पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

चेहरा छुपा कर इस IAS महिला ने किया सरेंडर, कबूला अपना जुर्म, सुसाइड करने की सोची, नोट भी लिख दिया, अब पति को बचाना चाहती है

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

जोधपुर. 6 बार जोधपुर की डीएसओ रही सीनियर आईएएस निर्मला मीणा को आखिरकार 16 मई को 8 करोड़ के गेहूं घोटाले केस में एसीबी के सामने सरेंडर करना पड़ा। मीणा ने खुद को बचाने के लिए हर जतन किए, मगर कोई काम नहीं आए। वह सुप्रीम कोर्ट तक गईं लेकिन मार्च में जब एसीबी के छापे पड़े और उसके घर से 10 करोड़ की 19 प्रॉपर्टी के कागजात मिले तो समझ आ गया कि अब वह बुरी तरह फंस गई हैं। आरोपी के बाद मीणा दिमागी रूप से बेहद कमजोर हो गई और उसने आत्महत्या करने की सोच ली। उसने सुसाइड नोट भी लिख दिया था। यह पत्र उसके पति ने देख लिया और वह उसे इलाज कराने अजमेर ले गया। फिर दोनों बच्चे जो बाहर पढ़ाई करते हैं, उन्हें भी बुला लिया।

 

- परिवार की हिम्मत मिलने के बाद उसने हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार किया, जब वह भी खिलाफ आया तो पति के साथ सुप्रीम कोर्ट तक दरवाजा खटखटाया।

- वहां भी वही हुआ जो निचली अदालतों में हुआ था। मजबूर होकर उसे सरेंडर करना पड़ा। अब वह अपने पति को बचाने का प्रयास कर रही है।

- सरेंडर करने वह वकील के साथ आई थीं, पति साथ नहीं था। एसीबी के दूसरे मुकदमे में पति भी आरोपी है, जब उसके बारे में पूछा तो मीणा ने कहा कि वह कहां है, उसे नहीं पता।

- वह रोते हुए गेहूं की कालाबाजारी कुबूल करने लगी और पति को छोड़ने की गुहार लगाती रही।

- एसीबी के एसपी अजयपाल लांबा ने बताया कि सरेंडर करने के बाद मीणा को पावटा सेटेलाइट अस्पताल ले जाकर मेडिकल कराया गया, फिर उदयमंदिर थाने भेज दिया।

 

चेहरा छुपा कर आईं, बेनकाब हुईं अब घोटाले की परतें भी खुल जाएंगी

- निर्मला मीणा ने सरेंडर किया तो वह पूरा चेहरा ढंके हुए थी। डीएसपी जगदीश सोनी और जांच अधिकारी मुकेश सोनी ने पूछताछ शुरू करने से पहले दुपट्टा हटाने को कहा तो उसने इनकार कर दिया।

- उसने किसी सवाल का जवाब भी नहीं दिया। बाद में एसपी अजयपाल लांबा पूछताछ करने पहुंचे तब भी कुछ नहीं बोली। थोड़ी सख्ती हुई तो मीणा ने दुपट्टा भी हटाया और कालाबाजारी भी कुबूल की।

 

ढाई घंटे में ही खत्म हो गई अफसरी

- डीएसपी के सामने कुर्सी पर बैठी मीणा को पानी ऑफर किया गया, उसने मना कर दिया। डीएसपी ने कहा, इसे अपना ही घर समझें, तो बोली मेरा घर यह कहां से हुआ? डीएसपी बोले कुछ दिन तो यही घर रहेगा।

- खामोश हो गई मीणा, थोड़ी देर में गिलास उठाया, थाेड़ा नकाब हटाया और पानी पिया। सवालों का दौर शुरू किया तो जवाब नहीं दिया। एसपी ने भी पूछा, फिर भी नहीं बोलीं।

- एसआई सुमन को भीतर बुलाकर एसपी ने कहा कि सच बता दो, नहीं तो यह अपने तरीके से पूछताछ करेगी। इतने में पूरी अफसरी खत्म हो गई, नकाब हटाकर रोने लगी और हर जुर्म कुबूल करती गई।

 

कचौरी खाई, मिठाई का पूछा तो बोली- गिरफ्तारी की मिठाई? 
- जोधपुर में हर वीवीआईपी विजिट के दौरान खाने व नाश्ते का इंतजाम करने वाली डीएसओ मीणा की एसीबी ने भी खातिरदारी करने में कोई कमी नहीं छोड़ी।

- पूछताछ लंबी चलने वाली थी और वह दोपहर में ही आ गई थी इसलिए नाश्ता मंगवाया गया। मीणा से पूछा कि वह नाश्ते में क्या लेंगी तो पहले उसने कुछ भी खाने से इनकार कर दिया।

- कहा गया कि अब घर तो जाना नहीं है, तो बोली कि प्याज की कचौरी खाएंगी। कचौरी मंगवाई गई। इस बीच मीठे में क्या लेंगी? पूछा तो बोली कि उसकी गिरफ्तारी की मिठाई है क्या? 

 

पहली महिला आईएएस होगी जेल की मेहमान  
जोधपुर सेंट्रल जेल में भंवरी अपहरण व हत्या मामले के आरोप में पूर्व मंत्री मदेरणा, पूर्व विधायक मलखानसिंह विश्नोई बंद रहे हैं। मलखानसिंह अजमेर शिफ्ट हैं, मदेरणा व इंद्रा विश्नोई यहीं हैं। इसी जेल में सलमान खान कुछ दिन बिता चुके हैं और आसाराम पिछले साढ़े चार साल से बंद है। वैसे तो भ्रष्टाचार के मामलों में आरएएस, आरएमएस व कई इंजीनियर तथा जेडीए के पूर्व चेयरमैन राजेंद्र सोलंकी, जेएनवीयू शिक्षक भर्ती केस में पूर्व कुलपति बीएस राजपुरोहित व पूर्व विधायक जुगल काबरा भी जेल जा चुके हैं, मगर निर्मला मीणा पहली महिला आईएएस होंगी जो इस जेल की मेहमान बनेगी। 

 

वह सब कुछ जो अाप जानना चाहते हैं

- केस क्या: मीणा ने महज 15 दिन के खेल में 8 करोड़ का गेहूं बाजार में बेच दिया। मार्च 2016 में उसने जयपुर रसद विभाग को तीन लाइन की चिट्‌ठी लिखी कि शहर में 33 हजार परिवार बढ़ गए हैं इसलिए 35 हजार क्विंटल अतिरिक्त गेहूं दिया जाए।

- यह गेहूं 7 लाख परिवारों में बंट सकता था, मगर उसे आटा मिलों को बेच दिया गया। हकीकत में तो इतने बीपीएल परिवार बढ़े ही नहीं थे, सितंबर 15 में पोस मशीनें लागू हुईं तब तक 35 हजार क्विंटल गेहूं आता था, मगर राशन कार्ड के सत्यापन व शुद्धीकरण में 33 हजार राशन कार्ड ही फर्जी निकले थे, इसलिए यह संख्या कम कर दी थी। परंतु मीणा ने चार्ज लेते ही इन्हीं लोगों का फिर से गेहूं आवंटित करवा कर बेच दिया।  

 

कोर्ट के दांव
- पांच माह पहले यह केस दर्ज हुआ था। गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालतों में अग्रिम जमानत लगाती रहीं। एसीबी कोर्ट से खारिज होने पर जनवरी में हाईकोर्ट गई।

- चार जजों ने सुनवाई की, उस समय गिरफ्तारी पर रोक लग गई। हाईकोर्ट ने 17 अप्रैल को अग्रिम जमानत खारिज की तो वह सुप्रीम कोर्ट चली गईं। आखिर में 10 मई को सुप्रीम कोर्ट ने भी उसे अग्रिम जमानत नहीं दीं।  

 

रिमांड क्यों 
- एसीबी मीणा का कस्टोडियल इंटेरोगेशन चाहती थी। गबन की राशि कहां खपाई है, यह पूछना है। क्योंकि छापों के दौरान उसके यहां करीब 10 करोड़ की प्रोपर्टी के कागजात मिले हैं।

- इसी आधार पर 12 मई को मीणा व उसके पति पवन मित्तल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज हुआ है। प्रोपर्टी खरीद के लिए पैसों का सोर्स भी पता लगाना है।   

 

फरारी में कहां 
- चार महीनों से चल रहे लुका-छिपी के खेल में मीणा दो माह तक गैर हाजिर होकर फरार रहीं। इस दौरान एसीबी छापे मारती रही तब वह जयपुर, जोधपुर, अजमेर व उदयपुर में इधर-उधर छुपती रहीं।

- सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद वह पांच दिन तक नोएडा में रहीं और बुधवार सुबह जोधपुर पहुंचीं। पहले अपने सरकारी घर गईं, फिर दोपहर में सरेंडर कर दिया।