जल बचेगा तो बचेगी जिंदगी, प्रबंधन जरूरी

News - जल बचाएंगे तो ही बचेगी जिंदगी, इसलिए इसका प्रबंधन जरूरी है। ये बातें इंजीनियरिंग भवन डोरंडा में हुए दो दिनी...

Nov 11, 2019, 07:26 AM IST
जल बचाएंगे तो ही बचेगी जिंदगी, इसलिए इसका प्रबंधन जरूरी है। ये बातें इंजीनियरिंग भवन डोरंडा में हुए दो दिनी राष्ट्रीय सेमिनार में उभरकर सामने आई। जिसका समापन रविवार को हुआ। सेमिनार का विषय, भूजल का कृत्रिम पुनर्भरण और जल प्रबंधन में इसकी भूमिका था। अंतिम दिन 10 पेपर पढ़े गए। हर वक्ता ने जल के महत्व पर विचार रखे। वहीं उनके संरक्षण पर बल दिया। वाटर मैनेजमेंट फोरम के अध्यक्ष और विभागीय सचिव गुजरात सरकार ई. एमपी रावल ने जल प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रयास किए जाने पर बल दिया। कहा कि जल बिना जीवन सूना है। हर व्यक्ति को इसके संरक्षण के बारे में न महज सोचना बल्कि उपाय करने होंगे। ई. वाई नारायण ने रांची में भूगर्भ जल के बारे में बताते हुए संरक्षण के उपाय सुझाए। श्वेताभ कुमार ने पेयजल और स्वच्छता विभाग की ओर से की जा रही कोशिशों को बताया। सेमिनार में 150 प्रतिनिधियों ने हिस्स लिया। सेमिनार में दी इंस्टीट्यूट आॅफ इंजीनियर्स झारखंड के अध्यक्ष ई. सिया रंजन कुमार सिंह, सचिव ई. जितेंद्र कुमार, संयोजिका ई. शिल्पी रंजन, झारखंड राय यूनिवर्सिटी के विभागाध्यक्ष सिविल एनके राय, भूगर्भ जल संरक्षण के उपनिदेशक पीवी गिरि, मलय कुमार आचार्य, कोलकाता, कर्नाटक के बीएस श्रीनिवास, उज्जवल कुमार बनारस, रोनित मुडगिली जमशेदपुर ने भी संबोधित किया।

क्या है भूजल पुनर्भरण

भूजल पुनर्भरण (ग्राउंड वाटर रिचार्ज या डीप ड्रेनेज) एक जल वैज्ञानिक तकनीकी प्रक्रिया है। जिसमें वर्षा जल को सतह से गहराई में ले जाया जाता है। पुनर्भरण का कार्य बहुत सीमा तक प्राकृतिक रूप से भी होता है। किन्तु आधुनिक जीवन को ध्यान में रखते हुए अब इसे कृत्रिम रूप से करने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसके लिए अनेक प्रकार की विधियां विकसित की गई हैं।

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