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डाउनलोड करेंभोपाल. आपके आसपास फलदार पेड़ लगे हैं और उन पर अगर चमगादड़ आते हैं तो सावधान होने की जरूरत है। ऐसे पेड़ों के फलों को भी न खाएं, ऐसा इसलिए क्योंकि चमगादड़ों में पाए जाने वाले ‘निपाह’ नाम के जानलेवा वायरस के संपर्क में आने से केरल में 11 लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में हमें भी इसे लेकर अलर्ट हो जाना चाहिए, ताकि समय रहते हम इस संक्रमण से बच सकें।
केबल स्टे ब्रिज के पास 250 से ज्यादा पेड़ों पर चमगादड़
केबल स्टे ब्रिज के पास कमला पार्क सहित आसपास के इलाकों में लगे 250 से ज्यादा पेड़ों पर इन दिनों 50 हजार से अधिक चमगादड़ मौजूद हैं, जो कि कमला पार्क अंदर लगे पेड़ों और मेन रोड के पेड़ों पर सबसे ज्यादा हैं, क्योंकि पार्क में हर दिन ढाई हजार लोग की आवाजाही होती है। ऐसे में केरल में निपाह वायरस के कारण हुई मौत के बाद से यहां आने वालों के लिए भी यह स्थान खतरनाक साबित हो सकता है। जानकारी के मुताबिक तालाब के आसपास हर साल चमगादड़ होली के बाद से आने लगते हैं और बारिश शुरू होते ही पहाड़ी इलाकों में जा छिपते हैं।
क्या होता है निपाह वायरस... डब्लूएचओ के मुताबिक, निपाह वायरस चमगादड़ से फलों में और फलों से इंसानों और जानवरों पर आक्रमण करता है। 1998 में पहली बार मलेशिया के कांपुंग सुंगई निपाह में इसके मामले सामने आए थे। इसीलिए इसे निपाह वायरस नाम दिया गया। भारत में इससे पहले 2001 में सिलीगुड़ी और 2007 में नादिया में इस वायरस की पुष्टि हो चुकी है
तेज बुखार और दिमाग में भी होती है जलन
लक्षण... सांस लेने में होती है दिक्कत
इस वायरस से प्रभावित शख्स को सांस लेने की दिक्कत होती है। दिमाग में जलन महसूस होती है। तेज बुखार आता है।
खतरनाक... कोई वैक्सीन तक नहीं
इसकी इंसान या जानवरों के लिए कोई वैक्सीन नहीं है। इससे प्रभावित शख्स को आईसीयू में रखकर इलाज करना होता है।
सावधानी.. ऐसे पेड़ों के फल न खाएं
बीमारी से बचने के लिए चमगादड़ उस पेड़ के फल न खाएं जिनपर चमगादड़ बैठती हों। बीमार सुअर, घोड़ों से दूरी बनाए रखनी चाहिए।
भोपाल में अभी अलर्ट जारी नहीं
स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव गौरी सिंह ने बताया कि इस तरह के मामलों में केन्द्र की ओर से निर्देश मिलने पर ही अलर्ट जारी किया जाता है। इंटीग्रेटेड डिसीज सर्विलांस प्रोग्राम के तहत। अभी ऐसा निर्देश नहीं मिले हैं।
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