आईसीएआर दल ने गेहूं फसल शोध कार्यक्रमों की समीक्षा की
रांची केंद्र के बीएयू में गेहूं फसल का प्रदर्शन काफी संतोषजनक है। यह बात आठ सदस्यीय आईसीएआर के वार्षिक समीक्षा दल के अध्यक्ष डॉ सीएम शर्मा ने कही। उन्हाेंने कहा कि कम अवधि एवं सिंचाई में अधिक पैदावार हाे सके एेसी तकनीक के विकास के लिए यह परियाेजना चल रही है। उन्हाेंने कहा कि राज्य में गेहूं की फसल पर राेग एवं कीट का प्रकाेप कम हाेना काफी सकारात्मक पहलू है। उन्हाेंने बेहतर पैदावार के लिए खर पतवार के अच्छे प्रबंधन करने का सुझाव िदया।
उन्हाेंने बीएयू के छह एकड़ भूमि में चल रहे गेहूं शोध प्रक्षेत्रों का निरीक्षण करने के बाद वैज्ञानिकों से बाेल रहे थे। इस माैके पर निदेशक अनुसंधान डॉ. डीएन सिंह ने बताया कि राज्य में करीब दो लाख हेक्टेयर भूमि में गेहूं की खेती हाे रही है। उन्हाेंने पौधा प्रजनकाें को सीमित सिंचाई एवं देर से बुवाई वाली बेहतर उपज देने वाली किस्मों को विकसित करने की जरूरत बतायी। उन्हाेंने दाे-तीन सिंचाई एवं 110 दिनों की अवधि में बेहतर पैदावार देने वाली किस्मों को विकसित किये जाने की जरूरत बतायी। उन्हाेंने बताया कि 120 दिनों की अवधि एवं 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज देने वाली बीएयू द्वारा विकसित किस्म बिरसा गेहूं -3 को प्रदेश के लिए उपयुक्त पाया गया है।
झारखंड में गेहूं उत्पादन अच्छा रहने के आसार
मौसम के उतार-चढ़ाव के बीच असमय हुई बारिश और ओलावृष्टि से दलहन और तिलहन की फसलों को नुकसान हुआ है, लेकिन गेहूं का उत्पादन अच्छा रहने की संभावना कृृषि विशेषज्ञ बता रहे हैैं। फरवरी और मार्च में कई बार बारिश होने से गेहूं की सिंचाई खूब हुई है।