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एक्सपर्ट इंटरव्यू : किडनी की बीमारी का आंखों से कनेक्शन, अनिद्रा और पैरों में सूजन है तो हो जाएं अलर्ट, फॉलो करें गोल्डन रूल

आंखों के लाल होने की आम वजहें होती हैं एलर्जी और संक्रमण, लेकिन किडनी में कोई समस्या होने पर भी आंखें लाल हो जाती हैं।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Jul 09, 2018, 12:36 PM IST

एक्सपर्ट इंटरव्यू : किडनी की बीमारी का आंखों से कनेक्शन, अनिद्रा और पैरों में सूजन है तो हो जाएं अलर्ट, फॉलो करें गोल्डन रूल

हेल्थ डेस्क. क्रॉनिक किडनी डिजीज, हायपरटेंशन और डायबिटीज होने पर सीधा प्रभाव आंखों की रोशनी पर भी पड़ता है। ज्यादातर लोगों का मानना है कि सिर्फ डायबिटीज की स्थिति में ही ऐसा होता है। आंखों की रोशनी कम होना इसका पहला लक्षण है। पारस हॉस्प्टिल गुरुग्राम के चीफ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. पीएन गुप्ता से जानते हैं किडनी की बीमारी से आंखों की समस्या का क्या कनेक्शन है और इसे कैसे पहचानें...

सवाल: किडनी की बीमारी का आंखों पर असर कब पड़ता है?
जवाब:
किडनी फेलियर की वजह से मरीज की आंखों की रोशनी धुंधली हो सकती है। इस बारे में मरीज को अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए और अगर जरूरत हो तो किसी विशेषज्ञ ऑप्थेल्मोलॉजिस्ट को दिखाकर दवाएं और चश्मे लेने चाहिए। किडनी की बीमारी का अगर इलाज नहीं किया जाता है तो इस वजह से आंखों की रोशनी पूरी तरह से जा सकती है। लेकिन ऐसा किडनी की बीमारी के अंतिम चरण में होता है। फिर भी इस तरह की स्थिति आने तक इंतजार करने से बेहतर है समय पर अपनी किडनी और आंखों को सुरक्षित रखें।

सवाल: किडनी में दिक्कत हैं इसे कैसे समझें?
जवाब:
किडनी की समस्या एक दिन में नहीं होती है। यह वर्षों की गलत जीवनशैली का परिणाम होती है। बचाव ही बेहतरीन उपाय है इसके लक्षणों पर नजर रखना और शुरुआती चरण में ही इसे ठीक कराना जरूरी है। ये लक्षण दिखने पर अलर्ट हो जाएं...

थकान:किडनी की बीमारी का सबसे कॉमन लक्षण है थकान। अगर अक्सर थकान महसूस होती है। यहां तक कि अच्छा खानपान होने के बावजूद यह समस्या हो सकती है। किडनी सही ढंग से काम नहीं करती है तो रक्त में अनगिनत विषैले तत्व (टॉक्सिंस) एकत्र हो जाते हैं। इसके कारण भीतर से अच्छा महसूस नहीं होता है और हर समय थकान महसूस होती है।

नींद में बाधा :अधिक थकान महसूस होने के बावजूद भी नींद आने में समस्या महसूस होती है। सिस्टम में मौजूद टॉक्सिंस किडनी की फिल्टर करने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। यूरिन के जरिए टॉक्सिन के शरीर से बाहर न निकलने से नींद से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न करते हैं।

यूरिन में समस्या :किडनी यूरिन की प्रक्रिया को रेगुलेट करती हैं। अगर इनमें कोई समस्या होती है तो यूरिन करने की आदत में भी बदलाव आ जाता है। किडनी की समस्या का सबसे आम लक्षण है यूरिन का बार-बार आना। अगर पहले की तुलना में अधिक बार यूरिन के लिए जाना पड़ता है, यूरिन के रंग और गंध में बदलाव, इसमें बहुत बुलबुले दिखाई दें तो डॉक्टर के पास जाएं।

पैरों में सूजन: अगर किडनी सही ढंग से काम नहीं करती है तो शरीर में सोडियम का जमाव हो जाता है। ऐसे में पैरों, टखनों और पूरे पैर में सूजन आ सकती है। अगर जूते-चप्पल आसानी से पैरों में फिट नहीं हो रहे हैं तो अलर्ट होने की जरूरत है।

सवाल: कौन से लक्षण बताते हैं किडनी डिजीज से आंखों प्रभावित हो रही हैं?
जवाब:
आंखों में बीमारी की शुरुआत छोटे-छोटे लक्षणों से होती है अगर ये लक्षण लगातार दिखने लगें तो डॉक्टर संपर्क करें...

आंख और त्वचा में खुजली :शरीर में खनिजों की सही मात्रा बनाए रखने के लिए भी किडनी ही जिम्मेदार होती हैं। किडनी में कोई समस्या होने पर यह प्रक्रिया भी गंभीर रूप से प्रभावित होती है। परिणामस्वरूप पूरे शरीर और आंखों में भी खुजली होती है।

लाल आंखें:आंखों के लाल होने की आम वजहें होती हैं एलर्जी और संक्रमण, लेकिन किडनी में कोई समस्या होने पर भी आंखें लाल हो जाती हैं और इनमें हर समय हल्का दर्द महसूस हो सकता है।

आंखों का रूखापन : यह एक क्रॉनिक सिंड्रोम है जो समय के साथ बढ़ता जाता है। आंखों को जितना अधिक रगड़ेंगे, आंखें उतनी ही रूखी होंगी। रूखी आंखें सही ढंग से काम नहीं करती हैं और इनसे ठीक से दिखाई नहीं देता है। किडनी की समस्या के चलते आंखों में बहुत अधिक कैल्शियम और फॉस्फेट जमा होने लगता है। ऐसे में आंखें बहुत अधिक रूखी हो जाती हैं और उन पर विपरीत असर पड़ता है।

आंख में घाव : यह एक दर्द वाला सिंड्रोम होता है। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से एक किडनी की बीमारी भी है। ऐसे में अगर बार-बार आंखों में घाव हो रहा है तो डॉक्टर से ज़रूर बात करनी चाहिए। घाव की वजह से आंखें लाल हो सकती हैं और इनमें खुजली भी महसूस होती है। इसकी वजह से आंख की कॉर्निया, कंजंक्टाइवा और स्लेयर यानी सफेद हिस्से को भी नुकसान हो सकता है।

रैटिनोपैथी :यह भी आंखों की एक बीमारी है, इस बीमारी का पहला लक्षण है आंखों की रोशनी कम होना। इसमें आंख के पर्दे पर बनी रक्तवाहिनियों से तरल पदार्थ निकलने लगता है।

सवाल: इसका कैसे बचाव करें?
जवाब:
किडनी से जुड़ी समस्या से बचने के 'गोल्डन रूल' को अपनाएं। इसके तहत सबसे पहले ब्लड शुगर की जांच करानी चाहिए। वजन को नियंत्रित रखें। अगर फैमिली में किसी को पहले ही ये रोग रहा है तो किडनी की जांच करानी चाहिए। ब्रूफेन जैसी दर्द निवारक दवाओं को कम से कम ही लें। इसके अलावा बीपी को कंट्रोल करने की कोशिश करें।

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