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डाउनलोड करेंइंदौर. वाॅट्स एप ग्रुप बनाकर अफवाह फैलाने और कश्मीर में आतंकियों की मदद करने के मामले अकसर सामने आते रहे हैं। इंदौर में वाॅट्स एप ग्रुप के जरिए चाइल्ड पोर्नोग्राफी फैला रहे अपराधियों के खुलासे ने इस ऐप के दुरुपयोग का एक और मामला सामने ला दिया है। गूगल, याहू जैसे सर्च इंजनों पर कड़ी निगरानी के चलते पोर्नोग्राफी इंडस्ट्री अब वॉट्स एप की प्रोग्रामिंग से जुड़ी खामियों और नियमों की कमी का फायदा उठा रही है। इसके चलते चोरी के मोबाइल डाटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करने वाली चैट-बोट तकनीक से महज एक लैपटॉप का उपयोग कर हजारों लोगों को वॉट्स एप ग्रुप से जुड़ने की लिंक भेजी जा सकती है। लिंक पर टच करते ही आप अनजान ग्रुप के सदस्य बन जाते हैं। जानकारी के अभाव में कई लोग अनजाने में भी अपराधी के दायरे में आ रहे हैं।
एक ही नंबर से अनगिनत वॉट्स एप ग्रुप बनाए जाने पर नहीं है रोक
दरअसल, अभी इस एप में सिर्फ एक मोबाइल नंबर का उपयोग कर उसके जरिए अनगिनत वॉट्स एप ग्रुप बनाए जाने पर कोई रोक नहीं है। फेसबुक, वाॅट्स एप मैसेज के रूप में आई इस टाइनी-लिंक से यह पता नहीं चलता कि यह किसी ग्रुप से जोड़ने वाली लिंक है। इसे टच करते ही आप एक अनजान ग्रुप के सदस्य बन जाते हैं। यही नहीं, इस लिंक को बड़ी आसानी से किसी को फॉरवर्ड किया जा सकता है और इसे टच करते ही वह भी ग्रुप में जुड़ जाएगा। ऐसे में जब मोबाइल नंबरों का डाटा चंद रुपयों में बड़ी आसानी से उपलब्ध है, ऐसे में इस एप के दुरुपयोग का खतरा और भी बढ़ गया है।
ऑटोमैटिक डाउनलोड बंद रखें
सेटिंग में जाकर सभी तरह के मीडिया ऑटोमैटिक डाउनलोड का ऑप्शन बंद कर दें, जब तक जाने पहचाने स्रोत से लिंक ना भेजी गई हो, तब तक फेसबुक मैसेंजर, वाॅट्स एप, हाईक जैसे मैसेंजर एप से आई किसी भी लिंक पर क्लिक ना करें।
एप एड्रेस को गूगल पर टाइनी-लिंक में बदल सकते हैं
1. आम तौर पर जब किसी को ग्रुप में जोड़ने के लिए लिंक भेजी जाती है तो उसका एड्रेस काफी बड़ा होता है। और एड्रेस को थोड़ा सा भी ध्यान से देखने पर समझ में आ जाता है कि यह वाॅट्स एप से जुड़ा हुआ कोई मैसेज है ।
2. किसी भी ग्रुप के एड्रेस को गूगल का उपयोग कर उसे टिनी-लिंक में बदल दिया जाता है । क्योंकि बहुत छोटा होता है। यही नहीं इस लिंक के साथ कोई आकर्षक मैसेज भी लिख दिया जाता है, जैसे एक क्लिक कर रितिक रोशन से मिलें, क्लिक कर जीतें 500 रुपए आदि। लिंक पर टच करते ही आप ग्रुप से जुड़ जाते हैं। यदि आपने एक में ऑटोमैटिक डाउनलोड का ऑप्शन बंद नहीं कर रखा है तो ग्रुप में भेजी गई सारी सामग्री अपने आप आपके फोन में सेव हो जाएगी।
एक्सपर्ट बोले : इस तरफ ध्यान दे ट्राई
साइबर एक्सपर्ट अपूर्व भारद्वाज के मुताबिक एक ही नंबर से मनचाहे संख्या में ग्रुप बनाए जा सकते हैं। ट्राई को इस पर नियम बनाना चाहिए। इसी तरह जब किसी अंजान नंबर पर कोई वॉट्स एप मैसेज भेजा जाता है तो उसके लिए परमिशन का भी प्रावधान जरूरी है । यही नहीं ग्रुप में जॉइन होने के लिए अंजान नंबर से जो टिनी लिंक भेजी जाती है, उसे क्लिक करने से हम सीधे ग्रुप में जुड़ जाते हैं, जबकि ग्रुप में जोड़ने से पहले वाॅट्स एप को हम से परमिशन लेने का ऑप्शन होना चाहिए। इस कमी का सबसे ज्यादा दुरुपयोग मार्केटिंग कंपनियां और पोर्नोग्राफी इंडस्ट्री कर रही है । प्रोग्रामिंग की इन खामियों पर ट्राई को ध्यान देना चाहिए।
चाइल्ड पोर्नोग्राफी का 1 ग्रुप भारत का, एडमिन गुजरात का निकला
वाॅट्स एप के जरिए चाइल्ड पोर्नोग्राफी को फैलाने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह के तीन लोगों की गिरफ्तारी के बाद अब साइबर सेल इनके ग्रुप से जुड़े उन लोगों की तलाश कर रही है जो बच्चों के अश्लील वीडियो को अन्य ग्रुप में चला चुके थे। सेल ने सभी राज्यों के बड़े पुलिस अधिकारियों और सीबीआई को भी घटना को लेकर एक पत्र भेजा है, जिसमें इस तरह के वीडियो शेयर करने वाले लोगों की लिंक व जानकारी का उल्लेख किया है। अब संयुक्त रूप से सभी राज्यों की पुलिस टीमें इस बड़े रैकेट में गंभीरता से इनवेस्टिगेशन शुरू कर चुकी हैं। जिला साइबर सेल के एसपी जितेंद्र सिंह ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी को वाॅट्स एप के जरिए प्रचार प्रसार कर रहे आरोपियों में अधिकांश वाॅट्स एप ग्रुप के सदस्यों की जो जानकारी हमने निकाली है, उनमें ज्यादातर लोग उत्तर पूर्व व दक्षिण भारत के हैं। जिन राज्यों में इनके सदस्य सक्रिय हैं, उन राज्यों की पुलिस को हमने पत्र लिखकर इस दिशा में गंभीरता से कार्रवाई करने के लिए अलर्ट किया है।
वहीं गिरफ्तार आरोपी मकरंद सालुंके (24) निवासी श्रीराम नगर (महू), ओंकार सिंह राठौर (43) निवासी नया बाजार ग्राम दसाई (धार) और इनके नाबालिग साथी से हुई पूछताछ में एक नए ग्रुप की भी जानकारी सामने आई है। इस ग्रुप को लेकर जब टीम ने पड़ताल की तो पता चला कि ये इंडिया में ही क्रिएट हुआ है और इसका एडमिन गुजरात के एक शहर का है। ग्रुप के एडमिन के नंबर के आधार पर गुजरात पुलिस को भी जानकारी भेजी है। जल्द ही गुजरात पुलिस भी आईटी एक्ट की धारा 67 बी में केस दर्ज कर सकती है।
बदल रहे एडमिन
चाइल्ड पोर्नोग्राफी के ग्रुप लगातार एडमिन बदल-बदल कर नए ग्रुप क्रिएट कर रहे हैं। इसके लिए कई शहरों की साइबर सेल की टीम और क्राइम ब्रांच की टीम को भी अलर्ट किया गया है, वहीं ऐसे ग्रुप पर नजर रखी जा रही है जो चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़े फोटो और वीडियो शेयर कर रहे हैं।
कोई भी अश्लील वीडियो शेयर नहीं करें
एसपी जितेंद्र सिंह ने बताया कि बच्चों के अश्लील वीडियो शेयर करने के मामले में आईटी एक्ट में कठोर सजा के प्रावधान हैं। धारा 67 बी के तहत कोई भी बच्चों से जुड़े अश्लील चित्र, साहित्य, सामग्री या फिर वीडियो देखता, सर्च करता या फिर किसी को भेजता है तो वह आरोपी बन सकता है। इसलिए इस तरह के वीडियो शेयर करने के बजाय डिलीट कर दें। भेजने वाले को भी अलर्ट करें। अन्यथा किसी की भी शिकायत मिलने पर उस पर सख्त एक्शन लिया जाएगा।
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