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डाउनलोड करेंरायपुर. राजधानी में फैलते पीलिया रोकने के लिए कई तरह के उपायों के बाद अब प्रशासन ने शहर की बर्फ फैक्ट्रियों पर शिकंजा कस दिया है। दो दिन से बर्फ फैक्ट्रियों में चल रही छापेमारी के बाद नगर निगम के दस्तों ने खुलासा किया कि शवों और मछलियों को सुरक्षित रखने के लिए बनाई जाने वाली बर्फ को ही शहर में समारोहों तथा बर्फ की रेहड़ी वालों को बेचने के सबूत मिले हैं।
सभी जगह से छापेमार दस्तों ने बर्फ बनाने के लिए इस्तेमाल पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे हैं। जबकि विशेषज्ञों और डाक्टरों का दावा है कि इन फैक्ट्रियों में तापमान कम रहने की वजह से पानी में इकोलाई बैक्टीरिया मिलता ही है। शहर में अब तक पीलिया के 400 से ज्यादा मरीज मिल चुके हैं। निगम अफसरों और डाक्टरों का दावा है कि तेजी से पीलिया फैलने के पीछे ऐसी बर्फ के गोले और शर्बत भी बड़ी वजह हैं।
नगर निगम ने बुधवार को अश्विनी नगर व भाठागांव में गंदे पानी से बर्फ बनाने वाली दो फैक्ट्री को सील किया। इनमें से भाठागांव स्थित अन्नपूर्णा बर्फ फैक्ट्री में बर्फ का उपयोग आइस्क्रीम के लिए किया जा रहा था। यहां भारी मात्रा में आइस्क्रीम के सांचे व स्टिक मिले हैं। अश्विनी नगर के बॉबी बर्फ कारखाने में न सिर्फ गंदगी मिली, बल्कि यहां भी बर्फ के सांचे काफी गंदे थे। इसके बाद जोन कमिश्नर हेमंत शर्मा ने दोनों कारखानों को सील कर दिया।
प्रशासन अब यह पता लगा रहा है कि ऐसी बर्फ किस नेटवर्क से रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए सप्लाई की जा रही है। क्योंकि छापेमारी में अफसरों को यह भी पता चला है कि फैक्ट्रियों से निकली बर्फ का उपयोग पूरे शहर में गन्ना रस, लस्सी, फलों के जूस और आइस्क्रीम के अलावा बरफ के गोले और शर्बत के लिए हो रहा है। जबकि यहां बनी बर्फ केवल बाहरी इस्तेमाल की गुणवत्ता वाली होती है, क्योंकि जिस पानी से बर्फ बनाई जा रही है, उसकी जांच और शुद्धता का कोई सिस्टम नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार तापमान कम होने के कारण बर्फ फैक्ट्रियों में इकोलाई बैक्टीरिया भी पनपता है। जंग लगे सांचे से इंफेक्शन का खतरा और बढ़ गया है।
राजधानी में ही जांच, बर्फ दूषित हुई तो कड़ी कार्रवाई
- फैक्ट्रियों से लिए गए बर्फ के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।
- मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में जांच हो रही है।
- बर्फ में इकोलाई बैक्टीरिया तथा दूसरे वायरस मिल सकते हैं।
- पीलिया यानी हेपेटाइटिस-ए, ई ऐसे ही दूषित पानी से फैलता है।
बांटी क्लोरीन गोली, ओआरएस : सीएमओ कार्यालय में नोडल अधिकारी डॉ. आरके चंद्रवंशी ने बताया कि पीलिया प्रभावित क्षेत्रों में क्लोरीन टेबलेट व आेआरएस के पैकेट बांटे जा रहे हैं। जल विभाग के अध्यक्ष नागभूषण राव यादव का कहना है कि पीलिया प्रभावित इलाकों में साफ पानी दे रहे हैं। जरूरत के हिसाब से पाइप लाइन भी बदली जाएगी।
कांपा, मोवा में बढ़े मरीज
राजधानी के कांपा, मोवा, चंगोराभाठा, रामकुंड, सदरबाजार में पीलिया के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने शिविर लगाकर 1322 लोगों की जांच की है। इसके अनुसार अभी तक 418 पीलिया के संदिग्ध मरीज मिले हैं। इनमें 200 से ज्यादा मरीजों का बिलीरुबीन बढ़ा हुआ मिला है। इसके अलावा दूसरे वार्डों में भी थोक में पीलिया के मरीज मिल रहे हैं। आरडीए कॉलोनी हीरापुर की एक गर्भवती महिला इलाज के लिए अंबेडकर अस्पताल पहुंची थी। दो साल पहले आरडीए कॉलोनी में 500 से ज्यादा लोगों को पीलिया हुआ था। दो की मृत्यु भी हो गई, तब नई पाइप लाइन बिछाई गई थी और संपवेल की सफाई करवाई गई थी। लेकिन वहां अब भी पीने का साफ पानी सप्लाई नहीं हो पा रहा है।
इस बर्फ में बैक्टीरिया-वायरस
अंबेडकर अस्पताल के एसोसिएट प्रोफेसर मेडिसिन डॉक्टर आरएल खरे ने बताया कि दूषित बर्फ में कई तरह के बैक्टीरिया और वायरस रहते हैं। यह बर्फ सेहत के लिए खतरनाक है। हेपेटाइटिस ए व ई खाने-पीने व दूषित पानी से फैलता है। अंबेडकर में इसके मरीज आ रहे हैं। अगर बर्फ के सांचों में गंदगी है तो संक्रमण का खतरा और जाता है।
खाने के लिए सप्लाई : कमिश्नर
नगर निगम के कमिश्नर रजत बंसल ने बताया कि जहां भी दूषित पानी से बर्फ बनाई जा रही है, उन फैक्ट्रियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहे हैं। पता चला है कि यही बर्फ खाने के लिए भी सप्लाई हो रही है। बर्फ के सांचे भी गंदे मिल रहे हैं। जोन कमिश्नर रोज इसकी जांच भी कर रहे हैं।
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