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डाउनलोड करेंस्पोर्ट्स डेस्क. क्रिकेट की दुनिया में होने वाले हर मैच से पहले टॉस के जरिए यानी सिक्का उछालकर ये तय किया जाता है कि कौन सी टीम पहले बैटिंग या फील्डिंग करेगी, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में टॉस की इस 141 साल पुरानी परंपरा को बंद करने पर विचार हो रहा है। ईएसपीएन क्रिकइंफो की खबर के मुताबिक, आईसीसी मैच से पहले होने वाले टॉस को बंद करने के बारे में विचार कर रही है। इस बारे में मुंबई में इस महीने के आखिर में होने वाली क्रिकेट कमेटी की मीटिंग में बात की जाएगी। अगर इस बात पर सहमति बन जाती है तो 2019 में शुरू होने वाली वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप से टॉस को खत्म कर दिया जाएगा।
- टेस्ट क्रिकेट में टॉस की परंपरा 141 साल पुरानी है। इसके बंद करवाए जाने के पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि इससे टेस्ट चैम्पियनशिप में घरेलू टीम को अपने मैदान का एडवांटेज मिलता है।
- टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत साल 1877 में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच मेलबर्न के एमसीजी ग्राउंड में हुए मैच से हुई थी। तब से मैच से पहले सिक्के को उछालकर ये तय किया जाता है कि कौन सी टीम पहले बैटिंग करेगी और कौन सी टीम पहले फील्डिंग करेगी।
- टॉस में घरेलू कप्तान सिक्का उछलता है और मेहमान कप्तान हेड या टेल मांगता है। उधर, टॉस के विरोध में बोलने वाले लोगों का कहना है कि इससे मेजबानी करने वाली टीम को फायदा मिलता है और इसके लिए खराब पिच बनाने के मामले सामने आते हैं और टॉस की वैल्यू कम हो जाती है।
- टॉस की बजाय मेहमान टीम को बैटिंग या बॉलिंग चुनने का ऑप्शन दिया जा सकता है। ऐसा होने पर न्यूट्रल विकेट बनने की संभावना ज्यादा हो जाएगी।
- आईसीसी क्रिकेट समिति में पूर्व भारतीय कप्तान अनिल कुंबले के अलावा एंड्रू स्ट्रॉस, माहेला जयवर्धने, राहुल द्रविड़, टिम मे, न्यूजीलैंड क्रिकेट के मुख्य कार्यकारी डेविड वाइट, अंपायर रिचर्ड केटेलबोरोग, आईसीसी मैच रेफरी प्रमुख रंजन मदुगले, शॉन पोलाक और क्लेरी कोनोर शामिल हैं।
- अनिल कुंबले की अध्यक्षता वाली इस कमेटी के कुछ सदस्य टेस्ट क्रिकेट से टॉस को विदाई देने के फेवर में हैं।
- आईसीसी की क्रिकेट समिति की बैठक मई के आखिरी में मुंबई में होनी है और उससे पहले इस तरह के नोट्स सामने आ रहे हैं कि टॉस को खत्म करने के बारे
में सोचा जा सकता है।
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