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डाउनलोड करेंभोपाल. मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमए-एनआईटी) समेत देश के तमाम एनआईटी और आईआईईएसटी में फैकल्टी रिक्रूटमेंट में भेदभाव की जांच एक हाईपावर कमेटी करेगी। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एनआईटी और आईआईईएसटी के लिए पिछले साल बनाए गए रिक्रूटमेंट रूल-2017 की मनमानी व्याख्या से पैदा हुई विसंगतियों की जांच के लिए एक ओवरसाइट कमेटी का गठन किया है।
चार सदस्यीय इस कमेटी का अध्यक्ष एनआईटी कालीकट के डायरेक्टर डॉ. शिवाजी चक्रबोर्ती को बनाया गया है। जो प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती विवाद से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर एक माह में अपनी रिपोर्ट एमएचआरडी को देगी। इस कमेटी में एनआईटी इलाहाबाद के डायरेक्टर डॉ. राजीव त्रिपाठी, एनआईटी त्रिचरापल्ली के डायरेक्टर डॉ. मिनि शाजी थॉमस और एनआईटी सूरतकल (कर्नाटक) के रजिस्ट्रार रविंद्र नाथ को सदस्य व कनवीनर नियुक्त किया है।
ये हैं रिक्रूटमेंट रूल में दो बड़ी विसंगतियां
नियम जिनकी अलग-अलग व्याख्या के कारण पैदा हुई समस्या
नियम- 1
सभी नई भर्तियों में पीएचडी के साथ-साथ पूर्ववर्ती (प्रसीडिंग) डिग्रियों में प्रथम श्रेणी को अनिवार्य किया गया, जबकि इस नियम से पहले पूर्ववर्ती डिग्री में 55% से पास होना जरूरी था। मैनिट भोपाल ने प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए इंटरनल फैकल्टी को इस नियम से छूट दे दी। जबकि अन्य संस्थानों से आए उम्मीदवारों को छूट नहीं दी गई। इससे वे हायर स्केल वाली प्रोफेसर की पोस्ट की दौड़ से बाहर हो गए।
नियम-2
अध्यापन के अनुभव के लिए विख्यात संस्थान (इंस्टीट्यूट ऑफ रेप्यूट) शब्द परिनियम में शामिल किया गया। लेकिन इसकी परिभाषा स्पष्ट नहीं की गई। एनआईटी भोपाल, नागपुर, जयपुर ने खुद ही इंस्टीट्यूट ऑफ रेप्यूट की परिभाषा तय कर ली। जिसमें आईआईटी, आईआईएम और एनआईटी के केवल उन 100 संस्थानों को शामिल किया जो एनआईआरएफ द्वारा जारी रैकिंग सूची में थे। केंद्र व राज्य की तमाम यूनिवर्सिटी और कालेजों में जूनियर पे स्केल पर पढ़ा रहे अच्छे एकेडमिक रिकार्ड वाले सैकड़ो प्राध्यापक इस कारण कॉम्पटीशन से बाहर हो गए।
सभी एनआईटी को एक सप्ताह में बतानी होगी अपनी समस्याएं
एमएचआरडी ने सभी एनआईटी और आईआईईएसटी शिवपुर को निर्देश दिए हैं कि एक सप्ताह के अंदर वे रिक्रूटमेंट रूल-2017 से जुड़ीं विसंगतियों और अब तक सामने आए विवादों की जानकारी ओवरसाइट को भेज दें। गौरतलब है कि ओवरसाइट कमेटी सभी एनआईटी से रिक्रूटमेंट रूल की विसंगतियों पर राय भी लेगी। इस संबंध में हमने मैनिट के डायरेक्टर प्रो. एनएस रघुवंशी से भी बात की लेकिन उन्होंने इस विषय पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
शिकायत और आपत्तियों को सौंपा जा रहा कमेटी को
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी एके सिंह ने बताया कि एनआईटी और आईआईईएसटी के रिक्रूटमेंट रूल से जुड़ीं विसंगतियों की जांच के लिए एक ओवरसाइट कमेटी गठित की गई है। मैनिट समेत सभी एनआईटी में फैकल्टी रिक्रूटमेंट से जुड़ी सभी शिकायत और आपत्तियों को भी ओवरसाइट कमेटी को जांच के लिए सौंपा जा रहा हैं।
क्या है मामला - देशभर में एनआईटी संस्थानों में फैकल्टी के छह हजार पदों के लिए भर्ती चल रही है। रिक्रूटमेंट रूल-2017 की खामियों के कारण नियुक्ति में भेदभाव की शिकायतें भोपाल समेत देशभर से सामने आईं हैं।
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