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भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ती रहेगी, चालू वित्त वर्ष में 7.3% ग्रोथ के आसार: आईएमएफ

आईएमएफ के मुताबिक अगले वित्त वर्ष में इकोनॉमी 7.5% की दर से बढ़ेगी

DainikBhaskar.com | Last Modified - Aug 08, 2018, 05:52 PM IST

भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ती रहेगी, चालू वित्त वर्ष में 7.3% ग्रोथ के आसार: आईएमएफ

- जनवरी-मार्च तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ 7% रही

- अप्रैल-जून के आंकड़े 31 अगस्त को जारी किए जाएंगे

वाशिंगटन. भारत दुनिया की सबसे तेज रफ्तार वाली अर्थव्यवस्था के दर्जे को बरकरार रखने की दिशा में बढ़ रहा है। पिछले सालों में हुए आर्थिक सुधारों का असर अब दिखने लगा है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने बुधवार को ऐसा कहा। भारत की 2.6 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था को आईएमएफ के इंडिया चीफ रानिल सेलगादो ने उस हाथी की तरह बताया है जो अब दौड़ना शुरू कर रहा है।

जीडीपी ग्रोथ 7.3% रहेगी : आईएमएफ के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.3% रहेगी। मार्च 2019 के बाद देश की इकोनॉमी 7.5% की दर से बढ़ेगी। मुद्रा कोष ने ग्लोबल ग्रोथ में भारत की हिस्सेदारी 15% रहने की उम्मीद जताई।

मौद्रिक नीति में सख्ती जरूरी : इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) ने तेल की ऊंची कीमतों, दुनियाभर के देशों के वित्तीय असंतुलन और टैक्स रेवेन्यू में कमी को अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बताया। उसने कहा कि, संबंधित विभागों को ग्रोथ में तेजी का फायदा उठाते हुए कर्ज को कम करना चाहिए। आरबीआई को धीरे-धीरे मौद्रिक नीति सख्त बनानी चाहिए।

नोटबंदी, जीएसटी से उबर रही है अर्थव्यवस्था : आईएमएफ ने कहा कि, नोटबंदी और जीएसटी के बाद देश की अर्थव्यवस्था फिर से रफ्तार पकड़ रही है। जनवरी-मार्च में जीडीपी ग्रोथ 7% रही जो 7 तिमाही (21 महीने) में सबसे ज्यादा है। परचेजिंग मैनेजर्स के सर्वे के और ऑटो सेल्स के आंकड़ों को देखते हुए देश की आर्थिक विकास दर 7% से ऊपर रहने की उम्मीद है। सरकार 31 अगस्त को अप्रैल-जून तिमाही के लिए जीडीपी के आंकड़े जारी करेगी।

आर्थिक सुधार विकास के लिए अहम : आईएमएफ के इंडिया चीफ सेलगादो ने कहा कि लगातार आर्थिक सुधार इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए अहम साबित होंगे। जीएसटी में सुधार से फायदा होगा। श्रम सुधारों से कंपनियों के विस्तार को गति मिलेगी। लेकिन, रुपए की कमजोरी इकोनॉमी के लिए जोखिम है। 2018 में डॉलर के मुकाबले रुपया 7% गिर चुका है। इसका असर महंगाई पर दिख सकता है। हाल ही में आरबीआई ने लगातार दूसरी समीक्षा बैठक में रेपो रेट बढ़ाई। इसकी वजह तेल की ऊंची कीमतों और ग्लोबल ट्रेड वॉर को बताया।

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