरण होता है। मान्यता है कि माता के इस स्वरूप की जो विधि विधान से पूजन करता है, उस सांसारिक बीमारियां और प्रलोभन कार्य नहीं करता है।

इस तरह से किया गया पूजन


पंडित रामकृष्ण पाठक ने बताया कि सुबह पूजा स्थल की सफाई के बाद प्रतिमा को गंगाजल से साफ किया। इसके बाद गंगाजल से साफ कर लोटे में एक रुपये और सुपारी डालकर आम के पत्ते लगाकर पूजा स्थल पर रखा। घर में रखे घी और तेल से दीपक जलाकर और विधि विधान के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ किया। साथ ही मंगल कामना की। शाम के वक्त भी ज्‍योत जलाकर मां दुर्गा की आरती की। इसके अलावा मंदिरों में भी पंडितों ने मां दुर्गा का पूजन कर हवन किया। इस तरह की विधि सामान्य रूप से घरों में सभी लोग अपना सकते हैं।


आस्था के साथ जरूरी है जागरूकता

कोरोना संक्रमण के चलते इन दिनों मंदिरों के कपाट बंद हैं, ऐसे में खुद और दूसरों को जागरूक कर रहे श्रद्धालु घर पर ही पूजा कर रहे हैं। मॉडल टाउन निवासी डाॅ. रितुबाला ने कहा कि हर भारतीय में देवी देवताओं के प्रति अगाध आस्था है। लेकिन सुरक्षित तरीके से ही पूजा की जानी चाहिए। जिसमें दूसरे व्यक्ति से उचित दूरी बहुत ही आवश्यक है। इसके लिए वह घर में ही पूजा पाठ कर रही हैं। इसके अलावा नौ दिन के व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं घर में स्वयं ही व्रत का प्रसाद बना रहे हैं। ताकि संक्रमण जैसी कोई चीज घर के अंदर नहीं आए।


कोरोना वायरस }आस्था पर भारी पड़ रहा डर, श्रद्धालु घरों में कर रहे पूजन

और कोरोना को खत्म करने के लिए यज्ञ किया। ब्रह्मचारिणी नाम ब्रह्म से बना है। ‘’’’’’’’ब्रह्म’’’’’’’’ शब्द का अर्थ तपस्या और ‘चारिणी’ का मतलब होता आचरण होता है। मान्यता है कि माता के इस स्वरूप की जो विधि विधान से पूजन करता है, उस सांसारिक बीमारियां और प्रलोभन कार्य नहीं करता है।

सोनीपत. मॉडल टाउन स्थित श्री नवदुर्गा शक्ति सिद्धपीठ में माता ब्रह्मचारिणी का पूजन करते हुए।

शहर के मंदिरों में प्रवेश वर्जित : शहर के माता चिट्टाने वाली मंदिर में हर साल की तरह इस साल भी सभी रस्मे निभाई जा रही हैं। लेकिन इस बार श्रद्घालुओं का प्रवेश वर्जित कर दिया गया है। वहीं मॉडल टाउन स्थित नवदुर्गा शक्ति सिद्घ पीठ मंदिर में भी विद्वानों द्वारा पूजा हवन सुबह-शाम किया जा रहा है। इसके अलावा भी मंदिरों में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर बैन है।

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