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पराए शहर में अपने दोस्त...कौन सी बातें जानना है जरूरी

पराए शहर में दोस्त ही सुख-दुख के साथी होते हैं। मुश्किल वक़्त में एक दूसरे को सम्भालना ही इस रिश्ते की संजीवनी है।

Dainik Bhaskar

May 30, 2018, 01:44 PM IST
अगर साथी तनाव का शिकार है तो उससे लगातार प्रश्न पूछने की बजाय उसके साथ कोई दिलचस्प एक्टिविटी में भाग लें। अगर साथी तनाव का शिकार है तो उससे लगातार प्रश्न पूछने की बजाय उसके साथ कोई दिलचस्प एक्टिविटी में भाग लें।

यूटिलिस्टी डेस्क. कभी पढ़ाई के लिए, कभी जॉब के लिए परिवार से दूर रहना मजबूरी बन जाता है। ऐसे में वे दोस्त और रूममेट ही होते हैं जो कभी भी परिवार की कमी महसूस नहीं होने देते। जो बाहर रहते हैं वे जानते हैं कि रात के तीन बजे अपने दिल की सारी बातें कह जाने पर जो सुकून मिलता है वह शब्दों के दायरे से परे है। नियमों का साथ निभाना या साथ न निभाने का रोमांच भी इसी दोस्त की वजह से होता है। लेकिन जब आपका यही सम्बल कहीं कमज़ोर होने लगे या बीमार पड़ जाए तो उसे अतिरिक्त देखभाल की ज़रूरत होती है। ऐसे में आप किस तरह से उसकी मदद कर सकते हैं। किरण बाला से जानते हैं कौन सी बातें याद रखना है जरूरी...

मानसिक सम्बल है ज़रूरी
ज़ाहिर सी बात है कि अगर आप साथ रहते हैं तो लड़ते भी उतना ही होंगे। ऐसे में अपनी छोटी-मोटी तकरारों को दरकिनार कर पूरी तरह से उनका साथ दें। बीमार होने पर सबसे ज़्यादा घर याद आता है। ऐसे में उन्हें संभालने का सारा ज़िम्मा आप पर ही आ जाता है। कोशिश करें कि अपने रोज़मर्रा के जीवन से इन दिनों थोड़ा अधिक समय उनके साथ बिताएं। अगर साथी तनाव का शिकार है तो उससे लगातार प्रश्न पूछने की बजाय उसके साथ कोई दिलचस्प एक्टिविटी में भाग लें। दोस्त क्या चाहते हैं, आप बेहतर जानते हैं।

रूममेट नहीं दोस्त बनें
कई बार लोग रूममेट को सिर्फ़ कमरा साझा करने वाला व्यक्ति समझ लेते हैं, जबकि रूममेट एक अच्छा दोस्त और केयरटेकर होता है। यदि आप कामकाजी हैं तो शायद छुट्‌टी लेकर उसके साथ रहना सम्भव नहीं हो, ऐसे में ज़रूरत का सामान, खाने-पीने की व्यवस्था और दवा आदि का इंतज़ाम करके जाएं। बीच में फोन के माध्यम से हालचाल पूछते रहें। ऐसा करने पर आपका ज़्यादा वक़्त भी नहीं लगेगा और इस व्यवहार से दोस्त को भी अकेलापन नहीं लगेगा।


ज़्यादा काम पर चिढ़ें नहीं
जब साथ में रहते हैं तो काम का बंटवारा होता है। हो सकता है कि साथी के बीमार होने पर आपको रोज़ से अधिक काम करना पड़े। ऐसे में झल्लाएं नहीं, क्योंकि एक-दूसरे की परवाह करना आपका फर्ज़ है। अगर वह कराहे या थोड़ी-थोड़ी देर में काम बताए, तो उसे समझने की कोशिश करें। उसे सम्बल चाहिए। छोटा-मोटा बुखार या वायरल हो तो डॉक्टर से परामर्श लेकर सही समय पर दवा देकर सम्भाल सकते हैं लेकिन डॉक्टर कहे, तो घरवालों को सूचित करें।

खान-पान का रखें ख़्याल
बीमारी में खाने-पीने का ख़्याल रखना बेहद ज़रूरी होता है। रूममेट या दोस्त यदि अकेले रहता/रहती है तो उसकी दवाइयों के साथ-साथ डॉक्टर के बताए आहार पर भी ध्यान दें। जहां तक हो उसके लिए हल्का भोजन बनाएं। इस बात का विशेष ख़्याल रखें कि दिन व रात को भोजन समयानुसार ही हो। यदि रूममेट नौकरीपेशा है तो ऐसे में उसे कुछ दिन छुट्‌टी लेकर आराम करने की सलाह दें।

कई बार लोग रूममेट को सिर्फ़ कमरा साझा करने वाला व्यक्ति समझ लेते हैं, जबकि रूममेट एक अच्छा दोस्त और केयरटेकर होता है। कई बार लोग रूममेट को सिर्फ़ कमरा साझा करने वाला व्यक्ति समझ लेते हैं, जबकि रूममेट एक अच्छा दोस्त और केयरटेकर होता है।
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अगर साथी तनाव का शिकार है तो उससे लगातार प्रश्न पूछने की बजाय उसके साथ कोई दिलचस्प एक्टिविटी में भाग लें।अगर साथी तनाव का शिकार है तो उससे लगातार प्रश्न पूछने की बजाय उसके साथ कोई दिलचस्प एक्टिविटी में भाग लें।
कई बार लोग रूममेट को सिर्फ़ कमरा साझा करने वाला व्यक्ति समझ लेते हैं, जबकि रूममेट एक अच्छा दोस्त और केयरटेकर होता है।कई बार लोग रूममेट को सिर्फ़ कमरा साझा करने वाला व्यक्ति समझ लेते हैं, जबकि रूममेट एक अच्छा दोस्त और केयरटेकर होता है।
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