पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Human Fossils Finder Scientist Doctor Arun Sonakia Death In Road Accident

मानव जीवाश्म खोजने वाले वैज्ञानिक सोनकिया की सड़क हादसे में मौत, भोपाल लौटते समय हादसा

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

होशंगाबाद.   देश में मानव जीवाश्म खोजने वाले भू-वैज्ञानिक डॉ. अरुण सोनकिया का शनिवार को हरदा रोड पर सड़क हादसे में निधन हो गया। उन्होंने उत्तर दिशा में नर्मदा नदी के तट पर बसे ग्राम हथनौरा में 5 दिसंबर 1982 में मानव जीवाश्म की खोज की थी। इसके लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया था।

 

शनिवार को वे अपने पैतृक गांव हिरनखेड़ा (सिवनीमालवा) आए थे। जब वे कार से भोपाल लौट रहे थे, तब दोपहर करीब 2 बजे टुगारिया गांव जाने वाले रोड के पास ट्रक ने टक्कर मार दी। वे भोपाल की अपेक्स बैंक कॉलोनी रोहित नगर के पास सहयोग बिहार कॉलोनी में रहते थे।

 

पुस्तैनी मकान के रिकंस्ट्रक्शन के लिए बयाना देकर लौट रहे थे डॉ. सोनकिया 

 

डॉ. सोनकिया अपने पुस्तैनी घर को रिकंस्ट्रक्शन करा रहे थे। इसी सिलसिले में इन दिनों उनका बार-बार गांव आना-जाना हो रहा था। उनके छोटे बेटे विवेक ने बताया कि वे इस हफ्ते में तीसरी बार गांव गए थे। दोपहर करीब 11 बजे गांव पहुंचे थे। यहां उन्होंने घर बनाने वाले कांट्रेक्टर, लेबर और बिल्डिंग मटेरियल सप्लाई करने वालों को बयाना दिया था। जल्दी ही मकान का काम शुरू होना था। घर पुराने पैटर्न पर ही रीकंस्ट्रक्शन होना था। वे दोपहर करीब 1.30 बजे गांव से भोपाल के लिए निकले थे, तभी हादसा हो गया। विवेक सोलर एनर्जी का व्यवसाय करते हैं, जबकि डॉ. सोनकिया के बड़े बेटे सिद्धार्थ मुंबई ओएनजीसी में पदस्थ हैं। उनकी बेटी श्वेता भी मुंबई में ही रहती हैं। रविवार सुबह करीब 10 बजे डॉ. सोनकिया का अंतिम संस्कार किया जाएगा। गांव में ही रहने वाले उनके भतीजे विनायक ने बताया कि दोपहर करीब ढाई बजे भोपाल से ताई जी का फोन आया और उन्होंने ताऊ जी का एक्सीडेंट होने की बात कही। किसी ने घटना स्थल से ताई जी को एक्सीडेंट की सूचना दी थी। विनायक मौके पर पहुंचे तब तक उनकी माैत हो चुकी थी। 


5 लाख साल पुराना मानव कपाल खोजा 
भू वैज्ञानिक डॉ. अरुण सोनकिया ने नर्मदा नदी के तट पर बसे ग्राम हथनौरा में 5 दिसंबर 1982 में मानव जीवाश्म की खोज की थी। इसके लिए उन्हें राष्ट्रपति सम्मान से नवाजा गया था। उन्होंने पांच लाख साल पुराने मानव के कपाल अवशेष खोजे थे। इस प्राचीन मानव को वैज्ञानिकों द्वारा नर्मदा मानव का नाम दिया गया। इस कंकाल का आकलन ईएसआर (इलेक्ट्रॉन स्पीन रेजोलेंस) डेटिंग पद्धति से किया था। इससे यह साबित किया गया कि मानव के विकास की कहानी भारत में शुरू होती है। तब डॉ. अरुण सोनकिया ने बताया था की इससे पूर्व आदि मानव की उत्पत्ति की जानकारी पूर्वी अफ्रीका के तंजानिया अंतर्गत ओल्डवाईगॉज नामक स्थान से मिलती रही है। नर्मदा मानव की 5 लाख साल पुरानी खोपड़ी आज भी मानव विज्ञान संग्रहालय नागपुर में देखी जा सकती है। इसे धरोहर स्वरूप रख गया है। हथनोरा के सामने के ग्राम धांसी और सूरजकुंड में नर्मदा के उत्तरी तट पर प्राचीनतम विलुप्त हाथी (स्टेगोडॉन) के दोनों दांत तथा ऊपरी जबड़े का जीवाश्म भी उन्होंने खोजा था। 

खबरें और भी हैं...