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SMS हॉस्पिटल दान में लेता है हार्ट, पर ट्रांसप्लांट की सुविधा नहीं; दिल्ली में मरीजों से वसूले जाते हैं 50 लाख रुपए

3 वर्ष पहले
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जयपुर. राजस्थान के सबसे बड़े अस्पताल में ‘दिल दुखाने’ वाला काम हो रहा है। दो साल पहले चिकित्सा मंत्री ने इस अस्पताल में हार्ट ट्रांसप्लांट की व्यवस्था शुरू कराने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक भी यह सुविधा नहीं मिलने से राजस्थान में दान हो रहे दिल दिल्ली भेजने पड़ रहे हैं। वहां निजी अस्पताल इन्हें मोटी रकम वसूलकर ट्रांसप्लांट कर रहे हैं। एक हार्ट रिसीवर से ट्रांसप्लांट के लिए 50 लाख रुपए तक लिए जा रहे हैं।

 

 

- शुक्रवार को भी ब्रेन डेड घोषित झुंझुनूं जिले के चिड़ावा निवासी 42 वर्षीय राजेन्द्र का हार्ट दिल्ली के मैक्स अस्पताल व लिवर आईएलबीएस अस्पताल को भेज दिया गया। यह सब तब हो रहा है, जबकि अंग दान करने के लिए एसएमएस अस्पताल ही अंगदाता के परिजनों की काउंसलिंग करता है। अंगदान से पहले उस मरीज के इलाज पर खर्च हुई पूरी राशि वहन करता है। सरकार ग्रीन कॉरिडोर का पूरा खर्च उठाती है।

- दूसरी ओर, मोटी रकम लेकर हार्ट ट्रांसप्लांट करने वाले निजी अस्पताल न तो राजस्थान सरकार और न ही एसएमएस अस्पताल को किसी तरह की आर्थिक राशि देते हैं। अंगदान करने वाले 
मरीज के परिजनों को भी किसी प्रकार की सहायता उपलब्ध नहीं कराई जाती।

 

राजस्थान में ऑर्गन डोनेशन का सफर
- 28 लोगों के परिजन अब तक ऑर्गन डोनेशन की पहल कर चुके।
- 49 किडनी, 26 लीवर, 16 हार्ट, 1-1 लंग,पेनक्रियाज लगाकर कुल 92 लोगों को जीवनदान दिया गया।
- 14 लोगों को टिश्यू लगाकर नई जिंदगी दी गई।

 

 

एसएमएस के डॉक्टर हार्ट ट्रांसप्लांट में माहिर

- दो साल पहले तत्कालीन चिकित्सा मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने एसएमएस अस्पताल में हार्ट ट्रांसप्लांट की व्यवस्था शुरू किए जाने की घोषणा की थी। इसके बावजूद सरकार और चिकित्सा विभाग एसएमएस अस्पताल में हार्ट ट्रांसप्लांट थियेटर के लिए जगह तक नहीं निकाल सके। 

- दूसरी ओर, महात्मा गांधी अस्पताल में किए गए पहले हार्ट ट्रांसप्लांट में एसएमएस के डॉक्टर्स की महत्ती भूमिका थी। अस्पताल के डॉक्टर्स ने दावा किया कि यदि एसएमएस में ही ऑपरेशन थियेटर और केयर यूनिट बन जाए तो वे सफल हार्ट ट्रांसप्लांट कर सकते हैं।

 

16 हार्ट डोनेट, पर सभी निजी अस्पतालों में चले गए

- प्रदेश में पिछले तीन साल से कैडेवर आर्गन डोनेशन को काफी बढ़ावा दिया गया है। एसएमएस अस्पताल में ही अब तक 16 लोग हार्ट डोनेट कर चुके हैं। ये हार्ट निजी अस्पतालों (अधिकांश दिल्ली) में भेजे जाने पड़े। निजी अस्पतालों में एक हार्ट ट्रांसप्लांट के औसतन 50 लाख रुपए तक लिए जाते हैं। अगर इस हिसाब से 16 हार्ट की कीमत लगाई जाए तो निजी अस्पतालों ने 8 करोड़ रु. तक ट्रांसप्लांट के बदले में वसूले।

 

चार को नई जिंदगी
- छत से गिरने के बाद ब्रेन डेड हुए झुंझुनूं के चिड़ावा निवासी 42 वर्षीय राजेन्द्र ने 4 लोगों को नई जिंदगी दी है। उनकी किडनी एसएमएस में ट्रांसप्लांट की गई। हार्ट को दिल्ली के मैक्स व लिवर को आईएलबीएस अस्पताल भेजा।

 

जल्द ही सुविधा शुरू करेंगे
 जल्द ही हम एसएमएस में भी हार्ट ट्रांसप्लांट संबंधी व्यवस्था शुरू कराएंगे।
- डॉ. डीएस मीणा, 
अधीक्षक, एसएमएस अस्पताल

 

 

 

 

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