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कहीं किसान के बच्चे ने किया टॉप तो कहीं बिना कोचिंग के बन गए टॉपर, ऐसी है टॉपर और उनकी सफलता की कहानी

3 वर्ष पहले
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पानीपत।  हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने 12वीं कक्षा का परिणाम घोषित कर दिया है। प्रदेश के 16 जिलाें में बेटियाें ने 70 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर बादशाहत कायम रखी है। जबकि लड़कों का पास प्रतिशत किसी जिले में 70% तक नहीं पहुंच पाया। 4 जिलाें में तो लड़के 50 से भी कम पास हुए। वहीं, लड़कियों का रिजल्ट किसी भी जिले में 55% से कम नहीं रहा।

 

 

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 12वीं कक्षा में हिसार की हीना और नवीन ने टॉप किया है। इन्हें 500 में से 491 अंक प्राप्त हुए हैं। जींद के गुरमीत 489 अंकों के साथ सेकंड और निशु 488 अंक के साथ थर्ड आई है। ओवरऑल रिजल्ट 63.84% रहा, जो पिछली बार से 0.66% कम है। बेटियां ने इस बार भी लड़कों को बड़े अंतर से पछाड़ा। 72.38% बेटियों की तुलना में 57.10% बेटे पास हुए। यानी लड़कों से 15.28% ज्यादा लड़कियां पास हुईं। आर्ट्स, कॉमर्स और विज्ञान संकायों की टॉप-3 रैंकिंग में 7 बेटियां और 7 बेटे हैं। प्रदेश के 16 जिलाें  में बेटियाें ने 70 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर  बादशाहत कायम रखी है। जबकि लड़कों का पास प्रतिशत किसी जिले में 70% तक नहीं पहुंच पाया। 4 जिलाें  में तो लड़के 50 से भी कम पास हुए। वहीं, लड़कियों का रिजल्ट किसी भी जिले में 55% से कम नहीं रहा। रेवाड़ी में सर्वाधिक 78.83% बेटियां और 67.35% बेटे पास हुए। सरकारी स्कूलों का रिजल्ट पिछले साल के मुकाबले 2.17% गिरा है। बोर्ड अध्यक्ष डॉ. जगबीर सिंह एवं बोर्ड सचिव धीरेन्द्र खड़गटा ने यह जानकारी दी। कुल 2,22,388 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। 1,41,973 पास हुए। 49,163 की कम्पार्टमेंट है। 31,252 फेल हो गए। वहीं, 1,24,242 लड़कों में से 70,936 पास हुए। 98,146 लड़कियों में 71,037 पास हुईं। वहीं, स्वयंपाठी परीक्षार्थियों का परिणाम 47.44% रहा। 19,076 में से 9,049 पास हुए। 

 

फिसड्डी से रैंकिंग सुधार के लिए किए गए थे विशेष प्रयास
वर्ष 2017 में अंतिम पायदान पर रहने पर सभी शिक्षकों से शपथ पत्र लिया गया था। इसमें शिक्षकों ने शिक्षा विभाग को विश्वास दिलाया था कि अगले साल बारहवीं बोर्ड का रिजल्ट बेहतर होगा। हर सप्ताह शिक्षकों से बोर्ड परीक्षा की तैयारियों की रिपोर्ट मांगी गई। जिला शिक्षा अधिकारी बताते हैं कि किस स्टूडेंट्स में कितना सुधार हुआ। पूरे साल स्टूडेंट और शिक्षकों के काम की मॉनिटरिंग की गई। खराब प्रदर्शन करने वाले सरकारी स्कूलों को एक्सट्रा क्लास लगाने का आदेश दिया गया था। बोर्ड परीक्षा से छह माह पहले स्कूलों ने क्लास शुरू कर दी थी। सबसे अधिक ध्यान गणित और विज्ञान विषय पर दिया गया। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने खुद स्कूलों में चल रही एक्सट्रा क्लास का निरीक्षण किया।

 

सुबह जल्दी उठकर स्टडी करना, 6 घंटे की सेल्फ स्टडी

नवीन ने बताया कि वह एमबीबीएस डॉक्टर बनना चाहता है। नवीन के पिता रणसिंह भी अारएमपी डाॅक्टर है। वो कालोनी में ही प्रैक्टिस करते है। नवीन की मां रोशनी देवी सामान्य गृहिणी है। नवीन के पिता रणसिंह ने बताया कि हम नवीन पर किसी प्रकार का दबाव नहीं डालते। वो राेजाना 5 से 6 घंटे घर पर स्टडी करता था। सुबह जल्दी उठकर स्टडी करना उसकी आदत बनी हुई थी। हिना ने बताया कि वह कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करना चाहती है।

 

अध्यापकों के बताए दो टिप्स पर तैयारी की, मिली सफलता

मेहनत कभी बेकार नहीं जाती है, यदि लक्ष्य निर्धारित करके पढ़ा जाए तो सफलता मिलती है। ऐसा ही कुछ कहना है नॉन मेडिकल स्ट्रीम में प्रदेशभर में दूसरा स्थान प्राप्त करने वाली स्वीटी का। ग्रामीण आंचल में स्थित गैलेक्सी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ने वाली स्याणा गांव निवासी स्वीटी बताती है कि उसने अध्यापकों के बताए हुए दो टिप्स पर परीक्षा की तैयारी की। इनमें पहला टिप्स था क्लास रूम में अध्यापक जो पढ़ाए, उसे हम घर जाकर पढ़ें। दूसरी टिप्स में उन्हें बताया गया था कि जो संदेह   हो उन्हें स्कूल में आकर अध्यापकों से समझे।

 

किसान का बेटा बोला- गूगल है सफलता का राज 

महम के भैणी महाराजपुर गांव के साहिल ने साइंस में 487 अंक प्राप्त कर प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। साहिल ने मेडिकल संकाय में परीक्षा पास की है। वह भैणी महाराजपुर के बाबा उदल देव सीनियर सेकंडरी स्कूल का छात्र है। पिता राजेंद्र किसान है और माता सुमन गृहिणी है। साहिल ने बताया कि उसने परीक्षा के दौरान किसी से ट्यूशन नहीं ली है। उसने मोबाइल पर गूगल से सिलेबस से संबंधित जानकारी जुटाई और एनसीईआरटी की किताबों से तैयारी की है। स्कूल से अाने के बाद रोजाना 4 घंटे पढ़ाई की। 

 

10वीं का िजला टॉपर, रोजाना 3 से 4 घंटे तक पढ़ाई की

कॉमर्स में फतेहाबाद के लविश पोपली   ने 500 में से 482 अंक लेकर स्टेट में टॉप किया है। लविश इससे पहले 10वीं के परीक्षा परिणाम में जिले का टॉपर रह चुका है। लविश के बिजनेस व अकाउंट विषय में 100-100 अंक आए हैं। उसका उद्देश्य दिल्ली के श्रीराम कॉमर्स कालेज में एडमिशन लेने के बाद आईआईएम से मैनेजमेंट विषय से एमबीए कोर्स करना है। उसने बताया कि अच्छे अंकों के लिए रोजाना वह 3 से 4 घंटे तक पढ़ाई करता था। लविश के पिता रेडीमेट गारमेंट का काम करते हैं।

 

फोन से दूर, न वाट्सएप और न फेसबुक अकाउंट

डबवाली  के कॉमर्स छात्र जसविंदर सिंह 483 अंकों के साथ कॉमर्स संकाय में प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहा। जसविंदर ने बताया कि पढ़ाई से ही कामयाबी का लक्ष्य तय किया। जरूरतमंद परिवार से होने के चलते कुछ दिन सरकारी स्कूल में पढ़ाई की, माहौल ठीक नहीं मिलने से नवप्रगति स्कूल में एडमिशन लिया। स्कूल संचालक वेदप्रकाश भारती ने उसे कॉमर्स में पढ़ाई के अच्छे अंक पाने के लिए छठे अतिरिक्त विषय के तौर पर पंजाबी रखने का मार्गदर्शन किया। जो उसके टॉपर बनने में अहम साबित हुई।

 

घर से स्कूल दूर था, रात को दो घंटे घर पर पढ़ती थी

अटाली गांव के किसान जितेंद्र की बेटी अदिति ने बिना कोचिंग के ही स्टेट में तीसरा स्थान है। अदिति संजय कालोनी के मावी माडर्न स्कूल में पढ़ती हैं। घर से स्कूल की दूरी अधिक होने से अदिति पिछले दो माह से अपने मामा के यहां रहकर पढ़ाई कर रही थीं। अदिति ने 500 में से 482 अंक हासिल किए हैं।  अदिति ने बताया कि उन्होंने परीक्षा के दौरान बिना किसी तनाव के सामान्य ढंग से पढ़ाई की। स्कूल से एक्सट्रा क्लास खत्म होने के बाद घर पर रात को दो घंटे पढ़ाई करती थीं। परीक्षा की तैयारी के लिए उन्होंने कोई कोचिंग नहीं ली।