--Advertisement--

Food history : फालूदेह से बना फालूदा ऐसे भारत तक पहुंचा, देश के साथ बदल जाता है इसका नाम, रंग और स्वाद

फालूदा दुनियाभर के कई हिस्सों में खाया जाता है। हर देश में इसके परोसने का अंदाज भी जुदा है।

Dainik Bhaskar

Jun 12, 2018, 05:19 PM IST
यह एक पारंपरिक पर्शियन डिश है जो 'जमशेदी नवरोज़' पर पारसियों द्वारा खाई जाती है। यह एक पारंपरिक पर्शियन डिश है जो 'जमशेदी नवरोज़' पर पारसियों द्वारा खाई जाती है।

हेल्थ डेस्क. फालूदा एक ऐसा मिष्ठान्न है जो भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में बड़े चाव के साथ खाया जाता है और इसे परोसने का अंदाज़ भी औरों से जुदा होता है। ख़ासकर भारत और मध्यपूर्व एशिया में फालूदा बेहद प्रसिद्ध है।

फालूदा की शुरुआत
माना जाता है कि फालूदा का उद्भव पर्शिया (आज के ईरान) में हुआ था। पर्शिया में इसे 'फालूदेह' कहा जाता है। यह एक पारंपरिक पर्शियन डिश है जो 'जमशेदी नवरोज़' पर पारसियों द्वारा खाई जाती है। यह विश्व के सबसे पुराने मिष्ठान्नों में से एक है और 400 ईसापूर्व में भी यह खाया जाता था। ये साधारणतया मक्के के आटे से तैयार वर्मीसेली नूडल्स, गुलाब जल, चाशनी से तैयार होता है।

फालूदा की भारत यात्रा
कुछ इतिहासकारों का कहना है कि भारत में फालूदा मुगल बादशाह जहांगीर के समय आया। जबकि कुछ का मानना है कि नादिर शाह के साथ। फालूदा किसी के साथ भी भारत आया हो लेकिन धीरे-धीरे फालूदा ने भारतीय खान-पान में अपनी पैठ बढ़ाई और यह देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचा। स्थानीय लोगों ने इसे अलग-अलग तरीक़ों से अपनाया और यह आज के ठंडे, रंगबिरंगे रूप में हमारे सामने मौजूद है।

फिलीपींस में 'हालो-हालो' और मॉरीशस में कहते 'आलूदा'​
'हालो-हालो' नाम से फिलीपींस में फालूदा जैसी ही पारम्परिक डिश मिलती है जो उबले दूध, नारियल, आइसक्रीम और उष्णकटिबंधीय यानी ट्रॉपिकल फलों से तैयार होती है। सिंगापुर में मिलने वाले 'सिंगापुरी केंडोल' में बर्फ, नारियल और दूध के ऊपर खजूर की चाशनी डाली जाती है। मॉरीशस की 'बबल टी' दूध, तुलसी के बीज, स्ट्राबेरी और वेनिला सिरप डालकर बनाई जाती है जिसे स्थानीय भाषा में 'आलूदा' कहते हैं। बांग्लादेश के दक्षिणी भाग में पैंडन नामक ट्रॉपिकल पौधे के फल, साबूदाना, पिस्ता, आम, क्रीमयुक्त नारियल, दूध और वर्मीसेली नूडल्स के मेल से बना फालूदा बेहद प्रसिद्ध है।

मिल्क शेक में डालकर भी खाते
कभी-कभी वे इसे एक अलग स्वाद देने के लिए इसमें स्ट्रॉन्ग ब्लैक टी भी मिलाकर खाते हैं। इराक़ में फालूदा की तरह ही दिखाई देने वाली डिश मोटे वर्मीसेली नूडल्स के साथ बनाई जाती है। दक्षिण अफ्रीका में फालूदा को इसी नाम के साथ मिल्क शेक के साथ भोजन के वक़्त या उसके बाद में सर्व किया जाता है।

देश के साथ बदलता रंग और स्वाद
भारतीय उपमहाद्वीप (भारत, नेपाल, पाकिस्तान और बांग्लादेश) में फालूदा आइसक्रीम के साथ परोसा जाता है। यह तुलसी के बीज, उबले हुए वर्मीसेली नूडल्स, रोज़ सिरप और दूध से बनाया जाता है। इसके अलावा चॉकलेट फालूदा, बटरस्कॉच, कुल्फी फालूदा, केसर फ्लेवर, मसाला फालूदा, शिराजी फालूदा, पिस्ता आइस्क्रीम और मैंगो फालूदा प्रसिद्ध हैं। उत्तर भारत में फालूदा को रबड़ी के साथ बड़े चाव से खाया जाता है। इलायची पाउडर, शक्कर और दूध में मिलाकर यह रबड़ी फालूदा तैयार होता है। मदुरई में फालूदा का ही एक और प्रकार मौजूद है जिसे 'जिगरठंडा' कहते हैं।

कुछ इतिहासकारों का कहना है कि भारत में फालूदा मुगल बादशाह जहांगीर के समय आया। जबकि कुछ का मानना है कि नादिर शाह के साथ। कुछ इतिहासकारों का कहना है कि भारत में फालूदा मुगल बादशाह जहांगीर के समय आया। जबकि कुछ का मानना है कि नादिर शाह के साथ।
X
यह एक पारंपरिक पर्शियन डिश है जो 'जमशेदी नवरोज़' पर पारसियों द्वारा खाई जाती है।यह एक पारंपरिक पर्शियन डिश है जो 'जमशेदी नवरोज़' पर पारसियों द्वारा खाई जाती है।
कुछ इतिहासकारों का कहना है कि भारत में फालूदा मुगल बादशाह जहांगीर के समय आया। जबकि कुछ का मानना है कि नादिर शाह के साथ।कुछ इतिहासकारों का कहना है कि भारत में फालूदा मुगल बादशाह जहांगीर के समय आया। जबकि कुछ का मानना है कि नादिर शाह के साथ।
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..