पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंज़ुबैर अहमद
बीबीसी संवाददाता
इस साल मई में अमरीका में भारतीय मूल के दो बच्चों ने अंग्रेजी स्पेलिंग की \'नेशनल स्पेलिंग बी\' नामी प्रतियोगिता जीती तो सोशल मीडिया पर गोरी नस्ल के कुछ लोगों ने नफ़रत भरे ट्वीट और पोस्ट लिखे.
भारतीय मूल के अमरीकियों को बुरा लगा. कुछ ने कहा कि इस तरह की प्रतिक्रिया से उनके ख़िलाफ़ अमरीकियों में नफ़रत फैल सकती है.
भारत में इन दिनों ‘हेट स्पीच’ पर चर्चा गर्म है. क्या इससे नफ़रत फैलने का ख़तरा है?
बीजेपी के सांसद आदित्यनाथ ने सात सितंबर को नोएडा में भड़काऊ भाषण दिया था जिसके कारण चुनाव आयोग ने उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज करने को कहा है.
उन्होंने कहा था \'जहाँ मुसलमानों की आबादी अधिक होती है वहां दंगे भी ज़्यादा होते हैं\'.
क़ानून का उल्लंघनमुक़दमे दर्ज होते हैं, गिरफ़्तारी होती है और बाद में सालों मुक़दमा चलता रहता है.
ऐसा संभव है कि योगी आदित्यनाथ अपना बचाव कर लें लेकिन सवाल ये है कि ऐसे भाषणों का असर कहां और कितना होता है. इसके लिए हमें इतिहास के कुछ ही पन्नों को पलटने की ज़रूरत है.
बीजेपी की पहचान बने लालकृष्ण आडवाणी और उमा भारती के भड़काऊ भाषणों को हमारी पीढ़ी नहीं भूल सकती.
सीडीबाबरी मस्जिद गिरने से पहले बिहार और उत्तर प्रदेश में ओबैदुल्लाह नाम के एक मौलाना अचानक से सुर्ख़ियों में आए और फिर ग़ायब हो गए.
मुस्लिम समाज के एक तबके में उनकी लोकप्रियता का कारण था हिंदुओं के ख़िलाफ़ घृणा फैलाने वाले भाषणों से भरी एक सीडी.
इस सीडी ने एक गुमनाम अनपढ़ मौलाना को कुछ समय के लिए मशहूर बना दिया था.
हाल में तेलंगाना विधानसभा के सदस्य और ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तिहाद अल मुसलमीन के एक नेता अकबरुद्दीन ओवैसी को हिंदू समाज, धर्म और देवी देवताओं के ख़िलाफ़ भड़काऊ भाषण देते रहने के इल्ज़ाम में गिरफ़्तार किया गया था.
दो साल पहले उन्होंने कथित रूप से कहा था कि अगर पुलिस केवल 15 मिनट के लिए अलग हो जाए तो 25 करोड़ भारतीय मुसलमान एक अरब हिंदुओं कर मुक़ाबला कर लेंगे.
कुछ हफ़्ते बाद उन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया गया. उनके ख़िलाफ़ अदालत में मुक़दमा चल रहा है.
हिटलरअगर देश के बाहर जाएँ तो अडोल्फ़ हिटलर का उदाहरण सबसे पहले दिया जा सकता है. हिटलर ने भी लव जिहाद के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी.
अपनी पुस्तक मीन कैंफ में एक जगह वह कहते हैं, \"काले बालों वाला यहूदी युवा गंदी नज़रों से ताकते हुए मासूम लड़की का घंटों इंतज़ार करता है ताकि वो उसे लुभा सके. उसके खून को नापाक कर सके और उसे अपनी क़ौम से अलग कर सके\".
इसके पीछे यहूदियों के ख़िलाफ़ जो नफरत छिपी थी उसका नतीजा दुनिया ने बाद में खूब देखा.
भारत में नफरत दोनों तरफ से है. आप ट्विटर और फेसबुक पर दोनों तरफ के जिहादियों के बीच महायुद्ध रोज़ देखते होंगे.
अंग्रेजी उपन्यासकार ई एम फोस्टर ने 1924 में प्रकाशित अपने उपन्यास \'अ पैसेज टू इंडिया\' में रामनवमी और मुहर्रम के समय अखाड़ों को एक दूसरे के मोहल्लों से गुज़ारने की ज़िद पर हुए दंगों का जो ज़िक्र किया है वो नफरत आज भी मौजूद है.
फ़ायदाइसका फ़ायदा नेता और सियासी पार्टियां उठाती आई हैं.
इंदिरा गांधी की अपने सिख सुरक्षाकर्मियों की गोलियों से हुई हत्या के बाद कुछ कांग्रेसी नेताओं ने सिखों के ख़िलाफ़ जो नफ़रत फैलाई उससे चुनाव प्रभावित हुए.
और शायद यही वजह है कि उत्तर प्रदेश में पहले अमित शाह और अब आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ इल्ज़ाम लगे हैं कि उन्होंने चुनाव और उपचुनाव में जीत के लिए नफ़रत भरे बयान दिए.
(बीबीसी हिंदी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.