पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंजोधपुर. 35 हजार क्विंटल गेहूं गबन के मामले में निलंबित आईएएस अफसर निर्मला मीणा की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। हाईकोर्ट ने मंगलवार को इस मामले में अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है। साथ ही कोर्ट ने लेडी पुलिस अफसर की मौजूदगी में ही याचिकाकर्ता से कस्टोडियल पूछताछ करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता मीणा की ओर से दायर याचिका पर तर्क देते हुए कोर्ट को बताया, कि याचिकाकर्ता पर गेहूं गबन का लगाया गया आरोप झूठा है। अगस्त 2015 में तत्कालीन जिला रसद अधिकारी महावीरसिंह राजपुरोहित जरूरतमंद और गरीब परिवारों को गेहूं वितरण करने में विफल रहा और जान-बूझकर 35016 क्विंटल गेहूं सरेंडर कर दिए।
- एजी राजेश पंवार व अधिवक्ता सुनील जोशी ने कहा, कि याचिकाकर्ताा मुख्य आरोपी है। लाभान्वित परिवारों की संख्या में कभी बढ़ोतरी नहीं हुई। राज्य सरकार के निर्देश थे, कि सितंबर 2015 से लाभान्वित परिवारों को नए राशनकार्ड के आधार पर ही गेहूं वितरित किया जाना है। कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए मीणा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की व लेडी पुलिस अफसर की मौजूदगी में ही कस्टोडियल पूछताछ करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट से याचिका खारिज होते ही एसीबी ने छापा मारा, मीणा के घर नोटिस चस्पां
अग्रिम जमानत खारिज होने पर एसीबी ने निर्मला मीणा की गिरफ्तारी के लिए छापे मारने आरंभ कर दिए। एसीबी ने पीडब्ल्यूडी कॉलोनी स्थित सरकारी आवास पर गई तो मीणा व उनके पति पवन कुमार मित्तल नहीं मिले। जांच अधिकारी ने उनके घर पर नोटिस चस्पां किया है जिसमें लिखा है कि इस मामले में उनसे व उनके पति, दोनों से अनुसंधान किया जाना है। दोनों को बुधवार सुबह 11 बजे एसीबी ग्रामीण चौकी में उपस्थित होना है।
अब आगे
हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद निर्मला मीणा के पास सुप्रीम कोर्ट का रास्ता बचा है। यहां भी सुनवाई में महीनों लग सकते हैं। यानी तब िनर्मला को फरार रहना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट से भी उम्मीद कम है।
कोर्ट ने इन आधार पर नहीं दी अग्रिम जमानत
कोर्ट ने कहा, कि याचिकाकर्ता के दो तर्क हंै। पहला तर्क, 22 फरवरी 2016 के पत्र द्वारा 35016 क्विंटल गेहूं की मांग किया जाना, जो अगस्त 2015 में तत्कालीन डीएसओ राजपुरोहित ने सरेंडर किया था। दूसरा तर्क, जोधपुर शहरी क्षेत्र में 33 हजार लाभान्वित परिवार बढ़ गए और इसलिए 35016 क्विंटल गेहूं की मांग की गई। अगर 33 हजार लाभांवित परिवार 63 हजार में पहले से शामिल थे तो फिर अगस्त 2015 में सरेंडर किए गए 35016 क्विंटल गेहूं की डिमांड कैसे की गई? कोर्ट ने कहा, कि दो तर्क साथ नहीं चल सकते, दोनों में एक अस्वीकार्य है।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.