--Advertisement--

करंट अफेयर्स पर 30 से कम उम्र के युवाओं की सोच, क्या हम विरोध के लिए जापानियों जैसा तरीका नहीं अपना सकते?

कहीं न कहीं, वह हड़ताल, वह मोर्चाबंदी हमें किसी न किसी प्रकार से प्रभावित कर रही है।

Danik Bhaskar | May 11, 2018, 01:30 AM IST
हाल ही में जापान की एक कंपनी के बस ड्राइवरों ने अपनी मांगों के संबंध में हड़ताल की थी। लेकिन, यह हड़ताल इस प्रकार थी कि ड्राइवर अपना कार्य तो कर रहे थे परंतु मुसाफिरों से किराया नहीं ले रहे थे। इस प्रकार कंपनी को बसों के खर्च पर नुकसान तो हो रहा था परंतु आम आदमी को किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।
यह अपने आप में एक बहुत बड़ी सीख है। हम जब भी सरकार या किसी निजी संस्था की नीति अथवा कार्यों के खिलाफ कोई कदम उठाते हैं तो तब हम यह सोचते हैं कि अगर उनका पूरा काम ठप कर दें तो हमारी मांगे मान ली जाएंगी। मांगे मान ली जाए या नहीं मानी जाे, यह तो बाद की बात है, परंतु उस कारण आम आदमी को जो परेशानी होती है उसका कोई भी समाधान नहीं है। स्कूल की बसों ने अगर हड़ताल कर दी, तो बच्चो के माता-पिता परेशान होते हैं। डॉक्टरों ने अगर धरना प्रदर्शन करके कार्य बंद कर दिया, तो बेचारे आम आदमी को अपने उस दो साल के बच्चे की जान बचाने के लिए भटकना पड़ता है। अगर राजनीति के प्रभाव में पूरा देश बंद हो जाए तो सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है।
हम क्यों यह सोचते हैं कि अगर पूरा काम बंद कर दे तो इससे जनता को फायदा होगा। इस प्रकार से तो पूरी अर्थव्यवस्था ही ठप हो जाएगी। इन बंद, हड़तालों अथवा धरनों में हम ये क्यों भूल जाते हैं कि कहीं न कहीं, वह हड़ताल, वह मोर्चाबंदी हमें किसी न किसी प्रकार से प्रभावित कर रही है।
अगर हमें अपनी बात उठानी ही है, तो वह इस प्रकार होनी चाहिए कि हम अपना कार्य करते रहे, परंतु जिसे हमें प्रभावित करना है वह प्रभावित हो जाए। इस प्रकार से हमारा कार्य भी हो जाएगा और आम व्यक्ति को किसी भी प्रकार से परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी और वह व्यक्ति भी हमारी लड़ाई में हमारा साथ देगा। अगर इस प्रकार से हमने कार्य किया तो शायद यह देश जिन कठिनाइयों में फंसा हुआ है, उससे बाहर आ जाएगा और व्यक्ति को अपना कार्य सकारात्मक रूप से करने में कोई अड़चन नहीं आएगी।