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किसी को अपना एटीएम कार्ड दिया तो बैंक नहीं सुनेगा कोई शिकायत

एक कपल को 5 साल की लड़ाई के बाद भी नहीं मिले 25 हजार

Dainik Bhaskar

Jun 07, 2018, 06:44 PM IST
फाइल फाइल

  • प्रेग्नेंट थी पत्नी तो पैसे निकालने पति को भेजा था
  • रसीद कटी पर पैसे नहीं निकले तो पहुंचे थे बैंक के पास
  • बैंक ने कहा, पत्नी का एटीएम इस्तेमाल नहीं कर सकता पति

बेंगलुरु. बेंगलुरु में एक ऐसा मामला सामने आया है जहां एक पति को उसकी पत्नी का डेबिट कार्ड इस्तेमाल करना भारी पड़ गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक 14 नवंबर, 2013 को मराठाहल्‍ली में रहने वाली वंदना ने अपना डेबिट कार्ड और पिन पति राजेश कुमार को देकर 25 हजार रु निकालने को कहा था। राजेश एसबीआई एटीएम पहुंचे और कार्ड से पैसे निकालने के लिए पिन डाला। मशीन से एक स्लिप निकली, जिसमें लिखा था कि पैसा खाते से कट चुका है मगर नोट नहीं निकले। राजेश ने इसकी शिकायत बैंक में की, लेकिन बैंक ने जो दलील दी उसे सुनकर पति-पत्नी के होश उड़ गए।

- बैंक ने कहा, बैंक द्वारा दिया गया डेबिट/एटीएम कार्ड हस्तांतरणीय नहीं होता। इसका मतलब यह कि आपका कार्ड कोई और इस्‍तेमाल नहीं कर सकता। एसबीआई ने नियमों का हवाला दिया और कहा कि एटीएम उपयोगकर्ता खाताधारक नहीं था। इसी वजह से उनके दावे का खारिज किया जाता है।

कपल पहुंचा उपभोक्ता फोरम

- बैंक के जवाब के बाद वंदना ने बेंगलुर के उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम में 21 अक्‍टूबर, 2014 को अपील की। वंदना का आरोप था कि एटीएम ट्रांजेक्‍शन में गंवाए उसके 25,000 रु को रिफंड करने में एसबीआई नाकाम रहा है। उन्‍होंने कहा कि वह उसी समय मां बनी थीं और घर से बाहर नहीं जा सकती थीं, इसलिए उन्‍होंने पति को पैसे निकालने भेजा था। इसी दौरान आरटीआई के जरिए वंदना ने एक 16 नवंबर, 2013 की कैश वेरिफ‍िकेशन रिपोर्ट निकलवाई जिसमें दिखाया गया कि मशीन में 25,000 रु ज्यादा थे। यह रिपोर्ट दाखिल की गई जिसे एसबीआई के वकील ने दूसरी रिपोर्ट से काउंटर कर दिया, जिसमें कोई अतिरिक्‍त कैश नहीं दिखाया गया।

बैंक ने खुद को सही साबित कर दिया
कपल ने बैंक के लोकपाल के पास भी शिकायत की लेकिन बैंक से सपाट जवाब मिला- 'पिन साझा किया, मामला खत्‍म। बैंक ने कहा कि अपना एटीएम पिन किसी और से साझा करना नियमों का उल्‍लंघन है। मामला कोर्ट पहुंचा। केस करीब साढ़े तीन साल चला। बैंक ने लॉग रिकॉर्ड्स के जरिए दिखा दिया कि यह ट्रांजेक्‍शन सफल और तकनीकी रूप से सही था। 29 मई, 2018 को अपने फैसले में अदालत ने कहा कि वंदना को पैसे निकालने के लिए अपने पति को चेक या अधिकृत पत्र देना चाहिए था। कोर्ट ने मामला खारिज कर दिया।

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