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स्कूल ट्रिप पर संसद की कार्रवाई देखने गई थी 12 साल की बच्ची, वहां नोटिस किया ऐसा कुछ कि आने के बाद सीधे प्रधानमंत्री से की शिकायत

लड़की ने पीएम से कहा- वहां जो दिखा उससे बेहद शर्मिंदगी और निराशा हो रही है...

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2018, 01:38 PM IST
Heartfelt letter of Canberra school student to Prime Minister

कैनबरा. ऑस्ट्रेलिया में 12 साल की एक बच्ची जब देश की संसद की कार्रवाई देखकर आई तो उसे काफी निराशा हुई और उसने काफी शर्मिंदगी महसूस की। उसे इतना बुरा लगा कि इस बात को लेकर उसने देश के प्रधानमंत्री को एक लेटर भी लिख दिया। जिसमें उसने नेताओं के व्वहार और उनकी भाषा को लेकर शिकायत तो की ही, साथ ही उनसे इसे ठीक करने के लिए भी कहा। लेटर के आखिरी में लड़की ने अपना नाम लिखते हुए खुद को ऑस्ट्रेलिया का भविष्य बताया। बच्ची का लिखा ये लेटर इन दिनों दुनियाभर में वायरल हो रहा है।

लड़की को हुई निराशा और शर्मिंदगी

- ये स्टोरी ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा शहर के एक स्कूल में पढ़ने वाली 12 साल की बच्ची एला एजरगैलिस की है, जो 28 नवंबर को 2018 को अपने स्कूल की तरफ से संसद की कार्रवाई देखने के लिए वहां गई थी।
- एला और उसकी दोस्तों को 'गर्ल्स टेकओवर पार्लियामेंट' प्रोग्राम के तहत ऑस्ट्रेलियन पार्लियामेंट में प्रश्नकाल देखने का मौका मिला था। एला समेत बाकी लड़कियां वहां राजनीति के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने के लिए उत्साहित थी। लेकिन अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने वहां जो देखा, उससे वो निराश और शर्मिंदा महसूस कर रही थीं।
- वहां से आने के बाद एला ने देश के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन को एक इमोशनल लेटर लिखा, जिसमें उसने नेताओं के व्यवहार, उनकी भाषा और उनकी सुनने की कम क्षमता को लेकर पीएम से शिकायत की और उसे सुधारने की रिक्वेस्ट की।
- लड़की ने बताया कि विजिट के दौरान ज्यादातर सांसदों का व्यवहार देखकर उसे शर्मिंदगी और निराशा हुई। इस दौरान छह सांसदों को बाहर निकाल दिया गया। वे युवाओं के सामने बेहद गंदा उदाहरण पेश कर रहे थे।
- लड़की ने पीएम से कहा कि उन्हें एक अच्छा उदाहरण देते हुए एक-दूसरे के प्रति सम्मान से पेश आना चाहिए और एक-दूसरे को बोलने का मौका देते हुए आपस में सबकी बात सुनना चाहिए। लड़की ने कहा कि अगर वे चिल्लाने की बजाए अपने सुझाव शेयर करेंगे तो देश का भला होगा। वर्ना सिर्फ चिल्लाने से कुछ हासिल नहीं होगा।

लड़की बोली- सांसदों को भेजो हमारे स्कूल

- एला ने अपनी ओर से सुझाव देते हुए कहा कि सांसदों का व्यवहार देखकर उसे लगता है कि स्कूली बच्चों को संसद भवन ले जाने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है। इसकी बजाय सांसदों को हमारे स्कूल आकर देखना चाहिए कि बच्चे छात्र संसद को किस तरह चलाते हैं।
- लड़की ने लिखा, 'हम सब एक-दूसरे का सम्मान करते हैं, जब कोई बोलता है तो उसे सुनते हैं, एक-दूसरे को विचारों को सुनकर उन्हें लेकर अपनी ओर से सुधार के लिए सुझाव देते हैं। साथ ही इस बात को भी सुनिश्चित करते हैं कि हमारे स्कूल के मूल्यों को कायम रखें, क्योंकि 'हर कोई मायने रखता है।'
- लेटर के आखिरी में एला ने पीएम से इस समस्या को ठीक करने का अनुरोध किया। उसने लिखा, 'प्रधानमंत्री के रूप में आपके पास बदलाव करने की ताकत है और मैं आपसे अपील करती हूं कि आप संसद का माहौल और भी सम्मानजनक, समावेशी और सहयोगात्मक बनाने के लिए नेताओं का व्यवहार सुधारने की दिशा में कदम उठाएं।'
- आगे उसने लिखा, 'हर किसी को अपनी बात कहते की इजाजत है। संसद में आप पूरे देश के लिए बोलते हैं और आपको एक बेहतर, मजबूत और कहीं ज्यादा समावेशी ऑस्ट्रेलिया बनाने के लिए सम्मानजनक व्यवहार को प्रोत्साहित करते हुए एक मजबूत उदाहरण स्थापित करना चाहिए।' लेटर के अंत में उसने अपना नाम लिखते हुए, खुद को ऑस्ट्रेलिया के भविष्य के रूप में बताया।

Heartfelt letter of Canberra school student to Prime Minister
Heartfelt letter of Canberra school student to Prime Minister
Heartfelt letter of Canberra school student to Prime Minister
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Heartfelt letter of Canberra school student to Prime Minister
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