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डाउनलोड करेंसोनीपत. 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स के 10वें दिन भारत के 25 गोल्ड, 16 सिल्वर व 18 ब्रॉन्ज मेडल हो गए। इनमें 9 गोल्ड, 6 सिल्वर व 7 कांस्य हरियाणा के खिलाड़ियों के नाम रहे। यानी भारत को अब तक मिले कुल 59 मेडल में 37.28% हरियाणा के खिलाड़ियों के हैं। भारत के 218 सदस्यीय दल में प्रदेश के 32 खिलाड़ी गए थे। यानी भारतीय दल में हरियाणा का प्रतिनिधित्व 14.67 फीसदी रहा। यही नहीं, व्यक्तिगत इवेंट में महिला मुक्केबाज पिंकी रानी को छोड़कर बाकी सभी खिलाड़ी कोई न कोई मेडल लेकर आ रहे हैं। 2 खिलाड़ी पुरुष हॉकी और 7 खिलाड़ी महिला हॉकी की टीम में खेले। हॉकी में दोनों टीमें मेडल नहीं जीत पाईं। ये चौथे स्थान पर रहीं।
ग्लास्गो गेम्स के मुकाबले 2 मेडल ज्यादा
देश की आबादी में हरियाणा की हिस्सेदारी 2.09 प्रतिशत है, जबकि सिर्फ हरियाणा के खिलाड़ियों द्वारा जीते मेडल्स की बात करें तो यह आंकड़ा नाइजीरिया के 9 स्वर्ण सहित 23 पदक से सिर्फ एक कम है। नाइजीरिया मेडल टेली में 9वें स्थान पर है। 2014 के ग्लास्गो गेम्स में भारत ने 15 गोल्ड समेत 64 पदक जीते थे। इनमें 5 गोल्ड समेत 20 मेडल हरियाणा के खिलाड़ियों के थे। यानी हमारे खिलाड़ियों ने पिछली बार के मुकाबले इस बार दो मेडल ज्यादा जीते हैं। जबकि गोल्ड मेडल पिछली बार से 4 ज्यादा है।
अनीश भनवाला: मूलरूप से सोनीपत के कासंडी गांव के वफिलहाल करनाल में रह रह अनीश ने 15 साल की उम्र में शूटिंग में देश को गोल्ड मेडल दिलाया। वे कॉमनवेल्थ में गोल्ड जीतनेवाले सबसे कम उम्र के भारतीय हैं।
मनु भाकर : झज्जर की 16 वर्षीय शूटर मनु भाकर न कॉमनवेल्थ में भी जलवा दिखाया। सबसे कम उम्र में गोल्ड जीतनेवाली भारतीय महिला बनीं।
सुमित मलिक: झज्जर के रहनेवाल सुमित मलिक ने कुश्ती में पिछली बार के चैंपियन को हरा गोल्ड जीता।
दीपक लाठर: जींद के दीपक राष्ट्रमंडल खलों में देशों के लिए पदक जीतनेवाले सबसे युवा वेटलिफ्टिर बन गए हैं।
नीरज चोपड़ा ने पहली बार जेवेलिन थ्रो में देश को गोल्ड दिलाया
नीरज चोपड़ा: पानीपत के गांव खंदरा निवासी 20 वर्षीय नीरज चोपड़ा ने जेवेलिन थ्रो में देश को पहली बार गोल्ड मेडल दिलाया। जेवेलिन थ्रो के लिए नीरज में इतना क्रेज था कि छठी कक्षा के बाद नियमित पढ़ाई तक छोड़ दी। केवल खेल पर ध्यान दिया और अब ओपन बोर्ड से पढ़ाई करते आ रहे हैं। नीरज हाल में बीए ओपन से कर रहे हैं।
10 साल की उम्र में विनेश के सिर से उठ गया पिता का साया
चरखी दादरी: 25 अगस्त 1994 में बलाली निवासी राजपाल फौगाट व प्रेमलता के घर जन्मी बेटी विनेश फौगाट जब मात्र 10 साल की थी तभी 2004 में उनके पिता राजपाल का देहांत हो गया था। विनेश ने अपने ताऊ महाबीर की बेटी गीता-बबीता को देख विनेश ने भी अखाड़े में जोर आजमाईश करना शुरू किया, अब गोल्ड जीता है।
संजीव राजपूत ने छोड़ी साई में कोच की नौकरी
यमुनानगर: 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशंस में गोल्ड जीतनेवाले संजीव राजपूत के परिवार की आर्थिक हालत कमजोर थी। वर्ष 1998 में नेवी में सिलेक्शन हो गया। स्कूल समय में खेलों में कोई रुचि नहीं थी। उड़ीसा में नेवी कैंप में जाने का मौका मिला। वहां शूटिंग रेज में नेवी कर्मी प्रेक्टिस करते देखे। हाथ आजमाया तो निशाना स्टीक लगा। यहीं से रुचि बढ़ी।
विकास कृष्णन 11 वर्ष की उम्र में उतर गया था रिंग में
भिवानी: 11 साल की उम्र में विकास कृष्णन बॉक्सिंग रिंग में उतर गया था। दादा रणजीत सिंह ने बताया कि कोच श्रीभगवान के मार्गदर्शन में कुश्ती शुरू की। बॉक्सिंग की ऐसी लगन लगी कि जीत-हार की परवाह किए खेल को जीवन का हिस्सा बना लिया। हालांकि विकास के घर की आर्थिक स्थिति ठीक थी, जिससे उसेदिक्कत नहीं आई।
गौरव ने बड़ी बहन को देख शुरू की थी बॉक्सिंग
फरीदाबाद: गौरव की बहन नीलम ने भी नेशनल बाक्सिंग प्रतियोगिता में मेडल जीते हैं। शुरुआत में गौरव अपनी बड़ी बहन के मुकाबलों को देखता था। धीरे-धीरे उसे बाक्सिंग का शौक चढ़k। वर्ष 2011 में गौरव ने पहलेजिला स्तर बाक्सिंग में भाग लिया। इसके बाद स्टेट लेवल पर गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद गौरव का चयन आर्मी में हो गया।
शरीर में कमजोर देख पिता ने बॉक्सिंग से रोका था
रोहतक: सिल्वर मेडल विजेता अमित पंघाल रोहतक के मायना गांव के रहने वाले हैं। पिता विजेंद्र ने बताया कि वर्ष 2006 में अमित करीब 10 साल का था। शरीर से कमजोर होने की वजह से मैं उसे बाक्सिंग खेलने से मना करता था। बड़ा भाई अजय कोच अनिल धनखड़ के पास प्रैक्टिस करने के लिए जाता था। तो वह भी उसे साथ ले जाने लगा।
ये रहा खास
- इस बार कुश्ती में 12 भारवर्ग में हिस्सा लिया। हर वर्ग में मेडल जीता। 5 भार वर्ग में गोल्ड मेडल पर कब्जा।
- हरियाणा ने शूटिंग व कुश्ती में 3-3, बॉक्सिंग में 2 और एथलेटिक्स में 1 गोल्ड जीता।
शूटिंग में ग्लास्गो से ज्यादा गोल्ड
शूटिंग में भारत नेपिछले कॉमनवेल्थ के मुकाबले 1 मेडल कम जीता है। 2014 ग्लास्गो में 4 गोल्ड, 9 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज समेत कुल 17 मेडल जीते थे। हालांकि, 2014 में 4 गोल्ड जीते थे, इस बार 7 गोल्ड जीते हैं।
..तो ज्यादा होती मेडल संख्या
इस बार कुश्ती में ग्रीको रोमन शामिल नहीं है। अन्यथा मेडल ज्यादा होते। वहीं, एथलीट सिद्धार्थ यादव एथलेटिक्स संघ की लापरवाही के कारण गोल्ड कोस्ट नहीं जा सके।
हमारे इन खिलाड़ियों ने दिखाया पूरा दम
स्वर्ण पदक 9
| खिलाड़ी | जिला | गेम्स |
| बजरंग पूनिया | झज्जर | कुश्ती |
| मनु भाकर | झज्जर | शूटिंग |
| संजीव राजपूत | यमुनानगर | शूटिंग |
| सुमित मलिक | झज्जर | कुश्ती |
| विनेश फौगाट | चरखी दादरी | कुश्ती |
| गौरव सोलंकी | फरीदाबाद | बॉक्सिंग |
| नीरज चोपड़ा | पानीपत | एथलेटिक्स |
| अनीश | करनाल | शूटिंग |
| विकास कृष्णन |
भिवानी | बॉक्सिंग |
रजत पदक 6
| खिलाड़ी | जिला | गेम्स |
| मौसम खत्री | सोनीपत | कुश्ती |
| पूजा ढांडा | हिसार | कुश्ती |
| बबीता कुमारी | चरखी दादरी | कुश्ती |
| सीमा आंतिल | सोनीपत | एथलेटिक्स |
| अमित पंघाल | रोहतक | बॉक्सिंग |
| मनीष कौशिक | रोहतक | बॉक्सिंग |
कांस्य पदक 7
| खिलाड़ी | जिला | गेम्स |
| सोमवीर | रोहतक | कुश्ती |
| साक्षी मलिक | रोहतक | कुश्ती |
| किरण गोदारा | हिसार | कुश्ती |
| अंकुर मित्तल | पानीपत | शूटिंग |
| मनोज कुमार | कैथल | बॉक्सिंग |
| नमन तंवर | भिवानी | बॉक्सिंग |
| दीपक लाठर | जींद | वेटलिफ्टि |
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