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काला धन निकालने की जुगत, आईटी ने कहा - डिटेल नहीं दिया तो जुर्माना और जेल भी

3 वर्ष पहले
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भिलाई. छह साल के दौरान जमीन बेची पर उसका 10 फीसदी टैक्स नहीं दिया, एफडी का पैसा मिला लेकिन अंश राशि जमा नहीं किया और 10 लाख रुपए से ज्यादा का ट्रांजेक्शन किया है तो वे अब आईटी के निशाने पर हैं। प्रदेश के ऐसे 12500 लोगों को नोटिस भेजा गया है, इनमें रायपुर के 4600 लोग भी शामिल हैं। आईटी ने सभी को ऑनलाइन नोटिस भेजते हुए 28 अप्रैल  तक जवाब देने के लिए कहा है। इस तय सीमा में जिन्होंने जवाब नहीं दिया उनके खिलाफ जुर्माना के साथ गिरफ्तारी भी की जा सकती है। कालाधन पकड़ने के लिए आईटी ने यह नई पहल की है, जिससे नोटिस मिलने वाले लोग भी अब हैरान-परेशान हैं।


आयकर विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 2011 से 2014 के दौरान प्रदेश के जिन लोगों ने 10 लाख रुपए से अधिक का अपने खाते के जरिये लेन-देन किया, उन्हें लेकर एक सूची बनाई गई है। विभाग की तरफ से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया समेत देश के सभी बैंकों और सहकारी बैंकों से वर्ष 2011-12, 2012-13 और 2013-2014 वित्तीय वर्ष में ऐसे लोगों की जानकारियां मंगवाई गई है। आईटी ने वर्ष 2015-16 और 2016-17 के आयकर रिटर्न की फाइलों की जांच के बाद अब पुराने मामलों को खंगालना शुरू कर दिया है। विभाग को इससे उम्मीद है कि छह साल पहले जिन लोगों ने भी किसी तरह से अपना कालाधन छिपाया होगा, वह नए सिरे से इस जांच के बाद पकड़े जाएंगे। इससे विभाग को करोड़ों रुपए टैक्स मिलने की संभावना है। 

 

प्रदेश को 240 वार्डों में बांटा और स्क्रूटनी के बाद आए निशाने पर
आयकर विभाग ने छत्तीसगढ़ को 240 वार्डों में बांटा है। प्रत्येक आयकर अधिकारियों को औसतन 250 केस की जिम्मेदारी दी गई है। नोटिस भेजने  के पहले कई खातों में दस लाख से अधिक का ट्रांजेक्शन करने वालों की स्क्रूटनी की गई। उनके पैन नंबर और अलग-अलग बैंक खातों के साथ परिवारवालों के ट्रांजेक्शन की भी जांच की गई है। रिटर्न फाइल में आयकर दाता ने उस रकम का उल्लेख किया है या नहीं, इसे जांचा गया। जिनके रिटर्न फाइल और बैंक ट्रांजेक्शन मैच नहीं हो रहे हैं या उनकी तरफ से 10 लाख से ज्यादा का लेन-देन हुआ है लेकिन उन्होंने इसका उल्लेख अपने रिटर्न फाइल में नहीं किया है, ऐसे लोगों को अब नोटिस भेजा गया है। 

 

इन्हें देना होगा जवाब

- वर्ष 2010 -11 में रिटर्न फाइल नहीं करने वाले। 
- खाते में 10 लाख या इससे अधिक नकद जमा किया। 
- 50 लाख या इससे अधिक की जमीन की खरीदी बिक्री की। 
- एफडी या ऐसे ही किसी बांड से दो लाख या अधिक जमा किए। 
- पैन नंबर है लेकिन रिटर्न फाइल में इनकम की जानकारी नहीं दी। 

 

 

कारोबारी, बैंक अफसर के साथ किसानों को भी लेटर
आईटी की तरफ से इस दौरान छह साल पहले 10 लाख या इससे अधिक का ट्रांजेक्शन करने के मामले में निजी या शासकीय संस्थानों में काम करने वाले, छोटे और मंझोले कारोबारी के साथ किसान, शेयर ब्रोकर, गल्ला कारोबारी, जमीन दलाल, बिल्डर्स, बैंक के अधिकारियों को भी नोटिस जारी किया गया है। उनसे एक निश्चित समय सीमा के भीतर जवाब देने को कहा है। इसके लिए वे अपने सीए से सलाह ले सकते हैं। इस नोटिस के मिलने से अधिकतर लोग हैरान हैं कि अब पिछले पांच-छह साल पहले हुए ट्रांजेक्शन का लेखा-जोखा कहां से दें। 

 

 

जांच में पैसे को लेकर मिला अंतर तो कार्रवाई पेनाल्टी के साथ सजा भी
जिन लोगों को नोटिस जारी किया गया है, उनसे संबंधित वर्ष यानी 2010-11 का रिटर्न फाइल जमा करने को कहा जा रहा है। जवाब मिलने के बाद आयकर अधिकारी रिटर्न फाइल और बैंक से मिले स्टेटमेंट का मिलान करेंगे। इसमें अंतर मिलने पर आयकर चोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जितने पैसे का गैप मिलेगा, उसके अनुसार इनकम टैक्स चोरी का केस बनाकर पेनाल्टी की जाएगी। मामला गंभीर होने पर गिरफ्तारी भी की जा सकती है।


धारा 148 में छह साल पहले तक की जानकारी मांग सकते है 
इनकम टैक्स की धारा 148 के तहत लोगो को नोटिस भेजा गया है। यह नोटिस तब भेजा जाता है, जब किसी आय की गणना या मूल्यांकन छूट गई हो। नोटिस देने की समय सीमा-अगर छूट गई आय एक लाख रुपए या इससे कम है तो इसे मूल्यांकन वर्ष के अंत से आगामी चार वर्षों के दौरान भेजा जा सकता है, लेकिन अगर छूटी गई राशि एक लाख से अधिक है तो तय वित्तीय वर्ष के छह वर्ष के भीतर नोटिस भेजकर जानकारी मांगी जा सकती है।

 

 

 

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