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डाउनलोड करेंजयपुर. हाईकोर्ट ने अस्थाई तदर्थ आधार पर नियुक्तियों के संबंध में टिप्पणी करते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट उमादेवी के मामले में तय कर चुका है कि अस्थाई तदर्थ आधार पर नियुक्तियां नहीं होनी चाहिए, लेकिन फिर भी यहां इसका पालन नहीं हो रहा। राज्य सरकार आदर्श नियोक्ता है और उससे यह आशा नहीं की जा सकती कि वह कर्मचारियों का शोषण करे। फिर भी कई सालों से काम कर रहे कार्मिकों को फिक्स वेतन दिया जा रहा है। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार के समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक की ओर से दायर अपील को 25 हजार रु. का हर्जाना लगाते हुए खारिज कर दिया।
- कोर्ट ने कहा कि हर्जाना राशि 2 सप्ताह में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराई जाए। न्यायाधीश एम.एन.भंडारी व डीसी सोमानी की खंडपीठ ने यह आदेश दिया। अपील में राज्य सरकार ने श्रम न्यायालय के जुलाई 2014 को अवार्ड जारी कर नाथीदेवी को कुक पद पर नियमित कर परिलाभ देने और एकलपीठ के सितंबर 2017 के आदेश को चुनौती दी थी। अपील में कहा गया कि पद नियमित नहीं है।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में स्कीम बनाकर 10 साल की सेवा पूरी करने वालों को नियमित किया है।
- इस पर कोर्ट ने कहा कि जब पद नियमित नहीं है तो कर्मचारियों को नियमित कैसे किया जबकि कर्मचारी कई सालों से काम कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि पद स्थाई प्रकृति का है। ऐसा सरकार के कई विभागों में हो रहा है। सरकार का यह काम भर्त्सना के योग्य है।
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