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CLAT की गड़बड़ी: भास्कर की खबर पर कोर्ट ने लिया प्रसंज्ञान, 21 को सुनवाई

3 वर्ष पहले
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  • सुनवाई से पहले परिणाम भले ही आ जाए, अनियमितता मिली तो अगली कार्रवाई रुकवा भी सकते हैं: हाईकोर्ट

जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश गोपालकृष्ण व्यास व रामचंद्रसिंह झाला की खंडपीठ ने शुक्रवार को कॉमन लॉ एंट्स टेस रे ्ट (क्लैट) में गड़बड़ियों के मामले में प्रसंज्ञान लिया। कोर्ट ने इस मामले में अधिवक्ता दीपिका पुरोहित को न्यायमित्र नियुक्त किया है। साथ ही स्टूडेंट्स को प्रॉपर तरीके से सोमवार को याचिका पेश करने के निर्देश दिए हैं।

 

 

- जस्टिस व्यास की खंडपीठ में सुनवाई शुरू हुई, 10-12 स्टूडेंट्स कोर्ट के समक्ष पेश हुए और दैनिक भास्कर में ‘विवादों में घिरी क्लैट, कम स्कोर से परीक्षार्थी असंतुष्ट, राजस्थान सहित चार राज्यों में याचिकाएं‘ शीर्षक से प्रकाशित समाचार की कटिंग पेश की। उन्होंने क्लैट में ऑनलाइन टेस्ट में सर्वर डाउन होने, परीक्षा 15 मिनट देरी से शुरू होने सहित कई गड़बड़ियों की ओर कोर्ट का ध्यान आकृष्ट किया।

-उन्होंने कोर्ट से यह भी कहा, कि इन सब परेशानियों के संबंध में आयोजकों को अवगत करवाया और एक्स्ट्रा टाइम देने का आग्रह किया, लेकिन नहीं दिया गया। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए प्रसंज्ञान लिया। साथ ही कोर्ट ने उन्हें प्रॉपर तरीके से रिट तैयार कर पेश करने के निर्देश दिए हैं।

- कोर्ट ने इस मामले में उनकी मदद करने के लिए अधिवक्ता पुरोहित को न्यायमित्र भी नियुक्त किया। लंच के बाद अधिवक्ता पुरोहित ने कोर्ट के समक्ष मेंशन किया, कि परिणाम एक-दो दिन में आ जाएगा, इसलिए इस मामले में आज ही सुनवाई कर ली जाए। इस पर कोर्ट ने कहा, कि इस पर सोमवार को ही सुनवाई करेंगे। परिणाम भले ही आए, अगर गड़बड़ी हुई होगी तो निर्देश देकर उसमें अगली कार्रवाई रुकवा भी सकते हैं।

 

क्लैट: 8 साल में 2016 की परीक्षा को छोड़ हर बार गफलत

2011: इस परीक्षा में पेपर में हास्यास्पद गलतियां सामने आईं। पेपर में कई प्रश्नों के सही उत्तर पहले से ही बोल्ड आ गए। पेपर अलग-अलग सेट में आते हैं, लेकिन ये गलती केवल एक सेट में ही हुई थी।

2012: परीक्षा का पेपर बहुत टफ आया था, लेकिन इस परीक्षा में ऐसे कई सवाल पूछ लिए गए, जो आउट ऑफ कोर्स थे। इस परीक्षा को लेकर तत्कालीन स्टूडेंट्स भी न्यायालय की शरण में गए थे।

2013: परीक्षा के दौरान कोई गलती नहीं हुई, लेकिन इस परीक्षा के दौरान परिणाम घोषित होने के बाद जब स्टूडेंट्स को कॉलेज आवंटित किए गए तो इस प्रक्रिया पर सवाल उठे और फिर से कॉलेज आवंटन हुआ।

2014: इस परीक्षा में भी अनियमितताएं हुईं। परीक्षा के परिणाम में दी गई आंसर-की पर खूब सवाल उठे और इस मामले में आयोजकों की ओर से गहन जांच करने के बाद क्लैट का परिणाम बदलना पड़ा।

2015: इस परीक्षा की नियमानुसार 200 सवाल पूछे गए थे, लेकिन जब आंसर-की जारी हुई तो 200 में से 113 के ही उत्तर जारी किए। वहीं पूर्व में स्टूडेंट्स को भेजी आंसर-की में जवाब मेल नहीं खा रहे थे।

2017: 15 सवालों के उत्तर पर सवाल उठे थे, इस मामले को भास्कर में उठाया गया और इसके बाद विशेषज्ञों की कमेटी बनी। आखिरकार आयोजकों को 9 गलतियां स्वीकार कर परिणाम जारी करने पड़े।

 

एक्सपर्ट व्यू: ऐसी खामियां नई नहीं, हर बार नया आयोजक, इसीलिए होती है गफलत

 इस फील्ड से मेरा करीब 20 साल पुराना जुड़ाव है। क्लैट में खामियां नई नहीं हैं। वर्ष 2011 से अब तक केवल 2016 की परीक्षाओं पर सवाल नहीं उठे। क्लैट आयोजन का हर बार दूसरी यूनिवर्सिटी को जिम्मा दे दिया जाता है। आयोजकों को अनुभव नहीं होने की वजह से ये गलतियां होती हैं। परीक्षा के लिए एक टीम बनाने के लिए भी एक याचिका लंबित है।

सागर जोशी, क्लैट विशेषज

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