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ब्रह्मोस का उड़ीसा तट से सफल परीक्षण, पहली बार स्वेदेशी तकनीकी से बढ़ाई गई मिसाइल की अवधि

3 वर्ष पहले
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- ब्रह्मोस मिसाइल के अलग-अलग वेरियंट सतह, हवा और समुद्र से मार कर सकते हैं

 

 

 

भुवनेश्वर.   भारत ने रूस की मदद से बनाई गई ब्रह्मोस मिसाइल का सोमवार को एक और कामयाब परीक्षण किया। इसे ओडिशा तट पर स्थित चांदीपुर टेस्ट रेंज से सुबह 10.44 बजे लॉन्च किया गया। इस परीक्षण का मकसद इस मिसाइल की मियाद 10 से बढ़ाकर 15 साल करना था। 

 

 

 

 

 

मिसाइल बदलने की लागत में आएगी कमी

- रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने मिसाइल के सफल परीक्षण पर ब्रह्मोस टीम और डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) को बधाई दी।

- उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, "इस तकनीक के सफल परीक्षण से मिसाइल को जल्द बदलने से बढ़ने वाली लागत में कमी आएगी।" 

 

2007 से ब्रह्मोस का इस्तेमाल कर रही सेना 
- भारतीय सेना सतह पर मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल 2007 से कर रही है। आर्मी के पास फिलहाल इसकी तीन रेजिमेंट हैं। 

 

भारत की तीनों सेनाएं करती हैं इसका इस्तेमाल
-  डीआरडीओ के अफसर ने बताया कि सतह और जल पर मार करने वाली मिसाइल का इस्तेमाल आर्मी और नेवी पहले से ही कर रही हैं। इसके एयरफोर्स वर्जन का भी सफल परीक्षण हो चुका है। 
-  ब्रह्मोस मिसाइल के अलग-अलग वेरियंट सतह, हवा और समुद्र से मार कर सकते हैं

 

भारत ने 2017 में दुनिया की सबसे तेज मिसाइल का किया था टेस्ट
- भारत ने नवंबर 2017 में दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का टेस्ट किया था। इसे सुखोई 30mki से छोड़ा गया था। मिसाइल ने बंगाल की खाड़ी में टारगेट को कामयाबी से हिट किया था।
- भारतीय वायुसेना दुनिया की ऐसी पहली एयरफोर्स है, जिसके जंगी बेड़े में ब्रह्मोस जैसी मिसाइल है। इसकी स्पीड 2.8-3.0 मैक (3675-3430 किमी/घंटा) है। 
- इसी साल मार्च में सतह पर मार करने वाली मिसाइल की रेंज 290 किमी से बढ़ाकर 400 किमी की गई थी।

- डीआरडीओ के मुताबिक, जून 2016 से भारत ने मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण प्रणाली विकसित कर ली है। जिससे मिसाइल की रेंज 400 किलोमीटर से बढ़ाकर 800 किलोमीटर की जा सकती है।

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