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दिव्यांग पूर्व सैनिक पेंशनर्स को आयकर में छूट, नए आदेश जारी
सेनाओं के तीनों अंगो में नौकरी कर चुके ओर सेना आॅप्रेशन या दूसरे कारणों से डयूटी के दौरान ही दिव्यांग हुए दोहरी पेंशन ले रहे पूर्व सैनिक पेंशनर्स को अब दिव्यांगता पेंशन पर फिलहाल आयकर नहीं देना होगा। मामला सुप्रीम कोर्ट में होने व वहां से रोक लगने के बाद रक्षा लेखा प्रधान नियंत्रक पेंशन इलाहाबाद की ओर से इस बारे सर्कुलर-211 जारी कर दिया गया है। इन जारी आदेशों में कहा गया है कि दिव्यांगता पेंशनर्स से आयकर की रिकवरी नहीं की जाए। इसके दायरे में राज्य के सैकड़ों पात्र पूर्व सैनिक आए थे। राज्य में इस समय इस श्रेणी लगभग 20 हजार पूर्व सैनिक हैं।
बीते साल ही इस बारे आदेश जारी हुए थे कि दिव्यांग पूर्व सैनिक जो सेना पेंशन के अलावा दिव्यांगता पेंशन ले रहे हैं ओर सेना बोर्ड नहीं है, उनकी पेंशन पर भी आयकर काटा जाए। इसके बाद ही विरोध में संगठन भी उतर गए थे। भास्कर ने भी पूर्व सैनिकों की इस पीड़ा को नए आदेश जारी, दिव्यांग पूर्व सैनिक पेंशनर्स भी आए आयकर के दायरे में समाचार को बीती 8 जुलाई के अंक में प्रकाशित कर प्रमुखता से उठाया था। अब 3 मार्च को इस बारे ताजा आदेश जाे जारी किए गए हैं, उसमें कहा गया है कि इन पेंशनर्स से इनकम टैक्स की रिकवरी फिलहाल न की जाए। इसके बाद पूर्व सैनिक संगठनों के अलावा पात्र पेंशनर्स ने भी कुछ राहत की सांस ली है, जो आयकर इनसे कटा होगा, वह भी वापस किया जा रहा है। हालांकि पूर्व सैनिकों की सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अभी जरुर इनकी नजरें टिकी हैं।
आयकर लगाना ओर वापस लेना दुर्भाग्यपूर्ण
ऑनरेरी कमीश्न ऑफिसर एसोसिएशन का कहना है कि उनके सदस्य मुंशी राम ठाकुर के 51 हजार 554 रुपए काट लिए गए थे, लेकिन बाद में इसे पूर्व सैनिकों के भारी दबाव के चलते वापस करना पड़ा है। एसोसिएशन के राज्य अध्यक्ष कै.जगदीश वर्मा का कहना है कि इस बावत पीसीए इलाहाबाद ने 211 नंबर का सर्कुलर 3 मार्च को जारी कर दिया है। एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से भी मांग की है कि वह पीसीडीए को आदेश जारी करके अवगत करवाए कि इस प्रकार की सैनिकों के विरुद्ध कार्रवाई पर प्रतिबंध लगाए। वर्मा का कहना है कि आयकर काटना सैनिकों के प्रति अन्याय है, मामला सुप्रीम कोर्ट में है। इसके बाद ही इसे काटने पर फिलहाल रोक लग गई है। उनका कहना है कि कोर्ट के फैसले को लेकर उन्हें उम्मीद है।
कौन हैं पात्र...सैनिक जव पूर्व सैनिक बनता है, तो पेंशन ही उनके लिए परिवार को चलाने का सबसे बड़ा जरिया आर्थिक तौर पर होता है। दरअसल दिव्यांगता को दो कैटेगरी में बांटा गया है, जो सेना आॅप्रेशन या दूसरे कारणों से घायल होकर अपंगता के दायरे में आ जाते हैं और सेना बोर्ड न होने से सेवानिवृत्त होने पर सेना पेंशन के साथ-साथ दिव्यांगता पेंशन भी ले रहे हैं, उन्हें आयकर के दायरे में लाया गया है। जबकि दूसरी कैटेगिरी वह है, जो सेना आॅप्रेशन या दूसरे कारणों से सेना ड्यूटी के दौरान ही पूरी तरह से दिव्यांग हो चुके हैं ओर इस दौरान या तो उनकी नौकरी कुछ साथ या कुछ समय ही बाकी थी वह दिव्यांगता के कारण बोर्ड ऑफ आउट हो गए हैं या ड्यूटी करने में सक्षम न माने जा रहे हो तो उन्हें घर भेज दिया जाता है। हालांकि उन्हें भी दिव्यागंता पेंशन मिलती है, लेकिन आयकर के दायरे में नहीं आते उनको यह आदेश नहीं हैं।
भास्कर ने 8 जुलाई के अंक में प्रकाशित किया था समाचार।