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कौन चलाता है सूर्यदेव का रथ, किस धर्म ग्रंथ को कहा जाता है पांचवां वेद?

हिंदू धर्म साहित्य बहुत ही विस्तृत है। इसमें अनेक पुराण, वेद, धर्म ग्रंथ व उपनिषद आदि आते हैं।

Danik Bhaskar | Apr 29, 2018, 05:20 PM IST

रिलिजन डेस्क। हिंदू धर्म साहित्य बहुत ही विस्तृत है। इसमें अनेक पुराण, वेद, धर्म ग्रंथ व उपनिषद आदि आते हैं। इन सभी ग्रंथों में ऐसी अनेक रोचक बातें बताई गई हैं, जिसे कम ही लोग जानते हैं। आज हम आपको हिंदू धर्म ग्रंथों से संबंधित कुछ रोचक प्रश्नों के उत्तर बता रहे हैं, जो इस प्रकार हैं-


1. सूर्यदेव का रथ चलाने वाले सारथी का नाम क्या है?
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, भगवान सूर्यदेव का रथ चलाने वाले सारथी का नाम अरुण है। इनकी माता का नाम विनता और पिता का नाम महर्षि कश्यप है। भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ अरुण के छोटे भाई हैं। धर्म ग्रंथों में अरुण की दो संतानें बताई गई हैं- जटायु और संपाति। जटायु ने ही माता सीता का हरण कर रहे रावण से युद्ध किया था और संपाति ने वानरों को लंका का मार्ग बताया था।


2. पुराणों में वर्णित अश्वमेध यज्ञ क्या है?
धर्म ग्रंथों में अनेक स्थान पर अश्वमेध यज्ञ का वर्णन आता है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, श्रीराम व महाभारत के अनुसार, युधिष्ठिर ने भी ये यज्ञ करवाया था। इस यज्ञ के अंतर्गत एक घोड़ा छोड़ा जाता था। ये घोड़ा जहां तक जाता था, वहां तक की भूमि यज्ञ करने वाले की मानी जाती थी। यदि कोई इसका विरोध करता था, तो उसे यज्ञ करने वाले के साथ युद्ध करना पड़ता था। ये यज्ञ वसंत या ग्रीष्म ऋतु में किया जाता था और करीब एक वर्ष इसके प्रारंभिक अनुष्ठानों की पूर्णता में लग जाता था।

3. हिंदू धर्म में किस ग्रंथ को पांचवां वेद कहा गया है?
हिंदू धर्म में महाभारत को पांचवां वेद कहा गया है। इसके रचयिता महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास हैं। महर्षि वेदव्यास ने इस ग्रंथ के बारे में स्वयं कहा है- यन्नेहास्ति न कुत्रचित्। अर्थात जिस विषय की चर्चा इस ग्रंथ में नहीं की गई है, उसकी चर्चा अन्यत्र कहीं भी उपलब्ध नहीं है। श्रीमद्भागवत गीता जैसा अमूल्य रत्न भी इसी महासागर की देन है। इस ग्रंथ में कुल मिलाकर एक लाख श्लोक है, इसलिए इसे शतसाहस्त्री संहिता भी कहा जाता है।