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डाउनलोड करेंदिलनवाज़ पाशा
बीबीसी संवाददाता
राजस्थान पुलिस के मुताबिक़ जोधपुर जिले में मंगलवार रात हिरण का शिकार रोकते हुए एक युवक की हत्या के बाद बिश्नोई समाज आंदोलित है.
पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को हिरासत में लिया है.
पुलिस के मुताबिक़ मंगलवार रात करीब एक बजे जंभा थानाक्षेत्र के ननेऊ गाँव के करीब हिरण का शिकार करने आए शिकारियों ने पीछा करने पर गाँव के एक 25 वर्षीय युवक की गोली मार कर हत्या कर दी.
हिरण की जान बचाते हुए युवक की हत्या की ख़बर के बाद बिश्नोई समाज के लोग इकट्ठा होना शुरू हो गए. घटनास्थल पर बुधवार शाम तक हज़ारों की तादाद में लोगों ने प्रदर्शन किया.
मृतक शैतान सिंह गाँव के तीन अन्य लोगों के साथ शिकारियों का मुकाबला करने पहुँचा था.
मामले की जाँच कर रहे पुलिस अधिकारी घेवर सिंह ने फ़ोन पर बीबीसी को दो लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी.
घेवर सिंह के मुताबिक अभी तक हिरण का शव बरामद नहीं किया जा सका है.
उनका ये भी मानना है कि संभवतः शिकारी हिरण का शिकार करने में नाकाम रहे हों.
आस्था से जुड़ा मामलाश्री जम्भेश्वर पर्यावरण एवं जीवरक्षा प्रदेश संस्था राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष रामरतन बिश्नोई ने फ़ोन पर बीबीसी को बताया, \"जानवरों की रक्षा करना हामरी आस्था से जुड़ा है. युवक की मौत से बिश्नोई समाज दुखी है. हम अभियुक्तों को जल्द से जल्द गिरफ़्तार किए जाने की माँग करते हैं.\"
रामरतन के मुताबिक वन और वन्य जीवों की रक्षा को आस्था का विषय मानने वाला बिश्नोई समाज शैतान सिंह की हत्या से आंदोलित है.
बिश्नोई समाज हिरणों की देखभाल करता है जिसकी वजह से इनकी संख्या ज़्यादा है जिस कारण इस इलाक़े में वन्य जीवों का शिकार आम बात है.
रामरतन मानते हैं कि यहां के स्थानीय लोग बाहरी शिकारियों की मदद भी करते हैं.
वे कहते हैं, \"स्थानीय लोगों की मदद से बाहरी लोग मनोरंजन और हिरण के माँस के लिए यहाँ शिकार करने आते हैं.\"
प्रतिबंधित है शिकाररामरतन बिश्नोई के मुताबिक राजस्थान में रोजाना एक-दो हिरण के शिकार के मामले सामने आते हैं लेकिन अधिकतर में कार्रवाई नहीं की जाती है.
बिश्नोई कहते हैं, \"सलमान ख़ान का मामला बेहद चर्चित है लेकिन उसमें भी न्याय नहीं हो पा रहा है. यदि उस मामले में अदालत न्याय कर देती तो शायद लोग शिकार करने से डरते.\"
बिश्नोई का आरोप है कि समुदाय तो हिरणों की रक्षा और सेवा के लिए प्रयत्नशील है लेकिन वन विभाग की मदद नहीं मिल पा रही हैं.
वे मानते हैं कि यदि सरकार सख़्त रवैया अख़्तियार करे तो इस तरह के मामले सामने न आए.
वे बताते हैं कि पिछले तीस साल में अब तक 17 लोग हिरण के शिकार को रोकते हुए अपनी जान गँवा चुके हैं.
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