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आइडिया-वोडाफोन डील को कानूनी प्रक्रिया पूरी होते ही मंजूरी मिल जाएगी: टेलीकॉम मिनिस्टर

दूरसंचार विभाग वोडाफोन से बकाया 4,700 करोड़ रुपए की मांग कर सकता है।

Dainik Bhaskar

Jul 03, 2018, 03:25 PM IST
Idea Voda deal clearance after DoT completes statutory process

नई दिल्ली. आइडिया-वोडाफोन के मर्जर में सरकार की ओर से कोई रुकावट नहीं है। कानूनी औपचारिकताएं पूरी होते ही इसे मंजूरी दे दी जाएगी। दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा ने ये बात कही है। उन्होंने कहा कि विलय और अधिग्रहण के लिए दूरसंचार विभाग के कुछ नियम हैं जिनके पूरा होने के बाद आइडिया-वोडाफोन डील की मंजूरी में एक सैकंड की भी देरी नहीं की जाएगी। जून के मध्य में डील को दूरसंचार विभाग की मंजूरी मिलने और 30 जून तक इसके पूरे होनी की उम्मीद थी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। सूत्रों के मुताबिक इसकी वजह ये बताई जा रही है कि दूरसंचार विभाग वोडाफोन से 4,700 करोड़ रुपए की मांग करने के बारे में सोच रहा है।

साल 2015 में वोडाफोन ने अपनी चार कंपनियों वोडाफोन ईस्ट, वोडाफोन साउथ, वोडाफोन सेल्युलर और वोडाफोन डिजिलिंक का विलय कर वोडाफोन इंडिया बनाई थी। उस वक्त दूरसंचार विभाग ने वन टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज के 6,678 करोड़ रुपए चुकाने के लिए कहा था। वोडाफोन ने इसे कोर्ट में चुनौती दी। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वोडाफोन ने डील की मंजूरी हासिल करने के लिए सिर्फ 2,000 करोड़ का भुगतान किया। दूरसंचार विभाग अब उस बकाया राशि का भुगतान चाहता है। ये मांग 2,100 करोड़ रुपए की उस डिमांड से अलग होगी जो वन टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज के तौर पर आइडिया से मांगी जाएगी।

मर्जर के बाद बनेगी देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी: आइडिया-वोडाफोन मर्जर के बाद नई कंपनी का नाम वोडाफोन आइडिया लिमिटेड होगा लेकिन इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी लेनी होगी। माना जा रहा है कि वोडाफोन आइडिया लिमिटेड 40 करोड़ मोबाइल उपभोक्ताओं और 41% रेवेन्यू मार्केट शेयर के साथ पहले ही दिन से देश की सबसे बड़ी कंपनी होगी। इसमें वोडाफोन के पास 45.1% और आइडिया के पास 26% शेयर रहेंगे। 28.9% होल्डिंग आइडिया के शेयरधारकों के पास रहेगी। भारती एयरटेल फिलहाल देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है।

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