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डाउनलोड करेंपटना. राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि बिहार की कला व संस्कृति की विरासत अत्यंत समृद्ध और गौरवपूर्ण है। पटना कलम और मधुबनी पेंटिंग की परंपरा बिहार में काफी समृद्ध रही है। मंगलवार को राजभवन के राजेंद्र मंडप में फोटोग्राफी प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने कहा कि राजभवन में संगीत, कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम आगे भी आयोजित होते रहेंगे। उन्होंने प्रदर्शनी में शामिल सभी 23 कलाकारों की प्रतिभा एवं परिश्रम की सराहना की और उज्जवल भविष्य की कामना की।
भगवान बुद्ध, महावीर, छठ पूजा, अशोक स्तंभ, राजगीर का स्तूप, नालंदा खंडहर, महाबोधि मंदिर, बोधगया एवं मनेर शरीफ के साथ बिहार की लोक संस्कृति को भी अपनी कलाकृति का केंद्र बनाया है। अनूपचंद की भगवान बुद्ध और बौद्ध दर्शन, अनिल बिहारी की सीताराम की आधुनिक मानवता को संदेश, राजू श्रीवास्तक की जे पी आंदोलन की सिंहासन खालो करो कि जनता आती के भाव पर आधारित पेंटिंग काफी सराही गईं।
भुवनेश्वर भास्कर की बिहार की लोकभाषाओं पर आधारित पेंटिंग और राजेश कुमार चंद की 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू कुंवर सिंह पर आधारित पेंटिंग उत्कृष्ट माना गया। धमेंद्र कुमार की चंपारण सत्याग्रह और गांधी के नेतृत्व पर आधारित पेंटिंग भी आकर्षक रहे। अनिल बिहारी, मनीषा गोयल, शिखा सिन्हा, मनोज कुमार बच्चन, मानस जैन, नरेंद्र पाल सिंह की पेंटिंग थी।
प्रदर्शनी में वीके जैन की फोटोग्राफी की सराहना की गई। मौके पर राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह, कला एवं संस्कृति विभाग के अपर सचिव आनंद कुमार, राज्यपाल सचिवालय के अपर सचिव विजय कुमार, नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट के अध्यक्ष श्याम शर्मा, बिहार ललित कला अकादमी के पूर्व अध्यक्ष आनंदी प्रसाद बादल आदि मौजूद थे। प्रदर्शनी में पेंटिंग के 40 और फोटोग्राफी के 32 प्रदर्शनी लगाये गए।
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