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पानी आधा पीकर ना छोड़ें, खड़े-खड़े भी ना पीएं, इससे हो सकती हैं कफ या दिमाग से जुड़ी बीमारियां

ऋग्वेद सहित पुराणों और स्मृति ग्रंथों में पानी के इस्तेमाल से जुड़ी सावधानियों के बारे में बताया गया है।

Danik Bhaskar | Jul 12, 2018, 04:33 PM IST
ऋग्वेद सहित पुराणों और स्मृति ग्रंथों में पानी के इस्तेमाल से जुड़ी सावधानियों के बारे में बताया गया है। इन ग्रंथों के अनुसार जल का अपमान करने से दोष लगता है। अगर बेवजह पानी बहाया जाता है। पानी आधा पीकर छोड़ दिया जाता है या किसी को अपना जूठा पानी पिलाया जाता है तो उससे दोष लगता है। पानी के अपमान से कुंडली में चंद्रमा बुरे फल देता है, जिसे चंद्र दोष कहा जाता है। इससे कई तरह की बीमारियां भी होने की आशंका रहती है क्योंकि कुंडली में चंद्रमा का अशुभ प्रभाव होगा तो वो पानी, दिमाग और कफ से जुड़ी बीमारियां होती हैं। पानी का उपयोग सावधानी से करना चाहिए। कई लोग जाने अनजाने में जल का अपमान कर देते हैं। इन गलतियाें के कारण उनको जल का दोष लगता है।
1. महाभारत में जल के महत्व को बताया है। वहीं ऋग्वेद में भी जल देवता वरुण की स्तुति की गई है। इन ग्रंथों के अनुसार पानी को फालतू नहीं बहाना चाहिए। इससे चंद्रमा और जल का दोष लगता है। जिसकी वजह से पानी की कमी या अधिकता से कोई बीमारी भी होती है। वहीं चंद्रमा के दोष के कारण तनाव, डर और पागलपन जैसी मानसिक समस्याएं होने लगती हैं।
2. कई लोग खड़े रहते हुए पानी पीते हैं, लेकिन स्कंद और ब्रह्मपुराण के साथ धर्मसिंधु के अनुसार ऐसा नहीं करना चाहिए। खड़े-खड़े पानी पीने से कमर के नीचले हिस्सों में बीमारियां होती हैं।
3 .एक बार पीने के बाद बचा हुआ पानी अशुद्ध माना गया है। यानी आप गिलास या बोतल में उतना ही पानी लें जितना आप पी सकें। बचा हुआ पानी कोई दूसरा पिए तो आपको और उस व्यक्ति दोनों को इसका दोष लगता है। दोष के कारण मानसिक रोग हो सकते हैं।
4. बाएं हाथ (Left hand) से पानी नहीं पीना चाहिए पाराशर स्मृति और ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार इस तरह पीया गया पानी शराब के समान हो जाता है और उसका दोष लगता है। जिससे बढ़ती उम्र में पानी से संबंधी रोग हो सकते हैं।