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एक्सपर्ट इंटरव्यू: डायरिया, फूड पॉइजनिंग, अपच के मामले बारिश में सबसे ज्यादा, गर्म भोजन और सूप लें, नॉनवेज खाने से बचें

बारिश में शहद, जीरा, अदरक और लहसुन का प्रयोग करें ये संक्रमण का खतरा घटाते हैं।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Jul 09, 2018, 04:23 PM IST

एक्सपर्ट इंटरव्यू: डायरिया, फूड पॉइजनिंग, अपच के मामले बारिश में सबसे ज्यादा, गर्म भोजन और सूप लें, नॉनवेज खाने से बचें

हेल्थ डेस्क.मानसून आ चुका है। गर्मी से राहत मिलने के साथ इम्यून सिस्टम और पाचन तंत्र में बदलाव होता है। इस मौसम में अपच, फूड पॉइजनिंग, डायरिया जैसी समस्याएं होना आम है। इसका सबसे बड़ा कारण इस मौसम बाहर के चाट, पकौड़े, समोसे का अधिक खाना है। अगर खाना ही चाहते हैं तो इसे कम मात्रा में लें और घर पर ही तैयार कराएं ताकि इंफेक्शन की आशंका न रहे।एकेडमी फैमिली फिजीशियन आॅफ इंडिया के प्रेसीडेंट डॉ. रमन कुमारसे जानते हैं बारिश में कैसे करें बीमारियों से बचाव...

सवाल: बारिश में आमतौर पर किस तरह की दिक्कतें हो सकती हैं?
जवाब:
बारिश में इंफेक्शन के कारण ज्यादातर समस्याएं होती हैं। थोड़ी सी सावधानी बरतकर इसे रोका जा सकता है। जैसे...
पाचन तंत्र धीमा हो जाना : मनसून में जठराग्नि मंद पड़ जाती है, जिससे पाचन प्रक्रिया प्रभावित होती है। बरसात के पानी और कीचड़ से बचने के लिए लोग घरों में रहते हैं जिससे शारीरिक सक्रियता कम हो जाती है। ये डायजेस्टिव सिस्टम पर निगेटिव असर डालती है। बारिश के कारण अगर टहलने नहीं जा पा रहे हैं या जिम जाने में परेशानी में है तो घर पर ही वर्कआऊट करें।

अपच की समस्या : बारिश में डायजेस्टिव एंजाम्स की कार्यप्रणाली भी प्रभावित होती है इससे भी खाना ठीक से नहीं पच पता। बरसात में तैलीय, मसालेदार और कैफीन का सेवन बढ़ जाता है ये भी अपच का कारण बनते हैं। नमी वाले मौसम में होने वाले बैक्टीरिया और वायरस का संक्रमण भी अपच के लिए जिम्मेदार हैं।

डायरिया:डायरिया दूषित भोजन और पानी में होने वाला रोग है। वैसे तो वे किसी को कभी भी होते हैं, लेकिन बारिश में इसके मामले काफी बढ़ आते हैं। दस्त लगना इसका प्रमुख लक्षण है। पेट में दर्द और मरोड़, बुखार, मल में रक्त आना, पेट फूलना जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं। फूड पॉयजनिंग के कारण भी डायरिया हो जाता है।

फूड पॉयजनिंग:जब भी दूषित भोजन लेते हैं जो बैक्टीरिया, वायरस या दूसरे रोगाणुओं से संक्रमित होता है, तो फूड पॉयजनिंग की समस्या होती है। बारिश के मौसम में तापमान गिर जाता है जो रोगाणुओं को पनपने के लिए उपयुक्त है। इसलिए खानपान में सावधानी बरतें।

सवाल: बारिश के मौसम में किन बातों का ध्यान रखना जरूरी
जवाब: इस मौसम में बीमारियों से बचने के लिए सबसे ज्यादा खानपान का ध्यान रखना जरूरी है, जैसे

  • खाना गर्म लें और ऐसा हो जो आसानी से पच जाए।
  • कच्ची सब्जी और सलाद में नमी ज्यादा होती है इसमें बैक्टीरिया आसानी से पनपते हैं इसे खाने से बचें।
  • इस दौरान फफूंद जल्दी पनपती है, इसलिए ब्रेड, पाव आदि खाते समय फफूंद तो नहीं लगी है चेक कर लें।
  • मांस, मछली और मीट खाने से फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है इससे बचें। इसके अलावा कच्चा अंडा और मशरूम से भी दूरी बनाएं।
  • तले हुए भोजन के अलावा अधिक नमक वाले पदार्थ जैसे अचार, सॉस न खाए या यह शरीर में पानी को रोकते हैं और इसमें पेट फूलता है।

सवाल : इम्युनिटी बढ़ाने और रोगों का खतरा कम करने के लिए क्या करें?
जवाब:
इस मौसम में कुछ घरेलू चीजों जैसे शहद, जीरा, अदरक और लहसुन का प्रयोग करें। ये संक्रमण की आशंका घटाने के साथ इम्युनिटी बढ़ाते हैं।

शहद:इसमें एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो अपच और फूड पॉइजनिंग से भी बचाता है। शहद को शुद्ध रूप में ले सकते हैं। दिन में तीन बार एक टेबलस्पून शहद लेने से पेट के रोगों में राहत मिलती है।

अदरक:फूड पॉइजनिंग का कोई भी लक्षण दिखाई दे तो अदरक की चाय शुरू कर दें। इसमें एंटी-फंगल और एंटी-वायरल गुण होने के कारण मौसमी रोगों से बचाता है।

लहसुन :यह डायरिया और पेट दर्द के लक्षणों में भी आराम देता है। फूड पॉइजनिंग होने पर लहसुन की कच्ची कलियों को पानी के साथ निगल लें।

जीरा:एक चम्मच जीरे को एक कप पानी में उबाल लें। इसे छान लें। इसमें धनिया का रस और जरा सा नमक मिलाकर दिन में दो बार पीएं, राहत मिलेगी।

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