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भारत ने कहा- पाक के साथ बातचीत में तीसरे देश का दखल मंजूर नहीं, चीन के राजदूत का प्रस्ताव ठुकराया

3 वर्ष पहले
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  • सुषमा स्वराज ने पिछले महीने कहा था जब सरहद पर जनाजे उठ रहे हों तो बातचीत की आवाज अच्छी नहीं लगती
  • भारत पहले भी पाकिस्तान के साथ त्रिपक्षीय वार्ता से इनकार करता रहा है

 

नई दिल्ली.  भारत ने चीन के राजदूत लु झाओहुई के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए तीसरे पक्ष को शामिल करने की सलाह दी थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने सोमवार देर रात कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध पूरी तरह से द्विपक्षीय हैं और इसमें किसी भी तीसरे देश का दखल मंजूर नहीं। लुओ ने कहा- शंघाई सहयोग संगठन से इतर भारत-पाकिस्तान और चीन को त्रिपक्षीय वार्ता करनी चाहिए।

 

 

- रवीश कुमार ने कहा- "हमने पाकिस्तान के साथ बातचीत पर तीसरे पक्ष को शामिल करने के बारे में चीन के राजदूत के बयान को सुना है, लेकिन हमें चीन की सरकार की तरफ से इस तरह का कोई मशविरा नहीं मिला है। हम समझते हैं कि यह राजदूत का निजी विचार है।" 

 

भारत-पाकिस्तान और चीन को वार्ता करनी चाहिए: चीन के राजदूत लु झाओहुई ने दिल्ली में एक कार्यक्रम में यह सलाह दी। उन्होंने कहा कि कुछ भारतीय दोस्तों ने मुझे इस तरह की बातचीत का आइडिया दिया है। चीन, रूस और मंगोलिया के नेता भी ऐसा कर चुके हैं। इसलिए भारत और पाकिस्तान को भी अपने मसले सुलझाने के लिए ऐसा करना चाहिए। भले ही अभी नहीं लेकिन भविष्य में यह सही दिशा में उठाया गया कदम साबित हो सकता है। 

 

इस साल दो बार और मिल सकते हैं मोदी-जिनपिंग: मोदी और जिनपिंग के बीच पिछले दो महीने में दो बार मुलाकात हुई। दोनों के इस साल के आखिर तक ब्रिक्स और जी-20 सम्मेलन के दौरान भी मिलने की उम्मीद है। मोदी ने 27-28 अप्रैल को वुहान में जिनपिंग से अनौपचारिक मुलाकात की थी। इसके बाद वे 9 जून को शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के दौरान चीन के राष्ट्रपति से मिले थे।

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