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Parenting: पाठशाला से पहले नन्हे की शिक्षा बनाएगी उसे सेल्फ डिपेंडेंट

अगर आप बच्चे को स्कूल भेजने वाले हैं तो उन्हें साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखना सिखाएं।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Jun 12, 2018, 05:54 PM IST

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    स्कूल भेजने से लगभग दो से तीन हफ्ते पहले ही अपने बच्चे के साथ किताब पढ़ें या कोई कहानी की किताब उसके लिए लें, जिसमें चित्रों के माध्यम से कहानी व्यक्त की गई हाे।

    लाइफस्टाइल डेस्क.माता-पिता बच्चों के भ‌विष्य को लेकर कई तरह के सपने बुनते हैं। ये सपने उनके जन्म के साथ ही शुरू हो जाते हैं। जब वो पहली बार पाठशाला जाते हैं तो माता-पिता को उसके पीछे उनका सुनहरा भविष्य नज़र आता है। बच्चों को कई तरह की नसीहतें देकर पाठशाला भेजा जाता है। लेकिन कुछ ज़रूरी बातें भी उन्हें सिखाएं, जो उनके विकास के लिए बेहद ज़रूरी हैं। प्ले स्कूल संचालिका नीतू गर्ग से जानते हैं इसके बारे में...

    8 प्वाइंट्स: क्यों जरूरी बच्चों को ये बातें समझाना
    अपना सामान पहचानना
    ये उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना एक दोस्त बनाना, क्योंकि बच्चों को वे सभी चीज़ें आकर्षित करती हैं जो रंग-बिरंगी होती हैं। बच्चों की अधिकांश वस्तुएं आकर्षक रंगों में ही होती हैं। ऐसे में अगर वह अपना बैग या बोतल नहीं पहचान पाता है, तो उसे असुविधा होगी। उसे उसकी चीज़ों की पहचान और उसकी पसंद के चित्र आदि की बोतल, टिफिन आदि दिलाएं। साथ ही जूते पहनना या उतारना, कपड़े जगह पर रखना आदि की भी जानकारी दें।

    हाथ धोना व पोंछना
    ज्यादातर लोग बच्चों की सफाई को अनदेखा कर देते हैं क्योंकि सामान्यत: इतने छोटे बच्चों को स्वयं भोजन आदि ग्रहण करने की आवश्यकता नहीं होती। उन्हें बड़े या बुजुर्ग ही खिला देते हैं। जिसकी वजह से उनके हाथों पर ध्यान कम ही जाता है। लेकिन अगर आप उन्हें स्कूल भेजने वाले हैं तो उन्हें साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखना सिखाएं। ऐसे में बच्चा बीमार भी कम होगा और उसे साफ़ रहने की आदत भी पड़ेगी।

    किताबों से दोस्ती
    स्कूल भेजने से लगभग दो से तीन हफ्ते पहले ही अपने बच्चे के साथ किताब पढ़ें या कोई कहानी की किताब उसके लिए लें, जिसमें चित्रों के माध्यम से कहानी व्यक्त की गई हाे। अचानक स्कूल भेजने और किताबों के इस्तेमाल से वह घबरा सकता है। ऐसे में उसे किताबों से दोस्ती करना सिखाएं।

    समय प्रबंधन
    यूं तो बच्चे अपनी मर्ज़ी के मालिक होते हैं। जब जो मनचाहे वही करते हैं, लेकिन स्कूल का अपना समय होता है जहां सभी कार्य समयानुसार होते हैं। जैसे स्कूल का वक़्त, लंच टाइम आदि। स्कूल जाने के कुछ दिनों पहले से ही बच्चे का टाइम मैंनेज कर लें जैसे उठने का टाइम, खेलने का टाइम आदि। इसके लिए स्कूल भेजने के एक से दो महीने पहले बच्चे को जल्दी उठने की आदत डालवाएं ताकि स्कूल जाते वक़्त उसे परेशानी का सामना न करना पड़े।

    बोर्ड गेम्स या पज़ल्स खेलें

    स्कूल में ज़्यादातर वक़्त बच्चों को बैठकर पढ़ाने और सिखाने में जाता है। 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे एक ही स्थान पर अधिक समय तक बैठने के आदी नहीं होते हैं। इसके लिए उन्हें घर पर बोर्ड गेम या पज़ल्स लाकर दें ताकि उनके बैठने की आदत और एकाग्रता में वृद्धि हो।

    कुछ समय उसके साथ बिताएं

    बड़ों की बातें बच्चे नहीं समझते है। लेकिन उनसे बातचीत करना अपने आप में महत्वपूर्ण होता है। आप उनसे जितनी बातें करेंगे, वे उतने ज़्यादा सुनने में मैच्योर होंगे। स्कूल जाने से पहले अगर आप उनसे बातें करेंगे, तो वो स्कूल से आनेे के बाद स्कूल की सारी बातें आपसे साझा करेंगे।वाॅशरूम फ्रेंडली
    बच्चों के साथ ये सबसे बड़ी चुनौती होती है। बच्चों को जब वॉशरूम जाना होता है तो वे इस बात को किसी के साथ साझा नहीं करते। उन्हें किसी अनजान व्यक्ति से इस तरह की बात कहना आसान नहीं लगता। उन्हें इन बात के लिए तैयार करें कि उन्हें वॉशरूम जाने के बारे में कैसे बोलना है।

    'न' जैसे शब्द से बचें
    अपने बच्चे के किसी भी काम के लिए 'न' नहीं या ग़लत जैसे शब्दों के उपयोग से बचना चाहिए। उनके द्वारा किए गए कोई भी काम को आप पहले प्रोत्साहित करें, बाद में उसके सही तरीक़े बताएं। जैसे यदि वह रंग भर रहा है और उससे रंग चित्र से बाहर हो गया है, तो उसे आप इतने सुंदर रंग भरने की शाबाशी दें और फिर बाद में ये समझा दे कि रंग चित्र से बाहर चला गया है। अगर अंदर ही रहता तो ज़्यादा सुंदर दिखता। यह सकारात्मकता उसे स्कूल में भी बहुत मदद देगी।

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