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भारत साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ में महिला ग्रेजुएट देने में पूरी दुनिया में शीर्ष पर, लेकिन उन्हें रोजगार देने में 19वें नंबर पर

News - दुनिया में जितनी साइंस वूमन ग्रेजुएट होकर निकलती हैं उनमें 43% भारत से होती हैं भारत पूरी दुनिया में साइंस,...

Feb 15, 2020, 07:21 AM IST
दुनिया में जितनी साइंस वूमन ग्रेजुएट होकर निकलती हैं उनमें 43% भारत से होती हैं


भारत पूरी दुनिया में साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ (एसटीईएम) सब्जेक्ट में ग्रेजुएट देने में शीर्ष पर है। यूनाइटेड नेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में एसटीईएम सेक्शन में जितनी वूमेन ग्रेजुएट निकलती हैं उनमें 43% भारत से हैं। उच्च शिक्षा में हम भले ही पीछे हैं लेकिन साइंस में वूमेन ग्रेजुएट देने में सबसे आगे हैं। हालांकि जब इन ग्रेजुएट को जॉब देने या रिसर्चर बनाने की बात आती है तब हम नंबर एक से खिसक कर सीधे 19वें नंबर आ जाते हैं।

यूनाइटेड नेशन के अनुसार दुनिया में भारत साइंस में महिला ग्रेजुएट देने में सबसे आगे है लेकिन जब देश के अंदर तुलनात्मक आंकड़े देखते हैं तो स्थिति अलग होती है। भारत में एसटीईएम में लगभग 2.80 लाख ग्रेजुएट निकलते हैं। सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद इसमें महिलाओं की संख्या मात्र 14 फीसदी है। भारत में साइंस में एडमिशन लेने वाली महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है लेकिन उनके वर्कप्लेस पर जाने में भारी अंतर है। महिलाओं को इस सेक्शन में सबसे ज्यादा नौकरी देने के मामले में अर्जेंटिना 53% प्लेसमेंट देकर शीर्ष पर है। 52 फीसदी के साथ न्यूजीलैंड दूसरे नंबर और 48 फीसदी के साथ मलेशिया तीसरे नंबर पर है।

पाकिस्तान साइंस में महिला ग्रेजुएट देने में शीर्ष 20 देशों में से भी नहीं है लेकिन साइंस वूमेन ग्रेजुएट को नौकरी देने में वो पूरी दुनिया में 39% के साथ आठवें नंबर पर है। यूएन ने कहा कि भारत के साथ यह विरोधाभास है कि वह साइंस में वूमेन ग्रेजुएट देने के मामले में तो आगे है लेकिन रिसर्चर या जॉब देने में काफी पीछे है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत तेजी से डिजिटली बदल रहा है। इस स्थिति में देश को टेक्निकल स्ट्रांग मेनफोर्स की जरूरत है। ऐसे में अगर हम क्वालिटी एजुकेशन और जॉब के मौके बढ़ाते हैं तो देश की बड़ी जरूरत पूरी हो सकती है।

साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ में महिला ग्रेजुएट की हिस्सेदारी

32%

34%

35%

35%

37%

37%

38%

40%

43%

43%

फ्रांस

यूएसए

तुर्की

स्वीडन

ब्राजील

इंडोनेशिया

ब्रिटेन

इटली

रुस

भारत

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