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वार्षिक परीक्षा के पेपर में हैडर अर्द्धवार्षिक का, परीक्षा की वैधानिकता ही कठघरे में

3 वर्ष पहले
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जयपुर. राज्य में शिक्षा को ऊंचे स्तर तक ले जाने के तमाम दावों के बीच सोमवार को संस्कृत शिक्षा में विभाग ने ही बच्चों की परीक्षा का मखौल उड़ा दिया। विभाग ने बच्चों को कक्षा 9 की अंग्रेजी का ऐसा पेपर दे दिया जिसका हैडर ही अर्द्धवार्षिक परीक्षा का था। प्रदेशभर में करीब 10 हजार से ज्यादा बच्चों ने यह परीक्षा दी है। वार्षिक परीक्षा के पेपर में अर्द्धवार्षिक का हैडर छपा होने से परीक्षा की वैधानिकता ही सवालों के घेरे में आ गई है। संस्कृत शिक्षा का यह पेपर सोमवार को प्रदेशभर में एकसाथ हुआ। ज्यादातर सेंटरों को इसकी भनक तब लगी जब बच्चे पेपर हल करने लग गए।

 

कई सेंटरों ने विभाग में ऊपर तक इस मामले को पहुंचाया, लेकिन कुछ नहीं हो पाया। कुछ ऐसे सेंटर भी रहे जिन्होंने इस बड़ी चूक को छुपाने के लिए बच्चों को दिए गए पेपर में ‘हाफ ईयरली एग्जामिनेशन 2017-18” के हैडर में “हाफ” शब्द पर बच्चों से क्रॉस लगवा दिया गया। परीक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि वार्षिक परीक्षा के पेपर में जब अर्द्धवार्षिक छपा है तो आखिर इसे वार्षिक का पेपर कैसे माना जा सकता है? इससे तो परीक्षा की वैधानिकता ही सवालों के कठघरे में आ गई है।


 हां, यह चूक है। गलती किस स्तर पर हुई है इसके लिए जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है। वैसे प्रश्न-पत्र की पूरी जांच-पड़ताल कर ली गई है। यह वार्षिक परीक्षा के लिए ही तैयार किया गया है।
- कमल चाेटिया, अध्यक्ष, समान परीक्षा योजना


 इस पेपर के आधार पर पूरी परीक्षा की वैधानिकता ही संकट में आ सकती है। जो भी दोषी हैं, उन्हें तुरंत प्रभाव से बर्खास्त होना चाहिए।
-वीरेंद्र बहादुर सिंह, प्रदेशाध्यक्ष, संस्कृत शिक्षा विभागीय शिक्षक संघ

 

 

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