पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंजोधपुर. गरीबों के नाम पर फर्जीवाड़ा कर 8 करोड़ रुपए का गेहूं घोटाले की आरोपी निलंबित आईएएस निर्मला मीणा ने 18 मई को भी एसीबी को जांच में सहयोग नहीं किया। जब एसीबी ने उससे महज पांच सवाल किए तो 8 घंटे में बार-बार उसका सिर चकरा जाता। पूछताछ के दौरान डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल गहलोत ने घोटाले के बारे महत्वपूर्ण जानकारियां शेयर की हैं। इस आधार पर एसीबी फिर से मीणा और गहलोत से आमने-सामने पूछताछ करेगी। गहलोत ने अपनी दुकानों का रिकाॅर्ड एसीबी को सौंप दिया है। इस आधार पर इस प्रकरण में एसीबी गहलोत को सरकारी गवाह बनाएगी।
नागरिक आपूर्ति एवं खाद्यान्न विभाग के बाबू शिवप्रकाश शर्मा ने जोधपुर से पत्र मिलने के बाद नोट शीट पर डिमांड लिखकर उच्चाधिकारियों को भेजने की बात मीणा के सामने कबूली। लेकिन मीणा ने जांच में सहयोग नहीं किया। मीणा की रिमांड अवधि पूरी होने के बाद शनिवार को एसीबी मामलात की अदालत में पेश किया, जिसके बाद कोर्ट ने रिमांड की अविध 22 मई तक बढ़ा दी। खादी एवं नागरिकता आपूर्ति विभाग जयपुर के सीनियर आरएएस अधिकारी मुकेश मीणा को एसीबी ने पूछताछ के लिए तलब किया है।
जांच अधिकारी मुकेश सोनी ने मीणा से प्रमुख 5 सवाल पूछे...
1 - गबन की राशि कहां गई ?
2 - आपको कितनी राशि मिली ?
3 - उसे कहां पर निवेश किया ?
4 - घोटाले में सहयोगी कौन थे ?
5 - जयपुर में उच्चाधिकारी कौन घोटाले में शामिल थे ?
हर सवाल का जवाब देने से पहले मीणा चुप्पी साध लेती या फिर कहती कि इसकी उसे जानकारी नहीं है। किन लोगों ने पूरे घोटाले को अंजाम दिया है, ये जयपुर में बैठे अफसरों को पता है। वहीं गबन की राशि के बारे में पूछने पर तो सीधा सिर ही दुखता था। वह चुप हो जाती और बीमार होने का बहाना बनकर रेस्ट करने का आग्रह करती। इस दौरान महिला एसआई व कांस्टेबल की भी मदद ली गई, बावजूद इसके मीणा ने मुंह नहीं खोला।
यह है मामला
तत्कालीन डीएसओ निर्मला मीणा पर आरोप है कि लगभग पैंतीस हजार क्विंटल गेहूं गलत तरीके से वितरित किया गया था। एसीबी ने अपनी जांच में पाया था कि तत्कालीन डीएसओ मीणा ने सिर्फ मार्च 2016 में तैंतीस हजार परिवार नये जोड़े और उच्चाधिकारियों को स्वयं की ओर से प्रेषित रिपोर्ट में अंकित कर 35 हजार 20 क्विंटल गेहूं अतिरिक्त मंगवा लिया था। नये परिवारों को ऑनलाइन नहीं किया गया। फिर मीणा ने आठ करोड़ रुपए का अतिरिक्त गेहूं का आवंटन करवा लिया। ठेकेदार सुरेश उपाध्याय व स्वरूपसिंह राजपुरोहित की आटा मिल भिजवा दिया था। करोड़ों रुपए का गबन की जांच के बाद राज्य सरकार ने आईएएस अधिकारी निर्मला मीणा को निलम्बित कर दिया था। बाद में आटा मील मालिक स्वरूपसिंह राजपुरोहित ने भी पूछताछ में कबूल किया था कि उसने 105 ट्रक में दस हजार पांच सौ 500 क्विंटल गेहूं काला बाजार में बेचा है।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.