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भगवान शिव ने बनाई थी वीणा और रावण ने किया था सारंगी का आविष्कार

Dainik Bhaskar

Jun 06, 2018, 05:00 PM IST

भारतीय संगीत वाद्य और म्यूजिक ऑफ हिंदुस्तान पुस्तक के अनुसार, जानिए वाद्य यंत्रों का रोचक इतिहास।

History of Veena, Sarangi, Mridang, Lord Shiva, Ravan,
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रिलिजन डेस्क। शास्त्रों के अनुसार, सृष्टि का आरंभ ओम की ध्वनि से हुआ है। ध्वनियों की लयबद्ध सुरीली प्रस्तुति ही संगीत है। इसे और अधिक रोचक बनाया वाद्य यंत्रों ने। भारतीय संगीत वाद्य और म्यूजिक ऑफ हिंदुस्तान पुस्तक के अनुसार, आज हम आपको वाद्य यंत्रों के रोचक इतिहास के बारे में बता रहे हैं, जो इस प्रकार है...

1. सारंगी
सारंगी की कल्पना रावणास्त्र तथा रावणहस्त वीणा से हुई है। संगीत शास्त्रों में इसकी जानकारी संगीतराज में मिलती है। पिनाक वीणा में वीणा बजाने वाले की स्थिति ऐसी बन जाती है जैसे कोई धनुषधारी धनुष लेकर बैठा हो। इसी वीणा को बाद में सारंगी कहा गया है।

2. वीणा
वीणा का प्रयोग शास्त्रीय संगीत में होता है। शिवपुराण के अनुसार, नारदजी की साधना से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें संगीत कला प्रदान की और वीणा का निर्माण किया। शिव प्रदोष स्त्रोत में लिखा है कि जब शूलपाणि शिव ने नृत्य करने की इच्छा की तो सरस्वती ने वीणा, इंद्र ने वेणु, ब्रह्मा ने करताल और विष्णु ने मृदंग बजाया।


3. मृदंग
इस वाद्य यंत्र का नाम भी कई ग्रंथों में पढ़ने को मिलता है। प्राचीन मृदंग तीन भागों में होती थी। उसका एक भाग गोद में रहता था तथा दूसरे दोनों भाग सामने उर्ध्वमुखी (ऊपर की दिशा) रखे जाते थे। छठी-सातवी शताब्दी में मृदंग तीन भागों में बदल गया और बाद में एक गोद वाला और दूसरा खड़ा वाला भाग ही प्रयोग होने लगा। अंत में इसका उर्ध्वमुखी भाग भी हट गया और उसका गोद वाला भाग ही मृदंग या मर्दल के नाम से प्रचलित रह गया।

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